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वेटिंग क्लियर नहीं होती थी इसलिए बनाया ट्रेन मैन एप, अब चला रहे 20 लाख लोग

मेरा घर बिहार के नाेगछिया में है। कक्षा चौथी से पढ़ाई के लिए घर से बाहर रह रहा हूं। घर अक्सर ट्रेन से ही जाना होता है।

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2018, 07:32 AM IST
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ग्वालियर. मेरा घर बिहार के नाेगछिया में है। कक्षा चौथी से पढ़ाई के लिए घर से बाहर रह रहा हूं। घर अक्सर ट्रेन से ही जाना होता है। 2005 में आईआईटी रूड़की में एडमिशन मिला और इंटीग्रेटेड एमटेक करने के बाद 2010 में जेपी मोर्गन कंपनी में प्लेसमेंट हो गया। छुट्‌टी मिलती तो ट्रेन से घर जाना होता, कभी-कभी वेटिंग टिकिट मिलते। कई बार ऐसा होता कि 100 वेटिंग भी क्लियर हो जाती और कई बार एक वेटिंग भी क्लियर नहीं होती।

- यहीं से आइडिया आया कि ऐसा कुछ करना चाहिए जिससे लोगों को वेटिंग क्लियर होने के बारे में सही जानकारी मिल सके। 2013 में जॉब छोड़ी और मशीन लर्निंग का 10 सप्ताह का ऑनलाइन कोर्स किया। इसके बाद गुड़गांव आया गया और ट्रेन मैन वेबसाइट बनाने की शुरुआत की।

- 8 महीने काम करने के बाद मई 2013 में ट्रेन मैन वेबसाइट शुरू की। पहले दिन इस पर 100 लोगों ने विजिट की। यह ऐसी वेबसाइट है जिस पर आप यह देख सकते हैं कि आपकी वेटिंग क्लियर होने की संभावना कितनी है। जब इसे अच्छा रिस्पांस मिला तो 2014 जनवरी में ट्रेन मैन एप्लीकेशन लांच की, जिसे आज 20 लाख लोग चला रहे हैं।
-जैसा कि एबीवी ट्रिपल आईटीएम की माइंड ओवर मैटर कॉम्पटीशन में बतौर विशिष्ट अतिथि शरीक हुए विनीत चिरानिया ने बताया।

3 करोड़ पीएनआर डाटा चेक कर बताता है संभावना
- विनीत ने बताया कि अभी हमारे पास 3 करोड़ पीएनआर डाटा है। जब कोई व्यक्ति वेबसाइट या एप्लीकेशन पर पीएनआर स्टेटस चेक करता है, तब यह एप्लीकेशन उस ट्रेन का पिछला डाटा देखता है कि कितनी वेटिंग कितने दिनों में क्लियर हुई थी।

- इस आधार पर बताता है कि संबंधित व्यक्ति की वेटिंग क्लियर होगी या नहीं। 65 प्रतिशत से ऊपर ग्रीन बटन आता है, इसका मतलब वेटिंग क्लियर हो जाएगी। 50 प्रतिशत से कम आने पर रेड सिग्नल आता है, इसका मतलब वेटिंग क्लियर नहीं होगी। 50-50 की संभावना में यलो कलर आता है। इस एप की एक्यूरेसी 90 प्रतिशत है। इसलिए इसे प्ले स्टोर पर 4.6 रेटिंग दी गई है।

पांच साल पहले तीन लाख किए इन्वेस्ट आज टर्न ओवर एक करोड़ रुपए
- विनीत ने बताया कि ट्रेन मैन वेबसाइट बनाने की शुरुआत अकेले की, इसके कुछ दिन बाद उनका बैचमेट मोहम्मद आमेर भी जुड़ दिया। यह सिस्टम तैयार करने में 3 लाख रुपए का खर्च आया लेकिन आज के स्टार्टअप का टर्न ओवर 1 करोड़ रुपए है। साथ ही 5 लोगों को रोजगार भी उनका स्टार्टअप दे रहा है। आगे वह इसमें कई और फीचर्स जोड़ने जा रहे हैं। यह मोबाइल एप एंड्रॉइड और आईओएस दोनों के लिए हैं।

अगले 4 घंटे में कौनसी ट्रेन, यह भी पता चलेगा
- जिस शहर में आप हैं, उसके स्टेशन पर अगले 4 घंटे में कौन सी ट्रेन आएंगी इसका भी पता इस एप के फीचर्स से चलेगा। इसके अलावा एप में पीएनआर, सीट अबेलिविलिटी, ट्रेनिंग रनिंग स्टेटस, शेड्यूल, कोच डिस्प्ले भी इससे पता किया जा सकता है।

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