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घसीटते पैरों से पिसवाने ले जाते हैं गेहूं, आश्रम संचालक ऐसा करने को करते हैं मजबूर

ब्रज बिहारी को चलने-फिरने में असमर्थ कर दिया तो सुकून की तलाश में वृद्धाश्रम में शरण ली

Dainik Bhaskar

Dec 21, 2017, 08:20 AM IST
Wheat moves to get rid of the scratches

ग्वालियर. अपनों की बेरुखी और जिंदगी की ठोकरों ने जब ब्रज बिहारी को चलने-फिरने में असमर्थ कर दिया तो सुकून की तलाश में वृद्धाश्रम में शरण ली। लेकिन यहां भी बेरुखी का सिलसिला खत्म नहीं हुआ। कांच मिल स्थित शांति निकेतन वैष्णव वृद्धाश्रम में ब्रज बिहारी को हर दिन आश्रम के लिए गेहूं पिसवाने दो किमी तक साइकिल पर ढुलाई करना पड़ती है। वह चलने-फिरने में असमर्थ है। फिर भी आश्रम संचालक उसे ऐसा करने को मजबूर करते हैं। ब्रज बिहारी किसी तरह पांव घसीटते हुए गेहूं की ढुलाई करते हैं। भास्कर ने जब इस वृद्धाश्रम का जायजा लिया तो बुजुर्गों की स्थिति दयनीय मिली।

स्थानीय रहवासियों ने वीडियो बनाया

- वीडियो में चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद 70 किलो से अधिक गेहूं की ढुलाई साइकिल से करते दिखाई दे रहे हैं। रास्ते में जब उनकी बोरियां गिर जाती हैं तो उन्हें उठाने के लिए भी किसी राहगीर की मदद का इंतजार रहता है।

- क्षेत्रवासी अनुराग शर्मा बताते हैं कि वे रोज ब्रज बिहारी को बोझा ढोते देखते हैं। वृद्धाश्रम में रहने यह सब करने की क्या जरूरत है। इस पर बुजुर्ग कहते हैं आश्रम संचालक बाबा मस्तराम उन्हें बोझा ढोने को मजबूर करते हैं।

- यहां रहना है तो जो काम बताया जाएगा, करना ही होगा: मैं और मेरी बहन दोनों ही इस वृद्धाश्रम में रहते हैं। बहन मानसिक रूप से निशक्त है। मेरी शादी नहीं हुई और बहन विधवा है। हम दोनों ही अब एक दूसरे का सहारा हैं। यहां दो सालों से हैं। इससे पहले किलागेट पर किराए के घर में रह रहे थे।

- एक एक्सीडेंट में दोनों पैरों की अंगुलियां और टखने चोटिल हो गए। तब से चलने-फिरने में असमर्थ हो गया तो छोटा-मोटा काम करने के लायक भी नहीं बचा। किराया नहीं दे सका तो मकान मालिक दो साल पहले यहां आश्रम में छोड़ गए। तब से यहीं रह रहे हैं।

- यहां रहने के लिए आश्रम संचालक जो काम करने को कहते हैं, वो मैं करता हूं। चल-फिर नहीं सकता लेकिन यहां रहना है तो जो काम करने को बोला जाएगा, करना पड़ेगा।

-जैसा पीडि़त बुजुर्ग ब्रज बिहारी ने दैनिक भास्कर को बताया

संचालक को वीडियो दिखाया तो हड़बड़ाए:

- भास्कर ने आश्रम संचालक बाबा मस्तराम से बात की तो वे बोले कि उनके यहां किसी भी बुजुर्ग से कोई काम नहीं कराया जाता है। आश्रम संचालक ने बुजुर्ग ब्रज बिहारी को लेकर खुद कहा कि वह चलने-फिरने में असमर्थ है और उनसे किसी भी तरह का श्रम नहीं कराया जाता। लेकिन जब भास्कर संवाददाता ने स्थानीय लोगों द्वारा बनाया गया वीडियो दिखाया तो हकलाते हुए आश्रम संचालक बोले कि बुजुर्ग ब्रज बिहारी अपनी मर्जी से बोझा ढोने का काम करते हैं। ऐसा करवाने के लिए उन्हें सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों ने ही बोला है।

आश्रम संचालक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
- शांति निकेतन में चल रहे वृद्धाश्रम में गड़बड़ियों की कुछ शिकायतें मुझे भी मिली हैं। मैं जल्द ही इस आश्रम का औचक निरीक्षण करूंगा। वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से बोझा ढोने जैसा श्रम कराया जाना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। आश्रम संचालक के खिलाफ हम कार्रवाई करेंगे।

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