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सदन में MLA की सक्रियता जान सकेगी जनता

ग्वालियर/ भोपाल

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 02:05 AM IST
सदन में MLA की सक्रियता जान सकेगी जनता
ग्वालियर/ भोपाल
मप्र विधानसभा द्वारा रिकाॅर्ड रूम में रखे करीब 400 साल पुराने रिकाॅर्ड को डिजिटलाइज्ड करने का काम किया जा रहा है। इसका मूल मकसद तो पुराने रिकाॅर्ड को संरक्षित करना और आम जनता को जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जानकारी देना है। इससे जनता को पता चलेगा कि उसके द्वारा चुने गए नेता उनके लिए क्या काम किया और क्या कर रहे हैं? इसी काे ध्यान में रखकर विधानसभा द्वारा करीब चार महीने पहले रिकाॅर्ड को डिजिटल करवाने का काम शुरू किया गया।

इसमें सन् 1600 में ब्रिटेन की हाउस ऑफ कामंस में सदस्यों के बीच हुई डिबेट का हिस्सा और मप्र के गठन से लेकर अब तक के मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधानसभा सदस्यों के बीच हुई बहस के हिस्से प्रमुख हैं। यह काम एक निजी सॉफ्टवेयर कंपनी कर रही है, जो अगले छह-सात महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद सभी विधायकों को डाटा इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी। ट्रेनिंग में यह बताया जाएगा कि वे किस तरह जान सकते हैं कि उन्होंने कब किस विषय पर कौन सा भाषण दिया था। इसके लिए रिफ्रेंस कॉलम तैयार किया जा रहा है। एक की-वर्ड लिखकर इसे आसानी से देखा जा सकेगा। वहीं डिजिटल किए गए रिकॉर्ड में से ऐसे प्रमुख मुद्दे जो आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं, उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा। इनमें सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर जो बहस हुई, उन्हें अलग से डिजिटलाइज्ड किया जा रहा है। इसका फायदा यह होगा कि इस रिकाॅर्ड का विधानसभा में होने वाली सकारात्मक बहस के रूप में विधायक भी इस्तेमाल कर सकेंगे। साथ ही उनके क्षेत्र की जनता भी देख सकेगी। हालांकि वरिष्ठ विधायक गोविंद सिंह ने इस पर सवालिया निशान लगाया है। उनका कहना है कि पहले मप्र की ग्रामीण जनता को टेक्नोलॉजी से लैस किया जाना जरूरी है।

स्कैन कर रहे हैं डाटा

विधानसभा ने इसे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशनल आफ रिकार्डिंग एंड प्रोसिडिंग नाम दिया है। इसके तहत 1956 से लेकर अब तक का डाटा स्कैन किया जा रहा है। इसके लिए एक स्कैन मशीन लगाई गई है। इसमें दो हाई रेज्युलेशन कैमरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक फोटो की फाइल साइज करीब 8 से 10 एमबी तक बनती है। जिसकी मदद से कभी भी कितनी भी बड़ी फाइल प्रिंट के रूप में निकाली जा सकती है।

स्कैन होने के बाद डाटा को कैटेगरी वाइज अलग-अलग फाइलों में सेव किया जाता है। करीब 50 लोगों की टीम इसमें सुबह से शाम तक काम करती है। जो डाटा इनके द्वारा स्कैन किया जाता है, वह प्रतिदिन विधानसभा के अधिकारी जारी करते हैं और शाम को उसका अपडेट लेते हैं।

नागपुर से मिला रिकॉर्ड

मप्र विधानसभा ने उत्तरप्रदेश और हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में रिकॉर्ड को डिजिटलाइज्ड किए जाने के बाद यह काम शुरू किया है। मप्र के गठन के समय प्रदेश की विधानसभा को अधिकांश रिकॉर्ड सेंट्रल प्राविंस एंड बरार की राजधानी नागपुर से मिला था, जिसमें ब्रिटेन की हाउस आॅफ कामंस में चार सौ साल पहले सदस्यों के बीच हुई डिबेट के अंश और पुराने एआईआर जनरल भी हैं। इसके बाद 1956 से 2017 तक मप्र विधानसभा में होने वाली प्रमुख डिबेट का जो रिकॉर्ड है, उसे डिजिटलाइज्ड किया जाएगा।

काम चल रहा

 रिकाॅर्ड को डिजिटल करने का काम चल रहा है। जैसे ही यह पूरा होगा हम इसे आम आदमी के लिए भी वेबसाइट के माध्यम से अपलोड कर देंगे, ताकि लोग जान सकंे कि उनके प्रतिनिधियों ने किन मुद्दों पर चर्चा की है। इसमें संभवत: एक साल लगेगा। डॉ. सीताशरण शर्मा, अध्यक्ष, मप्र विधानसभा

पहले जागरूकता जरूरी

 यह अच्छी बात है कि शासन द्वारा रिकाॅर्ड को डिजिटलाइज्ड करके सुरक्षित किया जा रहा है, लेकिन सब कुछ डिजिटल करने से पहले लोगों को तकनीकी रूप से लैस करना होगा। आज भी ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट का कोई उपयोग नहीं होता है। डॉ. गोविंद सिंह, पूर्व मंत्री

मोबाइल पर देख पाएंगे?

 अब लोग लैपटॉप का इस्तेमाल नहीं करते हैं तो क्या इस रिकाॅर्ड को मोबाइल पर आसानी से देख पाएंगे। जरूरी यह है कि मोबाइल लायक इसे बनाया जाए, तभी आम जनता तक इसे पहुंचाया जा सकेगा। रामनिवास रावत, पूर्व मंत्री

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