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4 माह में ही उखड़ने लगेंगी स्मार्ट सड़कें

शहर की एक दर्जन से अधिक सड़कें अब चमचमाने लगी हैं। पॉश एरिया की कई सड़कों को डस्ट फ्री भी किया जा रहा है, लेकिन इन सड़कों...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
शहर की एक दर्जन से अधिक सड़कें अब चमचमाने लगी हैं। पॉश एरिया की कई सड़कों को डस्ट फ्री भी किया जा रहा है, लेकिन इन सड़कों के किनारे ड्रेनेज की व्यवस्था न होने से ये सड़कें चार माह बाद बरसात में उखड़ने लगेंगी।

civic issue

डीबी स्टार. ग्वालियर

डामरीकरण व सीसी के निर्माण से शहर की सड़कों की दशा तेजी से सुधर रही है। लोग खुश हैं। नगर निगम भी उनके टैक्स के लगभग 50 करोड़ रुपए सड़कों पर खर्च कर रहा है, लेकिन ये सड़कें कब तक सही-सलामत रहेंगी, इसकी प्लानिंग जिम्मेदार इंजीनियर व अफसर नहीं कर रहे हैं। नदी गेट से इंदरगंज चौराहा, केआरजी से आमखो बस स्टैंड व आकाशवाणी से मेला ग्राउंड की कुल चार किमी लंबी तीन सड़कों पर पानी की निकासी के लिए नाली की व्यवस्था नहीं है। ये सड़कें अभी चमचमा रही हैं, लेकिन पहली बरसात में ही डामर उखड़ जाएगा। ये तो उदाहरण मात्र हैं, शहर में इस तरह की 12 सड़कें पहली बारिश नहीं झेल पाएंगी।

अफसरों की बात

हम जांच कराएंगे आप भी बताएं


नगर निगम ने जो सड़कें बनवाई हैं, उनमें अगर पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं है, तो यह गंभीर बात है। हम मामले की जांच कराएंगे। आप भी हमें बताएं कि किन सड़कों में क्या कमी है और पानी निकासी की व्यवस्था किन सड़कों पर नहीं है। हम इन्हें ठीक कराएंगे।

पुरानी सड़कों पर डामर बिछा रहे हैं


हम पुरानी सड़कों पर डामर बिछा रहा है। शहर में नदीगेट सहित कई स्थानों पर हमने सड़कों के नीचे पाइप बिछवाए हैं, जिससे पानी सड़क पर जमा न हो। जहां तक पीडब्ल्यूडी की बात है, तो वह नई सड़क बनाते हैं। इस कारण ड्रेनेज सिस्टम का प्रावधान रखते हैं।

ये है सड़कों की स्थिति

सिटी सेंटर मार्ग:- डेढ़ किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण एक महीने पहले पूरा हुआ है। इस सड़क की लागत 40 लाख रुपए है। सड़क के एक किनारे जीवाजी यूनिवर्सिटी है, तो दूसरी ओर मकान। निगम ने इस सड़क पर भी ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया है। इस कारण सड़कें खराब होने का खतरा बना हुआ है। बारिश के सीजन में पानी भरने से सड़क उखड़ने लगती है। टीम ने इस मामले में नगर निगम के अफसरों से सवाल किए, तो वह बहाने बनाने लगे।

राजा पंचम सिंह मार्ग:-दो किलोमीटर लंबी सड़क का डामरीकरण निगम ने एक महीने पहले ही किया है। इसकी लागत 35 लाख रुपए है। यहां सड़क के किनारे ड्रेनेज सिस्टम की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में यहां बरसात में जलभराव की समस्या पैदा हो जाएगी। टीम ने इस मामले में नगर निगम के अफसरों से सवाल किए, तो वह बहाने बनाने लगे।

ऐसेे काम करता है यह ड्रेनेज सिस्टम

सड़क किनारे बड़े छेद किए जाते है। पानी को इन गड्‌ढों में पाइप के सहारे कच्चे स्थान पर छोड़ा जाता है। इस कारण बरसात के पानी से भूमिगत जलस्तर में बढ़ोतरी होती है और सड़क भी ज्यादा चलती है। कई जगह रोड साइड नालियां रहती हैं, जिनसे पानी निकल जाता है। ड्रेनेज सिस्टम में इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि सड़क का स्लोप आस-पास के भवनों और भवन के सामने की रोड का स्लोप सड़क की ओर रखा जाता है। इससे गुणवत्ता में बढ़ोतरी होती है और सड़क भी ज्यादा चलती है। कई जगह रोड साइड नालियां रहती हैं, जिनसे बारिश का पानी बहकर निकल जाता है।