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नाकामयाबी से हार मानने वालों के लिए प्रेरणा है अनीता

किराए के मकान में रह रही है अनीता। डीबी स्टार. ग्वालियर शहर की उम्मीद है अनीता। खासतौर से उनके लिए, जो जीवन में...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
किराए के मकान में रह रही है अनीता।

डीबी स्टार. ग्वालियर

शहर की उम्मीद है अनीता। खासतौर से उनके लिए, जो जीवन में जरा सी नाकामयाबी पर हार मान लेते हैं। ऐसे लोग जिन्हें हालत से हारकर जीवन बेकार लगता है। 39 वर्षीय अनीता आर्मी स्कूल में टीचर है। जन्म से हाथ-पैरों से चलने में लाचार। न कोई रिश्तेदार और न ही परिजन। जन्म के बाद किसी ने अनाथालय छोड़ दिया, लेकिन अनीता ने एमए-बीएड कर जॉब हासिल की। अब उन्हें सिर छिपाने के लिए एक मकान की जरूरत है। वो सरकारी योजना में इसकी पात्रता रखती हैं। इसके लिए तत्कालीन कलेक्टर ने लिखा-पढ़ी की, लेकिन बाबूओं की गोपाल गांठ यह काम नहीं होने दे रही है।

कलेक्टर द्वारा नगर निगम कमिश्नर को अनीता को आवास देने के लिए लिखा गया पत्र।

इंदौर में जन्म, नाता ग्वालियर से

बचपन में सड़क हादसे में अनीता व उसकी मां घायल हो गईं। अस्पताल में इलाज के दौरान मां की मौत हो गई। पिता कहीं चले गए और इस कारण अनीता का बचपन इंदौर के बाल संरक्षण आश्रम में बीता। वहां शिक्षा लेने के बाद अनीता को ग्वालियर अनुरक्षण गृह भेज दिया गया। माता-पिता का नाम पता न होने व दस्तावेज न होने के कारण अनीता की मार्कशीट पर माता-पिता के नाम की जगह अज्ञात लिखा है। वह एमए-बीएड पासआउट है और आर्मी स्कूल में स्पेशल एजुकेटर के पद पर काम कर रही है। अनीता को टीवी शो सत्यमेव जयते में भी दिखाया गया था। रैंप के मुद्दे पर अनीता को वाहन से आते-जाते दिखाया गया था।

अनीता की हरसंभव सहायता की जाएगी


आपने अनीता को आवास मिलने में आ रही परेशानी की जानकारी दी है। हम अनीता को आवास दिलाने में मदद करेंगे। अनीता की परेशानियां जान कर आगामी कार्रवाई करेंगे।