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रेल की तरह है परिवार इंजन हैं घर की महिलाएं

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:25 AM IST

नाटक से महिलाओं को जागरूक किया गया। सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर महिलाएं परिवार के सदस्यों के खान-पान की चिंता...
नाटक से महिलाओं को जागरूक किया गया।

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

महिलाएं परिवार के सदस्यों के खान-पान की चिंता करती हैं, लेकिन खुद की नहीं। इस कारण सबसे ज्यादा उनकी सेहत पर असर पड़ता है। महिलाओं की मानसिकता यह भी होती है कि बच्चों को ज्यादा खाना खिलाना चाहती हैं और आखिरी में जो कुछ बचता है उसे खुद खाती हैं। महिलाओं की इसी सोच पर आधारित नाटक का मंचन महिला विज्ञान जत्थे की ओर से किया गया। इसमें 15 महिलाओं ने अभिनय किया।

नाटक में एक परिवार की कहानी दिखाई गई। इसमें बताया गया कि फैमिली के सदस्यों की चिंता करने वाली महिला की जब तबीयत खराब होती है, तो परिवार के सदस्य उसका साथ छोड़ देते हैं। महिला जब डॉक्टर से बीमारी का कारण पूछती है तो वह बताते हैं कि पौष्टिक आहार नहीं खाया है। डॉक्टर की बात सुनकर महिला की अांखें भर आईं और बोली-जिन बच्चों के लिए भूखे पेट मैं कई रात नहीं सोई हूं वही मेरा साथ अंतिम समय पर छोड़ गए। इसके बाद मंच पर पर्दा गिरता है और मंच से नाटक का सूत्रधार संदेश देता है कि जिस तरह रेल बिना इंजन के नहीं चल सकती है, उसी प्रकार बच्चों और फैमिली को चलाने वाली यदि महिलाएं अपनी सेहत पर ध्यान नहीं देगी तो पूरा परिवार बिखर जाएगा।

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Web Title: रेल की तरह है परिवार इंजन हैं घर की महिलाएं
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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