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एक मंच पर साथ आए गुरु और शिष्य, ध्रुपद गायन में सुनाया धमार चलो सखी ब्रजराज...

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर शिष्यों के साथ मंच साझा करते गुरु, गुरु के गंभीर कंठ से ध्रुपद के स्वर निकले तो उन्हें...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:25 AM IST
एक मंच पर साथ आए गुरु और शिष्य, ध्रुपद गायन में सुनाया धमार चलो सखी ब्रजराज...
सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

शिष्यों के साथ मंच साझा करते गुरु, गुरु के गंभीर कंठ से ध्रुपद के स्वर निकले तो उन्हें शिष्यों के कोमल आलाप का साथ मिला। गुरुवार की शाम ध्रुपद गायन के नाम रही। ग्वालियर व्यापार मेले के कला रंगमंच पर ध्रुपद केंद्र ग्वालियर के कलाकारों की प्रस्तुति हुई। केंद्र की छात्रा अंजलि राजौरिया, मुक्ता विवेक, चंद्रप्रकाश, सुदीप, भानू प्रकाश, देवेंद्र सिंह, राहुल और आदित्य ने राग अहीर भैरव से ध्रुपद गायन की शुरुआत की। बंदिश के बोल थे धमार चलो सखी ब्रजराज। इसके बाद राग गुणकली तीव्र ताल में बाजे डमरू हर कर बाजे, राग भूपाली में चौताल में निबद्ध रचना तान तलवार की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. लवली शर्मा और हॉकी इंडिया के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट देवेंद्र सिंह तोमर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में कलाकार अभिजीत सुखदाणे ने जलद सूलताल में शंकर गिरजा पति पार्वती पतेश्वर से सभा का समापन किया।

शिष्यों ने राग अहीर भैरव में गायन प्रस्तुत किया।

पेश की जुगलबंदी

कार्यक्रम में केंद्र के नवोदित कलाकार यखलेश बघेल और अनुज प्रताप सिंह ने राग यमन में आलाप, जोड़-झाला की प्रस्तुति दी। इसके बाद धमार ताल में धमार केसर घोर के बनो है, अब तुम लाल कहां जइयो भाग की प्रस्तुति दी।

राग मालकौंस में आलाप, जोड़-झाला

ध्रुपद केंद्र के गुरु अभिजीत सुखदाणे ने राग मालकौंस में आलाप, जोड़-झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद चौताल में निबद्ध रचना जयति, जयति श्री गणेश की प्रस्तुति दी।

नहीं हुई कथक की प्रस्तुति

ग्वालियर व्यापार मेले में गुरुवार शाम को दो प्रस्तुति रखी गई थीं। पहली प्रस्तुति कथक की होना थी, जिसमें कलाकार अनन्या गौड़ को आना था। लेकिन किन्हीं कारणों की वजह से यह प्रस्तुति मेले में नहीं हुई। इसको लेकर दर्शकों में खासी निराशा रही। क्योंकि अधिकतर दर्शक कथक देखने और ध्रुपद गायन सुनने पहुंचे थे।

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