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गेस्ट हाउस के 11 कमरों में ठहरे थे 48 परीक्षार्थी स्टाफ को बताया- बीएड का प्रैक्टिकल देने आए हैं

एफसीआई के वॉचमैन सेलेक्शन परीक्षा का पेपर लीक करने वालों ने पुलिस से बचने के लिए भरपूर सावधानी बरती लेकिन फिर भी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:10 AM IST
एफसीआई के वॉचमैन सेलेक्शन परीक्षा का पेपर लीक करने वालों ने पुलिस से बचने के लिए भरपूर सावधानी बरती लेकिन फिर भी पकड़े गए। उन्होंने गेस्ट हाउस में 11 कमरे बुक कराने के साथ उनमें ठहरे 48 परीक्षार्थी व दो एजेंट ने गेस्टहाउस के स्टाफ को बताया था कि वे लोग बीएड परीक्षा के प्रैक्टिकल देने आए हैं। जबकि इन दिनों ऐसी कोई परीक्षा नहीं थी। उधर इन लोगों के साथ पकड़ा गया एजेंट हरीश कुमार फेक आईडी पर मोबाइल का सिमकार्ड चला रहा था। इसकी सिम झारखंड की थी।

ग्वालियर के नजदीक आते ही उसका मोबाइल स्विच्ड ऑफ हो गया। एसटीएफ उसकी मोबाइल लोकेशन के आधार पर ही उसके पीछे लगी थी। लिहाजा, जैसे ही मोबाइल बंद हुआ, एसटीएफ ने स्टेशन और शहर के लॉज और होटलों पर नजर रखना शुरू कर दी। इसके बाद कड़ी से कड़ी जोड़कर टीम गांधी नगर स्थित सिद्धार्थ पैलेस गेस्ट हाउस तक पहुंच गई।

दोनों एजेंट 10 तक रिमांड पर

एसटीएफ की गिरफ्त में आए दोनों एजेंटों कोे कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 10 अप्रैल तक रिमांड पर दिया गया है। जबकि 48 आवेदकों को एसटीएफ सोमवार को कोर्ट में पेश करेगी।

एजेंट के पास थी झारखंड की सिम, उसी की लोकेशन के सहारे पीछा कर रही थी एसटीएफ

गांधीनगर स्थित इस गेस्ट हाउस में ठहरे थे परीक्षार्थी। साथ में एसटीएफ द्वारा जब्त किए गए बैग।

हरीश ने खुद को बताया कॉर्डिनेटर

30 मार्च की रात 10 बजे से ही छात्रों का अाना शुरू हो गया था। 4 छात्र रात 10 बजे आए। बाकी का 31 मार्च को तड़के 4 बजे से आना शुरू हुआ। 6 बजे तक सभी 50 लोग आ गए थे। इन्हें 11 कमरों में ठहराया गया। 10 हजार रु. एडवांस जमा कराया गया था। एडवांस जमा कराने वाले हरीश ने बताया कि छात्र बीएड का प्रैक्टिकल देने आए हैं और वह उनका कॉर्डिनेटर है। शाम 5 बजे यह लोग चेक आउट करने की तैयारी में थे। इन्होंने 5 हजार रु. और जमा कराए थे। चेक आउट करने से पहले ही एसटीएफ ने इन्हें घेरे में ले लिया। -जैसा गेस्ट हाउस के मैनेजर शैलेंद्र सिंह ने बताया।

दो महीने से संपर्क में थे, पेपर के 120 प्रश्नों में से 110 हल करवाए : राजीव

एसटीएफ की गिरफ्त में आए बिहार के छात्र राजीव रंजन ने बताया कि 2 महीने से वह रैकेट के संपर्क में था। 31 मार्च को तड़के यहां पर आया था। पहले से स्टेशन पर मौजूद लोग उसे होटल ले गए। पेपर में 120 प्रश्न आए थे, इनमें से 110 प्रश्न हल करवा दिए थे। साथ ही यह भी हिदायत दी थी कि सारे प्रश्न हल करके आएं। इसके साथ ही मूल दस्तावेज और मोबाइल भी इन लोगों ने अपने कब्जे में ले लिया था। एसटीएफ ने 48 छात्रों में से सोनू पटेल, सुमित कुमार, विक्की, राजू कुमार पासवान, विक्की और मिथलेश कुमार से भी पूछताछ की थी।

सरगना किशोर का इंद्रपुरी में घर श्योपुर में कॉलेज होने की जानकारी

एसटीएफ को पूछताछ में पता चला है कि पेपर लीक रैकेट का मास्टर माइंड किशोर कुमार दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके में रहता है। दिल्ली में इसका एक स्कूल बताया जाता है। इसके साथ श्याेपुर में भी इसका बीएड कॉलेज होने की जानकारी मिली है। एसटीएफ इन जानकारियों काे पुष्ट करने में लगी है। आशुतोष और हरीश ने तो पुलिस को यहां तक बताया है कि किशोर कुमार देश के राजनेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर अपने संस्थान में लगाकर रखता था। विभिन्न केंद्रीय विभागों में भी उसकी अच्छी घुसपैठ है।

3 पार्ट में चलता है गिरोह


भंडारे का खाना खिलाना पड़ा

एसटीएफ ने शनिवार की रात को 50 लोगों को हिरासत में तो ले लिया लेकिन अचानक इन्हें रखने का इंतजाम न होने से एसटीएफ ऑफिस कैंपस के एक कमरे में रखा गया। रात में इन्हें भंडारे का खाना खिलाया गया।

7 दिन से थी जानकारी, 2 दिन पहले टीम ने कसा शिकंजा

एसटीएफ को 7 दिन पहले से ही जानकारी थी कि एफसीआई का पेपर लीक हो रहा है। सूचना थी कि पेपर का लेनदेन ग्वालियर, भोपाल या रतलाम में हो सकता है। दो दिन पहले इनपुट मिला कि पेपर बेचने वाले ग्वालियर पहुंच रहे हैं। इसके बाद 30 मार्च से ही घेराबंदी शुरू कर दी गई थी। इस पूरे ऑपरेशन में इंस्पेक्टर एजाज अहमद, चेतन सिंह बैस, एसआई भारत सिंह गुर्जर, एएसआई शाकिर खान, आरक्षक पुष्पेंद्र सिंह यादव, भूपेंद्र सिंह, अनिल शर्मा, जावेद खान, जितेंद्र यादव, नरेंद्र, ऋषिकेश गुर्जर, धर्मेंद्र शर्मा और मोना साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।