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नॉर्मलाइजेशन सिस्टम पर सवाल, छात्र आगबबूला

प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड की ओर से जारी पटवारी भर्ती परीक्षा का रिजल्ट पर विवाद बढ़ गया है। वजह है-...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:10 AM IST

नॉर्मलाइजेशन सिस्टम पर सवाल, छात्र आगबबूला
प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड की ओर से जारी पटवारी भर्ती परीक्षा का रिजल्ट पर विवाद बढ़ गया है। वजह है- नाॅर्मलाइजेशन पद्धिति। 9 हजार 235 पदों पर भर्ती के लिए कराई गई परीक्षा में 10 लाख 20 हजार परीक्षार्थी शामिल हुए थे। लेकिन भर्ती हुए अभ्यर्थियाें के अलावा शेष परेशान हैं। मेरिट के बराबर अंक लाने के बावजूद चयन से बाहर हुए अभ्यर्थियों काे इसकी वजह समझ नहीं आ रही। उनकी आपत्ति इस बात को लेकर भी है कि कई छात्रों के अंक कम होने के बावजूद नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से उनके अंक बढ़ा कैसे दिए? कुछ छात्रों का कहना है कि नंबरों की घट-बढ़ ही नहीं रैकिंग में भी गड़बड़ हुई है, जिसकी जांच होना चाहिए। लेकिन पीईबी के अफसर स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे हैं। मजबूरन छात्रों को सड़कों पर धरना प्रदर्शन व आंदोलन करने उतरना पड़ा है। मामले पर भास्कर पड़ताल में साफ हुआ कि सामान्य, ओबीसी, एससी, महिला सभी वर्गों के छात्रों का रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से बदल गया। मेरिट में आने वाले छात्र चयन से बाहर हो गए और कम नंबर वाले छात्रों के नंबर बढ़ जाने से वह मेरिट में आकर पटवारी पद के लिए चयनित हो गए। पीईबी के कंट्रोलर एकेएस भदौरिया ने स्वीकारा कि नॉर्मलाइजेशन के कारण 4-5 अंकों की घट-बढ़ हो सकती है। पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट...

भास्कर पड़ताल

पीईबी के कंट्रोलर ने माना: 4-5 अंकाें की घट-बढ़ हो सकती है

पटवारी परीक्षा में मेरिट के बराबर व उससे ज्यादा अंक लाने वाले परीक्षार्थी भी चयन से बाहर हो गए

सोशल मीडिया में वायरल एक छात्र के दो रिजल्ट, पीईबी ने बताया झूठा

सोशल मीडिया पर दतिया के एक छात्र इरफान मोहम्मद का रिजल्ट वायरल हो रहा है। इरफान को पहले रिजल्ट में नॉर्मलाइजेशन पद्धति से 50 नंबर से बढ़कर 83 अंक मिलना बताया जा रहा है। जबकि दूसरे रिजल्ट में उसे 84 से घटकर 83 नंबर मिलना बता रहे है। पीईबी के एग्जाम कंट्रोलर एकेएस भदौरिया ने फेसबुक पर वायरल हुए रिजल्ट में 33 नंबर तक बढ़ने के आंकड़े को झूठा बताया है।

5 छात्र... जो काबिल हैं पर नहीं बने पटवारी

रवि राजपूत (ओबीसी)

0.68 अंक घटे- परीक्षा में मेरे 79.49 अंक थे। मेरिट 79 अंक पर गई थी। लेकिन नॉर्मलाइजेशन पद्धति की वजह से मेरे अंक 78.81 रह गए, इसलिए मेरा चयन नहीं हुआ।

प्रियंका दादौरिया (एससी-महिला वर्ग)

3.47 अंक घटे- पेपर में ऑनलाइन मुझे 75 अंक मिले थे। लेकिन नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के बाद मेरे अंक घटकर 71.53 रह गए। जबकि मेरिट 73 अंक पर टूटी। अगर नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से रिजल्ट तैयार नहीं होता तो मेरा चयन पटवारी के लिए हो जाता।

पंकज गोयल (सामान्य)

- एक छात्र काे सिर्फ 72 अंक मिले थे। लेकिन नॉर्मलाइजेशन के बाद उसके 10 अंक बढ़े और मेरिट के लिए 82 अंक लाकर वह चयनित हो गया।

दीपेन्द्र राणा (सामान्य)

8 अंक घटे- मुझे 85 अंक मिले। मेरिट 82 नंबर तक पहुंची थी। लेकिन नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के कारण मेरे अंक घटकर 77 रह गए। इस कारण मेरा पटवारी बनने का सपना टूट गया।

अमित लोधी (ओबीसी)

पटवारी भर्ती में कुल 9 हजार 235 पदों के लिए परीक्षा हुई। मेरी रैकिंग आई 4938। फिर भी चयन नहीं हुआ। नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से रैकिंग को लेकर भी गड़बड़ी हो रही है।

क्या हैनॉर्मलाइजेशन सिस्टम

परीक्षा सेंटरों से ज्यादा छात्र संख्या होने के कारण उनका एग्जाम तीन शिफ्टों में कराया गया।

100 नंबर के पेपर में मैथ्स, रीजनिंग, जीएस व कंप्यूटर से जुड़े सवाल पूछे गए। परीक्षा 9 दिसंबर 2017 से 30 दिसंबर 2017 तक चली।

हर दिन नए पैटर्न व नए सवालों के पेपर हुए। कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से छात्रों को अलग-अलग शिफ्ट में एग्जाम देने का अवसर मिला।

अगर किसी उम्मीदवार को आसान पेपर वाली शिफ्ट मिली तो उसने पेपर हल करके जितने नंबर हासिल किए, नॉर्मलाइजेशन सिस्टम अपनाने से उसके अंक कम हो गए। इसी तरह अगर किसी छात्र को कठिन पेपर वाली शिफ्ट मिली तो उसके द्वारा अर्जित अंक नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से बढ़ गए। सब कुछ कंप्यूटर के जरिए रेंडमली होता है।

नार्मलाइजेशन कठिन कैलकुलेशन हैं। पीईबी इसे सिर्फ इसलिए इस्तेमाल कर रहा है कि 30 दिन चली वाली परीक्षा के दौरान उस पर किसी दिन सरल व किसी दिन कठिन पेपर बनाने और पक्षपात करने के आरोप न लगें।

-जैसा प्रतियोगी परीक्षाओं के शिक्षक प्रदीप गौतम ने भास्कर को बताया।

छात्रों के विरोध से फर्क नहीं पड़ता, सिस्टम नहीं बदलेगा

गेट जैसे एग्जाम में नॉर्मलाइजेशन सिस्टम से ही रिजल्ट तैयार होता है। हमें इस सिस्टम पर पूरा भरोसा है। इससे चार-पांच नंबरों की बढ़ोतरी या घटोतरी होती है। लेकिन 33 नंबर तक बढ़ने की बातंे झूठी हैं। छात्रों का विरोध गलत है। हमें उनके विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि सारा काम नियमों के तहत ही हो रहा है। -एकेएस भदौरिया, एग्जाम कंट्रोलर, पीईबी

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