• Home
  • Mp
  • Gwalior
  • सत्य और शक्ति की कल्पना है श्रीराम का सत्याग्रह
--Advertisement--

सत्य और शक्ति की कल्पना है श्रीराम का सत्याग्रह

आईटीएम यूनिवर्सिटी के रंग महोत्सव में रविवार को \"राम की शक्ति पूजा\' नाटक का मंचन किया गया ITM Rang Mahotsav सिटी रिपोर्टर |...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 03:15 AM IST
आईटीएम यूनिवर्सिटी के रंग महोत्सव में रविवार को \"राम की शक्ति पूजा\' नाटक का मंचन किया गया

ITM Rang Mahotsav

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

सूर्यकांत त्रिपाठी \"निराला\' की लिखी कविता पर आधारित जिस नाटक का मंचन आज हो रहा है। उसमें और तुलसीदास के रामचरितमानस की पंक्तियों में कुछ अंतर है। उन्होंने अपनी कविता में ऊर्जा और एकाग्रता, आत्म वक्ता से शक्ति की मौलिक कल्पना करने की बात कही। आखिर शक्ति और सत्य का मिलन होता है, शक्ति की मौलिक कल्पना ही सत्याग्रह है। अन्याय के खिलाफ न्याय की लड़ाई में श्रीराम की शक्ति पूजा वर्तमान से जोड़ते हुए नाटक का मंचन आईटीएम यूनिवर्सिटी के नाद एम्फी थिएटर में किया गया। रविवार को रंग महोत्सव में राम की शक्ति पूजा नाटक का मंचन हुआ।

दिखाया राम-रावण युद्ध

रंगकर्मी व्योमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित इस नाटक में श्रीराम-रावण युद्ध को कलाकारों ने दिखाया। इसमें प्रभु श्रीराम को जामवंत प्रेरित करते हैं। वह राम की आराधना शक्ति का आव्हान करते हैं। उन्हें सलाह देते हैं कि तुम सिद्ध होकर युद्ध में उतरो और राम ऐसा ही करते हैं। इसमें राम की साधना दिखाई गई। नाटक में श्रीराम का तीर उठाना और देवी का प्रकट होकर पहले उन्हें रोकना फिर इसके बाद उन्हें आशीष देना भी दिखाया गया।

नाटक में पुराने समय की कास्टूयम यूज की गई।

पात्र परिचय

यूथपति- हेमंत, आकाश और आकाश देववंशी, श्रीराम- स्वाति, हनुमान-तापस, जामवंत-जय, लक्ष्मण, सुग्रीव-अश्विनी, विभीषण- विशाल, बाल हनुमान-साखी, मार्गदर्शन एवं वस्त्र परिकल्पना डॉ. शकुंतला शुक्ल, जितेंद्र मोहन, संगीत निर्देशन-जेपी शर्मा, मुख्य स्वर- आशीष मिश्र, मंच व्यवस्था- टीएन विश्वकर्मा, सहायक- दीपक, प्रकाश परिकल्पना- धीरेंद्र

‘निराला’ की वे पंक्तियां जिन पर इस नाटक में मंचन किया गया

रवि हुआ अस्त: ज्योति के पत्र पर लिखा अमर

रह गया राम-रावण का अपराजेय समर

लौटे युग-दल, राक्षस-पदतल पृथ्वी टलमल,

बिंध महोल्लास से बार-बार आकाश विकल।

फिर देखी भीमा मूर्ति आज रण देखी जो

आच्छादित किए हुए सम्मुख समग्र नभ को।