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इस जहर पर कोई दूसरा जहर चढ़ नहीं सकता

इस जहर पर कोई दूसरा जहर चढ़ नहीं सकता सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर अब आधार बना सबकी मजबूरी है, इसमें अपनी जन्म...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:20 AM IST
इस जहर पर कोई दूसरा जहर चढ़ नहीं सकता

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

अब आधार बना सबकी मजबूरी है, इसमें अपनी जन्म कुंडली पूरी है, पहले जियो फ्री करवा दओ हर-हर मोदी, फिर जीएसटी धरवा दओ घर-घर मोदी...। इन पंक्तियों के साथ टीकमगढ़ के राजेंद्र बिदुआ ने लोगों को गुदगुदाया। शनिवार को जनउत्थान न्यास की ओर से थाटीपुर स्थित द्वारिकाधीश मंदिर के पास अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए कवियों ने रचना पाठ किया। कवियों ने रचनाओं के अलावा व्यंग्य से श्रोताओं को जमकर हंसाया। संचालन शहर के हास्य कवि केके पांडे ने किया। इस अवसर पर डॉ. सतीश सिकरवार के अलावा बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

जनउत्थान न्यास की ओर से हुए अभा हास्य कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने पढ़ी रचनाएं

अभा कवि सम्मेलन में रचना पाठ करतीं डॉ. रुचि।

होली के रंग में वे भंग डार गए, 2018 को समीकरण बिगाड़ गए। राजा के आंगन में मम्मा पधार गए, चित्रकूट, मुंगावली और कोलारस हार गए।

- राजेंद्र बिदुआ

कभी अनसुनी सी कोई धुन बजेगी, मेरे गीत याद आने लगेंगे। कभी आसमां को जो देखोगे गुमसुम, तो बादल कथाएं सुनाने लगेंगे।

- डॉ. रुचि चतुर्वेदी आगरा

गगन में आज भी उड़ता हमारा वो परिंदा है, समूची आज भी दुनिया में उस घटना की निंदा है।

हजारों क्या करोड़ में बसी है आत्मा उसकी, भगत सिंह तब भी जिंदा था, भगत सिंह अब भी जिंदा है

- प्रकाश पटेरिया, छतरपुर

रखा था तुमने जितना काला धन संभाल के, लेगा निकाल वो गले में हाथ डालके।

माना कि हो मक्कार महाधूर्त बड़े, लेकिन नहीं पल्ले अभी मोदी के तुम पड़े

- राकेश वर्मा हैरत, भोपाल

62 के अंक का कलंक मेट वीरता में, रणबांकुरों ने नाम अपना लिखा दिया।

डोकलाम पे तुम्हारी शौर्यता के पृष्ठ फाड़, चाइना को भी हमने आईना दिखा दिया।

- प्रख्यात मिश्रा, लखनऊ

सांप कितना भी जहरीला क्यों न हो, मेरे जहर से आगे बढ़ नहीं सकता।

मैंने 20 बरस तक बेरोजगारी का कड़वा जहर पिया है, इस जहर पर कोई दूसरा जहर चढ़ नहीं सकता

- केके पांडे ग्वालियर