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हंसना तो सेहत के लिए च्यवनप्राश है इसलिए दोस्तो तालियां बजाना चाहिए

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर पल दो पल की जिंदगी हंसना हंसाना चाहिए, कांटों के साथ रहकर मुस्कराना चाहिए, हंसना तो सेहत...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 03:20 AM IST
सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

पल दो पल की जिंदगी हंसना हंसाना चाहिए, कांटों के साथ रहकर मुस्कराना चाहिए, हंसना तो सेहत के लिए च्यवनप्राश है, इसलिए दोस्तो, तालियां बजाना चाहिए। कुछ ऐसी ही रचनाओं के साथ 39वां मूर्ख सम्मेलन महाराज बाड़े पर हुआ। ग्वालियर विकास समिति की ओर से कराए गए सम्मेलन में शहर और आसपास से आए व्यंगकारों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर शहर के कवि, साहित्यकारों के अलावा बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री नारायण सिंह कुशवाह थे, संचालन प्रेम बरोनिया ने किया। इस अवसर पर आए कवियों ने हास्य व्यंग्य से लोगों को गुदगुदाया और उनका मनोरंजन किया। इस बार का मूर्ख सम्मेलन ग्वालियर विकास समिति के संस्थापक महासचिव दिवंगत मनमोहन घायल को समर्पित रहा।

कुछ नफरतों के कान खोलकर बैठे हैं

लोग टेंशन के मकान खोलकर बैठे हैं, कुछ नफरतों के कान खोलकर बैठे हैं,

हम देते हैं लोगों को तंदरुस्ती का टॉनिक, इसलिए हास्य की दुकान खोलकर बैठे हैं।

- अमित चितवन ग्वालियर

आम आदमी तो आम होता है, जिसकी झोली में पड़ जाए वही उसको चूसता है, वरना गरीब आदमी को कौन पूछता है।

दूध का कुल्हड़ और मतदाता, उपयोग से पहले हाथों हाथ लिया जाता है, उपयोग के बाद सड़क पर फेंक दिया जाता।

- प्रहलाद भक्त मुरैना

होली खेले राधिका, धूम मचे चहुं ओर, भींज गई धानी चुनर, हंसते नंद किशोर,

ढोल ढमाके बाजते, अरू बाजत मृदंग, पिचकारी ले दौड़ते, बाल वृद्ध सब संग,

एक रंग में रंग गई, जाति-धर्म कर दूर, भेदभाव कोई नहीं, छाया प्रेम सरूर।

रंग गई सारी दिशा रंग धनुष सी आज,

होली खेलें भोर से, भूले सारे काज। सोवत से जागी सखी, होवन लागी भोर,

पिचकारी ले द्वार पे, ठाड़े नंदकिशोर

- डॉ. दीप्ति गौड़

सम्मेलन में रचना पाठ करतीं कवयित्री।