--Advertisement--

कलम की पिचकारी

Gwalior News - सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर होली का हुल्लड़ शुरू हो गया है। चारों तरफ महफिले सज रही हैं। होली पर गीत-संगीत हमेशा से...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 03:20 AM IST
कलम की 
 पिचकारी
सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

होली का हुल्लड़ शुरू हो गया है। चारों तरफ महफिले सज रही हैं। होली पर गीत-संगीत हमेशा से होता आया है, लेकिन जब हास्य व्यंग्य से भरी पिचकारी न चले तब तक होली अधूरी सी लगती है। कहते हैं, रंगों का सुरूर चढ़ चुका है, बड़ों का आशीर्वाद मिल चुका है, कोई गर्लफ्रेंड को तो कोई बीवी को रंग लगाने की फिराक में है, तो कोई रूठे दोस्त को मनाने की। कुछ भी कहिए हर तरफ प्यार की बारिश हो रही है। ऐसे में इस बार सिटी भास्कर लेकर आया है शहर और देश से जुड़े उन मुद्दों पर जो पिछले कुछ समय से काफी गरमाए हुए हैं। इन पर शहर के साहित्यकार के क्या विचार हैं, जानते हैं उनके हास्य व्यंग्य की रचनाओं के माध्यम से, क्योंकि साहित्यकार समाज का दर्पण होते हैं। यह सत्ता के स्थायी विपक्ष की भूमिका अदा करते हैं, यह आम व्यक्ति के दर्द को बयां करते हैं।

इतने साल चलाना था तो दीया- बाती की जगह सीरियल का नाम कर दो अखंड ज्योति

हम लोग अभावों में जी रहे हैं , यह नेताजी कौन से रिश्ते में हैं जो दूध पी रहे हैं





- तेज नारायण बेचैन

नेता मतलब चिपकूपन...

नेता जब तक जीवित रहता है कुर्सी से चिपका रहता है

मरने के बाद चौराहों, लिफाफों, पत्थरों पर चिपक जाता है

वह अपने सिद्धांतों से कभी मुख नहीं मोड़ता है

मरने के बाद भी चिपकना नहीं छोड़ता है...

नेता बनाम चुंबक

नेता वह चुबंक है जो नोट, वोट और कुर्सी को अपनी ओर खींचता है

जनतंत्र के सूखे चमन को भाषणों से सींचता है...

- साजन ग्वालियरी

नाग लोक की होली

हमारे माननीय मंत्रीजी, हर वर्ष नागलोक में होली खेलने जाते हैं, वहां की खातिर तवज्जो से वो अभिभूत हो जाते हैं। होली के रंगों में वो इतना रम जाते हैं, सुग्रीव और हनुमान को वो अपना पूर्वज बताने में शर्माते हैं ।

भांग पीकर वो हर हर महादेव का नारा लगाते हैं, पता नहीं क्यों, विज्ञान की हर सुलझी हुई पहेली को वो गलत ठहराते हैं।

गीत लिख रहे हैं होली के रंग में ...

बोतल के साथ पऊए, कोयल के साथ कऊए, हूरों के संग हऊए, गंजों के संग नऊए।

सब डांस कर रहे हैं भरकर उमंग में, हम गीत लिख रहे हैं होली के रंग में।

पंगे चढ़े शिखर पर, अंधों ने पुल बनाए, गूंगों के गीत सुनकर, बहरों ने सिर हिलाए।

दन दन दनन दनादन, सन सन सनन सनासन , ठन ठन ठनन ठनाठन, टन टन टनन टनाटन।

ढोलक के साथ तबले आए रंग में, हम गीत लिख रहे हैं होली के रंग में।

रंगों में रंग गया है सारा जहान देखो,होली मना रहा है, हिंदुस्तान देखो...।

- प्रकाश मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार

हेमंत कुमार शुक्ल

वरिष्ठ साहित्यकार

रिश्तों ने करवट बदली है, संबंधों ने ली अंगड़ाई ...

रिश्तों ने करवट बदली है, संबंधों ने ली अंगड़ाई। फाग खेल रहे नर-नारी, होली की मस्ती अब मस्ती छाई। रंग गुलाल अबीर उड़ रहा है, सरसों फूली नहीं समाई। गुल मोहर की बगिया में कोयल ने मधुरिम कूक सुनाई। अमराई का यौवन मचला, अल्हड़ बचपन भटक रहा है, स्वर सुरों की स्वर लहरी में, मेरा मधुवन भटक रहा है।

बिना हेलमेट महाराज बाड़ा का सफर

होली के रंग में मस्ती और तरंग में, पंजीकृत प|ी को स्कूटर पर बिठाए, बिना हेलमेट लगाए। भीड़ के रेलों से, धुएं और धूल को झेलते हुए, खुद को करीब-करीब ढेलते हुए। होली के रंगों को चूम रहे थे, जयाजी चौक उर्फ बाड़े पर घूम रहे थे, अचानक जोर-जोर से सीटी की आवाज आई। मगर बड़े भाई हमने उसे कर दिया अनसुना, कर्तव्य निष्ठ ट्रैफिक के सिपाहियों ने हमें रोका और टोका । सीटी की आवाज नहीं सुनी, हमने कहा हुजूर, हमने सुनी तो थी सीटी पर हम समझ नहीं पाए कि 74 साल की उम्र में हमारे लिए सीटी कौन बजाएगा, वो भी जब हाथों में हाथ हो और प|ी साथ में हो,सतर्क सिपाहियों ने ठहाका लगाया और हमें समझाया,दुर्घटनाओं की संख्या घटाइए, हेलमेट जरूर लगाइए...

X
कलम की 
 पिचकारी
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..