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आदिगुरु शंकराचार्य ने नाटक में दिए 10 संदेश इनको अपनाने से जीवन में आ जाएगा बदलाव

आर्टिस्ट्स कंबाइन संस्था की ओर से बुधवार को आदिगुरु शंकराचार्य पर आधारित नाटक महापरिव्राजक का मंचन किया। इस नाटक...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:35 AM IST
आर्टिस्ट्स कंबाइन संस्था की ओर से बुधवार को आदिगुरु शंकराचार्य पर आधारित नाटक महापरिव्राजक का मंचन किया। इस नाटक के माध्यम से आदिगुरु शंकराचार्य ने जीवन में बदलाव लाने के लिए 10 संदेश दिए। संस्कृति संचालनालय भोपाल के सहयोग से इस नाटक की प्रस्तुति हुई। इसक निर्देशन जयेश भार्गव ने किया। शंकराचार्य का किरदार केतन नार्वे ने निभाया।

मंदिर जाना केवल उसी का सार्थक है जो धन्यवाद करने जाता है, मांगने नहीं

1. दीपक को चमकने के लिए दूसरे दीपक की आवश्यकता नहीं होती है। उसी तरह आत्मा को ज्ञान की जरूरत नही है।

6.मोह से भरा हुआ इंसान एक सपने कि तरह हैं। मोह केवल ज्ञान से खत्म हो सकता है।

रंगकुटुम्ब संस्था ने नाट्य मंदिर में किया महापरिव्राजक नाटक का मंचन

2. जब मन में सच जानने की जिज्ञासा पैदा हो जाए, तो दुनिया की सभी चीजें अर्थहीन लगने लगती हैं।

7. सबसे अच्छा और बड़ा तीर्थ आपका अपना मन है। जिसे बस शुद्ध करने की जरूरत है।

3.जो व्यक्ति सच के बारे में सब जानते है उनको धर्मग्रंथ पढ़ने की कोई जरूरत नहीं हैं,क्योंकि इसमें इसका ही उल्लेख है।

8. आनंद आपको तभी मिल सकता है जब आप आनंद कि तलाश नहीं कर रहे होते हैं।

इस नाटक का मंचन शहर में तीसरी बार हुआ।

4. लोग आपको उसी वक्त तक याद करते है, जब तक सांसें चलती हैं। सांस रुकते ही सभी उसे भूल जाते हैं।

9. आंखों का काम मोह-माया और दुनिया के तमाम आकर्षण से दूर रखना होता है।

5. सत्य की परिभाषा क्या है? सत्य की इतनी ही परिभाषा है जो सदा था, जो सदा है और जो हमेशा सदा रहेगा।

10 मंदिर जाना उसी का सार्थक है जो धन्यवाद देने जाता हैं, मांगने नहीं।