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घर बनाने के लिए सरक

आवासीय पट्टे की सरकारी जमीन पर अब बना सकेंगे दुकान-रेस्टोरेंट, नहीं देना होगा बाजार मूल्य से 50 प्रतिशत प्रीमियम व...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 04:15 AM IST

आवासीय पट्टे की सरकारी जमीन पर अब बना सकेंगे दुकान-रेस्टोरेंट, नहीं देना होगा बाजार मूल्य से 50 प्रतिशत प्रीमियम व 7 फीसदी लीज रेंट, दरों को घटाने प्रस्ताव तैयार


घर बनाने के लिए सरकार से शासकीय जमीन के पट्टे लेकर कमर्शियल एक्टिविटी करने वालों को प्रदेश सरकार जल्द ही राहत देने वाली है। दरअसल प्रदेश में तमाम बड़े शहरों में विस्तार के कारण बड़ा पेंच खड़ा हो गया है। जहां कभी घर या शांत कॉलोनियां थी, वहां अब बड़े बाजार बन चुके हैं। अब यहां रहवासी गतिविधि प्रेक्टिकल भी नहीं दिखती। लेकिन कागजों में यह सब अवैध है। ऐसे में कानूनी कार्रवाई करते हैं तो मोटा जुर्माना बनता है। इसकी वसूली भी नहीं हो पाती। ऐसे में सरकार अब इन्हें नियमित करने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है। नई नियमों का खाका खींचने का जिम्मा ग्वालियर स्थित लैंड रिकॉर्ड कमिश्नर कार्यालय व राजस्व विभाग को दिया गया। दोनों विभागों ने नई गाइडलाइन तैयार कर उसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेज दिया है।

ऐसे समझें मामला: ग्वालियर के सिटी सेंटर की किसी सरकारी जमीन पर शासन ने अगर आपको घर बनाने के लिए एक हजार वर्गफीट का पट्टा दिया और उस जमीन का बाजार मूल्य वर्तमान में 5 हजार रुपए प्रति वर्गफीट है तो ऐसी जमीन पर घर के बजाय दुकान या रेस्टोरेंट बना लेने पर जिला प्रशासन आप पर जमीन के बाजार मूल्य से 50 प्रतिशत की दर से 25 लाख रुपए प्रीमियम व 7 प्रतिशत की दर से साढ़े तीन लाख रुपए लीज रेंट वसूल लेगा। ग्वालियर में ऐसे सरकारी पट्टे सिर्फ आधा सैकड़ा हैं। लेकिन इंदौर, नर्मदापुरम, उज्जैन संभागों में बड़ी संख्या में है। ज्यादातर पर व्यापारिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं।

कैबिनेट को भेजे प्रस्ताव में क्या-क्या है

आवासीय पट्टे की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर होने वाली राजस्व वसूली की दरों को घटाया जाएगा। शहर का मास्टर प्लान इजाजत देगा तो फिर आवासीय पट्टे की जमीन को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए कमर्शियल कर दिया जाएगा। लेकिन तभी जब मास्टर प्लान में संबंधित जमीन का लैंड यूज भी कमर्शियल हो। अगर ऐसा नहीं होगा तो फिर मास्टर प्लान में परिवर्तन करके रास्ता निकाला जाएगा। ग्वालियर जैसे शहरों में जहां नजूल नक्शे तक तैयार नहीं है, जबकि नजूल भूमियों पर एक लाख संपत्तियां तक मौजूद हैं। जिन्हें वर्तमान में अवैध कब्जे के रूप में ही चिन्हित किया जाता है। ऐसी संपत्तियों के लिए नजूल सर्वे होगा। उनको पट्टे देकर टैक्स के दायरे में लाएंगे और संपत्ति स्वामियों को भी वैधता का हक मिल जाएगा। ग्वालियर सहित प्रदेश के समस्त जिलों में नजूल सर्वे कराने लैंड रिकॉर्ड कमिश्नर विभाग हर जिले को 6-6 सदस्यीय ट्रेंड स्टाफ उपलब्ध कराएगा जो उन जिलों के राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर नजूल सर्वे का काम पूरा करेंगे।

प्रदेश के कई शहरों में व्यापारियों ने किया विरोध, तब जागी सरकार

वर्तमान में अगर कोई व्यक्ति शासकीय पट्टे की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करता है, और वह पट्टा सिर्फ आवासीय उपयोग के लिए मिला हो तो ऐसी स्थिति में संबंधित पर जमीन के बाजार मूल्य के 50 प्रतिशत की दर से प्रीमियम राशि और बाजार मूल्य की दर से ही 7 प्रतिशत तक एकमुश्त लीज रेंट चुकाना पड़ता है। इस नियम को बैतूल, रतलाम, हरदा, इंदौर, उज्जैन सहित मालवा व नर्मदापुरम के व्यापारियों ने अमानवीय बताकर विरोध किया। जिसके बाद ही प्रदेश सरकार को गत 20 जनवरी को ग्वालियर सहित प्रदेश के समस्त कलेक्टरों को निर्देश देना पड़े कि नजूल संपत्तियों से नई गाइडलाइन तैयार होने तक राजस्व वसूली न की जाए।

सर्वे के लिए ट्रेंड स्टाफ भेजेंगे

नजूल संपत्तियों से कम दरों पर राजस्व वसूली और उनके नियमतिकरण को लेकर प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा है। नजूल सर्वे कराने के लिए हम ग्वालियर सहित प्रदेश के समस्त जिलों में ट्रेंड स्टाफ भेजेंगे। इसके लिए एजेंसी तय करने का काम चल रहा है। यह काम अकेले राजस्व विभाग के भरोसे नहीं हो सकता, क्योंकि जिलों में इस काम के लिए पर्याप्त आरआई व पटवारी मौजूद नहीं है। ग्वालियर जैसे जिलों में नजूल सर्वे का लाभ सीधे तौर पर आम लोगों को मिलेगा। एम. सेलवेंद्रम , कमिश्नर , लैंड रिकॉर्ड विभाग , मप्र

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Web Title: घर बनाने के लिए सरक
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