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सरकारी कॉलेजों में संविदा नियुक्ति को लेकर आमरण अनशन पर अतिथि विद्वान, धरना देने वालों पर रात में शराबियों ने फेंके पत्थर

सरकारी कॉलेजों के अतिथि विद्वानों ने संविदा पद पर नियुक्ति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अतिथि...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:30 AM IST
सरकारी कॉलेजों के अतिथि विद्वानों ने संविदा पद पर नियुक्ति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अतिथि विद्वानों का कहना है कि जब तक उनकी नियुक्ति संविदा पद पर नहीं की जाती उनकी हड़ताल जारी रहेगी। बुधवार से डॉ. प्रतिभान सिंह गुर्जर, डॉ. अमित द्विवेदी, डॉ. नीता श्रीवास्तव व ममता प्रजापति ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। अतिथि विद्वान एकता संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विजय राजौरिया का कहना है कि जब तक अतिथि विद्वानों का संविदा पद पर नियुक्त नहीं किया जाता उनका अामरण अनशन जारी रहेगा। इसके साथ ही कुछ अतिथि विद्वान क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं।

अतिथि विद्वानों के टेंट के ऊपर रात में शराबियों ने फेंके पत्थर: फूलबाग मैदान में धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों के टेंट के ऊपर मंगलवार की रात शराबियों ने फूलबाग चौपाटी की ओर से पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इससे अतिथि विद्वान दहशत में आ गए और भगदड़ मच गई। इस दौरान कुछ अतिथि विद्वानों ने हिम्मत जुटाकर चौपाटी की ओर से पत्थर फेंकने वालों को पकड़ने के लिए दौड़ लगा दी। अतिथि विद्वान डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने बताया कि जैसे ही वह शराबियों को पकड़ने के लिए पहुंचे वह बोतलें छोड़कर भाग खड़े हुए।

फूलबाग पर हड़ताल पर बैठे अतिथि विद्वान।

कर्मचारियों की हड़ताल से कृषि विवि में प्रभावित होने लगा काम

राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार पर चौथे दिन भी श्रमिक कर्मचारी संघ के तत्वावधान में बुधवार को धरना जारी रहा। 150 से अधिक कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से विवि का कामकाज प्रभावित होने लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक नियमित नहीं किया जाएगा उनकी हड़ताल जारी रहेगी। अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में मप्र लघुवेतन कर्मचारी संघ ने धरना दिया। इस मामले को लेकर गुरुवार को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में विवि प्रशासन व अस्थायी कर्मचारियों को सुनवाई के लिए बुलाया गया है। उधर बिजली कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी इस बार होली नहीं मनाएंगे। मप्र बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के संयोजक मनोज भार्गव ने बताया कि बिजली कर्मचारी लंबे समय से आर्थिक रूप से परेशान हैं।