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होलिका दहन भद्रा उपरांत आज शाम 7.39 से 8.37 बजे तक होगा, 28 साल बाद बन रहा है विशेष योग

होलिका दहन 1 मार्च को प्रदोष बेला में भद्रा के उपरांत शाम 7.39 से रात 8.37 बजे तक करना श्रेष्ठ रहेगा। देव गुरु वृहस्पति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:35 AM IST

होलिका दहन भद्रा उपरांत आज शाम 7.39 से 8.37 बजे तक होगा, 28 साल बाद बन रहा है विशेष योग
होलिका दहन 1 मार्च को प्रदोष बेला में भद्रा के उपरांत शाम 7.39 से रात 8.37 बजे तक करना श्रेष्ठ रहेगा। देव गुरु वृहस्पति शनि की उच्च राशि में स्थित हैं। शनि देव देवगुरु वृहस्पति की राशि में स्थित होने से होलिका दहन का महत्व और अधिक बढ़ गया है। यह दुर्लभ योग 28 वर्ष बाद होने जा रहा है। यह योग विद्यार्थी, किसान, बेरोजगारों, व्यापारियों को लाभ पहुंचाने वाला रहेगा। साथ ही इससे न्याय की प्रक्रिया तेज होगी। । इससे पहले ऐसा संयोग होली पर्व पर वर्ष 1990 में बना था।

मुहूर्त

शनि देव वृहस्पति की राशि में स्थित होने से होलिका दहन का महत्व और अधिक बढ़ गया है

चार ज्योतिषाचार्यों ने कहा- गुरु और शनि का दुर्लभ संयोग लाभकारी रहेगा

त्रिपुष्कर योग में मनेगी भाईदूज

ज्योतिषाचार्य पं. विजयभूषण वेदार्थी के अनुसार होलिका दहन गुरुवार को प्रदोष बेला में भद्रा के उपरांत शाम 7.39 से रात 8.37 बजे तक होगा, लेकिन होलिका पूजन गुरुवार को सुबह 10.29 बजे से 12.25 बजे तक रवि योग, अभिजित मुहूर्त एवं स्थिर वृष लग्न में किया जाना शास्त्र सम्मत रहेगा। 2 मार्च को सिद्धि योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में होली खेली जाएगी। शनिवार को त्रिपुष्कर योग में भाईदूज मनाई जाएगी।

होली के दिन शनि और गुरु का दुर्लभ संयोग

ज्योतिषाचार्य पं. रिंकू तिवारी शास्त्री ने बताया कि वर्तमान में गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में शनिदेव विराजमान हैं। होली पर्व के दिन गुरु और शनि का यह दुर्लभ संयोग लाभकारी रहेगा। गुरु के घर में शनि होने से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित

ज्योतिर्विद डॉ. एचसी जैन के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन करना वर्जित माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा योग को अशुभ मानते हैं।

होलिका दहन पर सिद्धि योग भी

ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के अनुसार होली 28 वर्ष बाद केदार योग में मनेगी। इससे पहले 1990 में केदार योग में होली का पर्व मना था। सूर्य, बुध, शुक्र ग्रहों की युति का त्रियोग केदार योग कहलाता है। होली पर पूर्णिमा तिथि के साथ गुरुवार होने से होलिका दहन पर सिद्धियोग भी बन रहा है। इसका प्रभाव शुभप्रद होगा।

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