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45 छात्रों के फर्जी दस्तावेज लगाकर निकाले 62 लाख, बीओआई के पूर्व मैनेजर, अजाक का कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार, छात्रवृत्ति प्रभारी की तलाश

Gwalior News - आदिम जाति कल्याण विभाग और बैंक अफसरों की मिलीभगत से 45 छात्रों के फर्जी दस्तावेज लगाकर उनकी 62 लाख की स्कॉलरशिप...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 04:35 AM IST
45 छात्रों के फर्जी दस्तावेज लगाकर निकाले 62 लाख, बीओआई के पूर्व मैनेजर, अजाक का कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार, छात्रवृत्ति प्रभारी की तलाश
आदिम जाति कल्याण विभाग और बैंक अफसरों की मिलीभगत से 45 छात्रों के फर्जी दस्तावेज लगाकर उनकी 62 लाख की स्कॉलरशिप निकाल ली गई। इसमें स्कॉलरशिप जारी करने से लेकर, बैंक में एकाउंट खोलने तक में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया। मामला वर्ष 2015 का है। अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण (अजाक) थाने में एक छात्रा ने अपनी छात्रवृत्ति के 28 हजार रुपए फर्जी दस्तावेजों के आधार निकाले जाने की शिकायत की थी।

छात्रा और उसके पति ने मुरैना से लेकर भोपाल तक 100 से ज्यादा शिकायती आवेदन दे दिए, इसके बाद एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हुई ताे इसमें 62 लाख रुपए का घोटाला पकड़ में आया। अजाक अफसरों का कहना है कि घोटाला और भी बड़ा हो सकता है। इसमें आदिम जाति कल्याण विभाग और बैंक के कुछ और अफसर तथा कर्मचारी जांच की जद में आ सकते हैं। पुलिस ने बुधवार को बैंक ऑफ इंडिया की सिटी सेंटर शाखा के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक राधेश्याम गुप्ता और आदिम जाति कल्याण विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर रवि माहोर को गिरफ्तार कर लिया है जबकि आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति प्रभारी ओपी शर्मा अभी फरार है। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।

28 हजार की गड़बड़ी की जांच से 62 लाख के घोटाले तक पहुंचा मामला, बैंक और विभाग की चूक भी उजागर

पुलिस गिरफ्त में आरोपी रिटायर्ड बैंक मैनेजर राधेश्याम गुप्ता (हरी शर्ट में) व कम्प्युटर ऑपरेटर रवि माहोर।

दो साल में हमने 100 से ज्यादा शिकायती आवेदन दिए, कई अफसरों के चक्कर काटे, तब करा पाए दोषियों पर कार्रवाई

मुरैना के जय माता दी कॉलेज में प|ी कुसुम ने 2015 में बीएससी में एडमिशन लिया था। स्कॉलरशिप का फॉर्म भरा तो पता चला कि ग्वालियर के प्रखर कॉलेज में एडमिशन दिखाकर स्कॉलरशिप पहले ही निकाली जा चुकी है। जबकि कुसुम ने कहीं एडमिशन नहीं लिया था। हमने मुरैना और ग्वालियर पुलिस में शिकायत की। कई बार अफसरों के घर चक्कर लगाए। किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। फर्जीवाड़ा करने वालों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के अफसरों के साथ मिलकर स्कॉलरशिप की रकम वापस करवा दी। इसमें भी कुसुम के नाम के फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया। हमने फिर शिकायत की तो मामला अजाक में भेज दिया गया। लंबी जांच के बाद यह कार्रवाई हुई।

-कोकसिंह निवासी मुरैना, शिकायतकर्ता कुसुम के पति।

जानिए, कैसे अंजाम दिया गया घोटाला और कैसे आया सामने


छात्रों ने किसी कॉलेज में नहीं लिया था प्रवेश

जिन छात्रों के नाम पर 62 लाख रुपए का घोटाला हुआ है, उनका प्रवेश प्रखर कॉलेज में दिखाया गया था और खाता बालाजी कॉलेज की ओर से खोला गया, बैंक अफसरों ने इस पर भी ध्यान नहीं दिया। पुलिस ने दोनों कॉलेजों के प्रबंधन से पूछताछ की तो पता चला कि जिन छात्रों के नाम पर स्कॉलरशिप जारी हुई है उन छात्रों ने दोनों ही कॉलेजों में प्रवेश नहीं लिया था।


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