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2 साल में 91 हजार महिलाओं ने किया था आवेदन 43 हजार को ही मिल सके मुफ्त के गैस कनेक्शन

सिटी रिपोर्टर. ग्वालियर। केंद्र सरकार के बजट में सरकार की योजनाएं और उनकी जमीनी हकीकत में काफी फर्क है। 4 साल पहले...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:35 AM IST
सिटी रिपोर्टर. ग्वालियर। केंद्र सरकार के बजट में सरकार की योजनाएं और उनकी जमीनी हकीकत में काफी फर्क है। 4 साल पहले शुरू हुई स्मार्ट सिटी योजना में हमारा शहर दो साल पहले शामिल हो गया था। लेकिन आज तक इस योजना का काम धरातल पर नहीं उतर पाया है। आलम यह है कि शुरुआती दौर में बनने वाले कंट्रोल कमांड सेंटर के बनने की शुरुआत भी नहीं हो पाई है। यही हाल प्रधानमंत्री आवास योजना का है, एक साल पहले आई इस योजना का काम अब शुरू होने की स्थिति में है। उज्जवला योजना में लगभग 2 साल में 91 हजार महिलाओं ने आवेदन किया था। इनमें सिर्फ 43,538 को ही मुफ्त गैस कनेक्शन मिल पाया है। गुरुवार को आए बजट में ट्रेनों के सभी गेजों को ब्रॉडगेज करने की योजना बनाई गई है, लेकिन ग्वालियर से श्योपुर तक जाने वाली नैरोगेज को ब्रॉडगेज करने के लिए दस साल से संघर्ष जारी है।

स्मार्ट सिटी: ड्राइंग डिजाइन तक ही पहुंचा काम, प्रधानमंत्री आवास योजना में सिर्फ नींव भरी

1. आवास योजनाएं




2. उद्योग के लिए 1050 को लोन देने का लक्ष्य, 852 चिह्नित

उद्योग लगाने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना (50 हजार से 10 लाख रुपए तक) में वर्ष 2017-18 में 1050 लोगों को लोन देने का लक्ष्य है। अभी तक 852 मामले सही पाए गए हैं। इनको लोन मिलना बाकी है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना (10 लाख से 1 करोड़ रुपए तक) 55 लोगों को लोन देने का लक्ष्य है। 41 मामले सही पाए गए हैं। अभी तक सिर्फ 28 लोगों को लोन मिल पाया है।

3. दो साल में आधी महिलाओं को ही मिल पाए मुफ्त गैस कनेक्शन

उज्जवला योजना को शुरू हुए एक साल 9 माह (मई 2016)गुजर चुके हैं। बीपीएल की 2011 की सूची के अनुसार 91 हजार 56 महिलाओं के नाम निकाले गए थे। इनमें से 52 हजार 970 की केवाईसी सिस्टम में डाली गई है। 44 हजार 538 कनेक्शन अप्रूव किए हैं। अब तक 43 हजार 558 महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इंडेन के विक्रम भदौरिया के अनुसार अभी तक 60 फीसदी लक्ष्य पूरा कर लिया है।

1906: छोटी रेल का टेंट लगाकर शाही स्वागत

ग्वालियर में 1906 में जब छोटी ट्रेन चलती थी तब स्टेशन पर शाही यात्रियों को लेने के लिए पंडाल लगाए जाते थे। वर्तमान में स्टेशन पर एलईडी लगी हैं लेकिन हमेशा बंद रहती हैं।

वर्ष 2010 से चल रही इस योजना के लिए चार माह पूर्व रेलवे ने मुरैना जिला प्रशासन को 105 करोड़ रुपए जमीन अधिग्रहण के लिए जमा कराए हैं। लेकिन जमीन का अधिग्रहण नहीं हुआ है। बानमोर-सुमावली के बीच ट्रैक के लिए अर्थवर्क का 102 करोड़ रुपए व श्योपुर में बाउंड्री के लिए टेंडर भी जून 2017 में किए गए लेकिन उन्हें अब तक मंजूर नहीं किया गया है। इस लाइन के सर्वे के बाद 2012 में ग्वालियर से श्योपुर व श्योपुर से डिगोद तक 284 किलोमीटर लाइन के गेज परिवर्तन व नई लाइन के लिए 3845 करोड़ रुपए की योजना तैयार की गई थी। इस योजना के बाद वर्ष 2012-13 में कैंप कार्यालय के लिए लगभग 60 लाख रुपए का टेंडर किया गया और बाद में 12 लाख रुपए का काम कराने के बाद इसे बीच में ही रोक दिया गया।

4. ग्वालियर-श्योपुर नैरोगेज

मोतीमहल स्थित इस जर्जर भ‌वन में बनेगा स्मार्ट सिटी का ऑफिस। पहले यहां रिनोवेशन होगा फिर शहर का किया जाएगा कायाकल्प।


ग्वालियर की जमीन पर केंद्रीय योजनाओं का हाल


2018: अब स्टेशन पर एलईडी लगीं पर बंद ही रहती हैं

5. स्मार्ट सिटी योजना: सर्वे ड्राइंग, डिजाइन तक ही सीमित

ग्वालियर को दूसरे चरण में साल 2016 में शामिल किया गया। इसी साल स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कार्पोरेशन बना। केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार के माध्यम से 2200 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें 50 प्रतिशत राशि खुद जनरेट करना होगी। फिलहाल स्वीकृत राशि 400 करोड़। मुख्य क्षेत्र महाराज बाड़ा और मुख्य काम सिटी ट्रांसपोर्ट सिस्टम डेवलप करना। लेकिन अब तक मामला सर्वे और ड्राइंग-डिजाइन तक ही सीमित है। कंपू स्थित पार्क का काम शुरू भी किया गया तो आरोप-प्रत्यारोप के घेरे में आ गया। उधर निगम की भी आपत्ति है कि उनकी योजनाओं को ही थोड़ा-बहुत स्वरूप बदलकर स्मार्ट सिटी में शामिल कर लिया गया है।

5 वर्ष में ऐसे होना था श्योपुर ब्रॉडगेज का काम



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