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एमएलसी के भय से डॉक्टर नहीं कर पा रहा मरीज के साथ चमत्कार की कोशिश

मरीज के आरोपों के आधार पर डॉक्टर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मेडिकल...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 05:40 AM IST
मरीज के आरोपों के आधार पर डॉक्टर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि जब तक मेडिकल बोर्ड जांच में डॉक्टर को दोषी नहीं पाता है तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती है। डॉक्टर, मरीज के जीवन को ठीक कर उसकी पीड़ा हरने का काम करता है। एक झूठा केस भी डॉक्टर का पूरा जीवन खराब कर सकता है। मेडिकल लीगल केस का डर रहता है इसलिए डॉक्टर मर रहे मरीज का इलाज के जरिए उसकी जान बचाने के चमत्कार की कोशिश नहीं कर पा रहा है। डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास होना बहुत जरूरी है। जब मरीज, डॉक्टर पर पूरा भरोसा रखेगा तो निश्चित ही इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे। यह विचार जीआरएमसी के मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने गुरुवार को सजग प्रकोष्ठ समिति द्वारा स्व. बिहारी अग्रवाल की स्मृति में रोगी एवं चिकित्सक संबंध व उम्मीद विषय पर आयोजित परिचर्चा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। राज वैद्य वेणीमाधव शास्त्री ने कहा कि यह परम सत्य है कि जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है। 30 साल में चिकित्सा क्षेत्र में काफी विकास हुआ है। जब जांच की सुविधा नहीं थी तो डॉक्टर अपने विवेक से रोगी का मर्ज पहचान कर इलाज करते थे। मरीज के परिजन काे भी डॉक्टर पर भरोसा होता था। सजग प्रकोष्ठ को चाहिए कि डॉक्टर, वकील और पत्रकारों का ग्रुप बुलाकर खुली बहस कराएं। बहस का निर्णय निकालने के लिए जज नियुक्त करें। इस बहस में जो निष्कर्ष निकलेगा वह डॉक्टरों और मरीजों के संबंधों को बेहतर बनाएगा।

जीआरएमसी के डिमांस्ट्रेटर डॉ. विनीत चतुर्वेदी का कहना है कि डॉक्टर और मरीजों के बीच के रिश्तों में परिवर्तन आया है। इस कारण मरीज और डॉक्टर के बीच अविश्वास बढ़ना है। डॉक्टरों के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है। दवा की रेट की जिम्मेदारी डॉक्टर पर डाल दी जाती है। सरकार को दवाओं की रेट कम करनी चाहिए। मरीज की उम्मीद डॉक्टर के प्रति बढ़ गई है। जेएएच में आने वाले 80 प्रतिशत मरीज आरएमपी के यहां इलाज कराकर केस बिगड़ने के बाद आते हैं। सरकार को सारी चीजों की प्राइज कम करनी चाहिए। मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने लोगों को जागरूक करने की बात कही।

सजग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं मप्र चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने परिचर्चा आयोजित करने के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा व्यवसायी स्व. बिहारी अग्रवाल की तबियत बिगड़ने पर उनके परिजन अस्पताल ले गए। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल, दूसरे से तीसरे अस्पताल उन्हें भेजा गया। इमरजेंसी में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई थी। उनके निधन ने हमें यह प्रेरणा दी कि हम इमरजेंसी के दौरान चिकित्सकीय सेवाओं को बेहतर करने में कुछ योगदान करें ताकि फिर किसी की ऐसी मृत्यु न हो। हमारे इसी प्रयास की दिशा में हम स्व. बिहारी अग्रवाल की पुण्यतिथि पर यह परिचर्चा आयोजित कर रहे हैं। परिचर्चा में व्यापारियों ने भी अपने पक्ष रखे। संचालन बसंत अग्रवाल ने तथा आभार निर्मल जैन ने व्यक्त किया।

चेंबर ऑफ कॉमर्स में आयोजित सेमिनार में उपस्थित अतिथि।