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जिन फर्जी डॉक्टरों की क्लीनिक की थीं सील, वे धड़ल्ले से देख रहे हैं मरीज

स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह के निर्देश पर फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाई गई महिम पुलिस और प्रशासन तथा...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 05:40 AM IST
स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह के निर्देश पर फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाई गई महिम पुलिस और प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग के बीच तालमेल के अभाव में बेनतीजा साबित हो रही है। कार्रवाई में एक भी दिन न तो कोई एसडीएम शामिल हुआ और न ही कोई सीएसपी। पुलिस ने दो सिपाही या एएसआई भेजकर औपचारिकता निभाई। इसका परिणाम यह रहा कि जिन फर्जी डॉक्टरों की क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग की टीम सील करके आई थी वे उनके जाते ही खुल गईं या फिर बिना रजिस्ट्रेशन के चला रहे आरएमपी डॉक्टरों ने अपनी क्लीनिक सील ही नहीं करने दी। अभियान को खत्म हुए एक माह का समय व्यतीत होने के बाद भी अब तक सिर्फ एक आरएमपी डॉक्टर के खिलाफ ही सीएमएचओ रिपोर्ट लिखा पाए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए थे कि वह स्वास्थ्य विभाग के साथ टीम बना कर 31 दिसंबर तक फर्जी डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करें। कलेक्टर राहुल जैन ने कार्रवाई के लिए 9 टीम गठित की जिसमें एसडीएम, सीएसपी और एक डॉक्टर रहना था। इस अभियान के तहत 29 दिनों में सिर्फ 14 क्लीनिकों को सील किया गया था।आधा दर्जन क्लीनिक सील ही नहीं कर पाए थे, जबकि शहर में करीब 2000 से अधिक फर्जी क्लीनिक संचालित हो रही हैं।

सीएमएचओ और उनकी टीम सिर्फ एक ही आरएमपी के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज हो पाया है। थाटीपुर गोदाम बस्ती स्थित माथुर क्लीनिक, चौहान क्लीनिक, घासमंडी स्थित भगवती क्लीनिक, चंदन नगर स्थित सुनील शर्मा की क्लीनिक, मानसिक आरोग्यशाला तिराहा स्थित राठौर क्लीनिक, गदाईपुरा स्थित मंगल क्लीनिक को सील किया था। इनमें से अधिकांश ने सील तोड़कर पुन: प्रैक्टिस चालू कर दी। स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर पाया। अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं कि किसके आदेश पर सील क्लीनिक खुल गईं।

6 माह में 18 के खिलाफ ही पेश कर पाए परिवाद पत्र

जुलाई माह के पहले सप्ताह में कलेक्टर राहुल जैन के निर्देश पर घाटीगांव-मोहना में फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है। घाटीगांव मोहना में इस कार्रवाई में 52 क्लीनिक और मेडिकल स्टोर सील किए गए थे। छह माह में सीएमएचओ सिर्फ 18 के खिलाफ ही परिवाद पत्र पेश कर पाए हैं। घासमंडी में फर्जी डॉक्टर महेश शर्मा के इलाज से एक युवक की मौत हो गई थी। अब तक उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।