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ग्रहण खत्म होते ही मंदिरों के खुले पट श्रद्धालुओं ने दर्शन कर किया दान-पुण्य

खग्रास चंद्र ग्रहण माघी पूर्णिमा के दिन पुष्य, अश्लेषा नक्षत्र (कर्क राशि) में बुधवार को घटित हुआ। नित्य की तरह...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 01, 2018, 01:40 PM IST

खग्रास चंद्र ग्रहण माघी पूर्णिमा के दिन पुष्य, अश्लेषा नक्षत्र (कर्क राशि) में बुधवार को घटित हुआ। नित्य की तरह सुबह मंदिर के पट खुले और आरती के बाद सूतक लगने से पहले पट बंद कर दिए गए। रात 8.42 बजे ग्रहण खत्म होने के उपरांत मंदिरों की साफ-सफाई के बाद पट खोल दिए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा-अर्चना कर दानपुण्य किया। अचलेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य मंदिरों में श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की।

खग्रास चंद्र ग्रहण के लिए बुधवार को सुबह करीब 8 बजे से सूतक प्रारंभ हो गया। ग्रहण शाम 5.18 बजे प्रारंभ होकर रात 8.42 बजे समाप्त हुआ। यह 3 घंटे 24 मिनट का रहा। ग्रहण का परम ग्रास मान 1 घंटे 32 मिनट का था। ग्वालियर-चंबल संभाग में चंद्र उदय शाम 5.56 बजे होने के कारण लोग चंद्र ग्रहण देर से देख पाए। ग्वालियर चंबल संभाग में 2 घंटे 46 मिनट ग्रहण दिखा। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई करने के बाद भगवान का विशेष शृंगार हुआ। अधिकतर मंदिरों के पट रात करीब पौने नौ बजे खुल गए। मंदिरों के पट खुलने के बाद मंदिर में साफ-सफाई के उपरांत भगवान का अभिषेक करने के बाद उनका शृंगार किया गया। इसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। ग्रहण खत्म होने के बाद श्रद्धालुओं ने दानपुण्य किया और ईश्वर से सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने भगवान को भोग लगाया। नित्य की तरह शयन आरती के उपरांत मंदिर के पट बंद कर दिए गए।

ग्वालियर अंचल में 2 घंटे 46 मिनट दिखा ग्रहण, रात 8.42 पर सूतक समाप्त हुआ

चंद्रग्रहण का सूतक लगने से पहले ही अचलेश्वर व सनातन धर्म मंदिर में प्रतिमाओं को कपड़े से ढांककर पट बंद कर दिए गए।

पूजा करने के बाद तोड़ा उपवास: बुधवार को सूतक लगने के बाद श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखा। शाम को सूतक समाप्त होने के बाद उन्होंने घर की साफ-सफाई की और फिर भगवान का पूजन-अर्चन के बाद उपवास तोड़ा।

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