• Hindi News
  • Mp
  • Gwalior
  • ‘यदि दुखों से बचना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को सीमित करो’
--Advertisement--

‘यदि दुखों से बचना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को सीमित करो’

दादाजी धाम धर्मपुरी मंदिर में चल रही राम कथा में बुधवार को कथावाचक संत रमेश लाल ने केवट संवाद की कथा सुनाते हुए...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:40 PM IST
‘यदि दुखों से बचना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को सीमित करो’
दादाजी धाम धर्मपुरी मंदिर में चल रही राम कथा में बुधवार को कथावाचक संत रमेश लाल ने केवट संवाद की कथा सुनाते हुए “कभी-कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े, जाना था गंगा पार प्रभु केवट की नाव चढ़े’ भजन सुनाया तो श्रद्धालु भक्तिभाव से नृत्य करने लगे।

संत रमेश लाल ने कहा कि हमारे दुखों का कारण कोई और नहीं बल्कि हमारी इच्छाएं हैं। सभी इच्छाएं किसी भी व्यक्ति की पूरी नहीं होतीं। स्वयं राम के पिता दशरथ की इच्छा पूरी नहीं हुई तो हम और आप किस गिनती में आते हैं। यदि दुखों से बचना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को सीमित करो। रामायण की हर चौपाई हमें कुछ न कुछ ज्ञान प्रदान करती है। भाई कैसा हो, पति-प|ी का प्रेम कैसा होना चाहिए, ये हमें रामायण सिखाती है। पुत्र कैसा होना चाहिए पिता की एक आज्ञा में सारा राजपाट छोड़कर चौदह वर्ष वनवास ग्रहण कर लिया ये होता है पुत्र धर्म। वास्तविकता में पुत्र वही भाग्यशाली है जो माता-पिता की आज्ञा पालन में जीवन बिताते हैं। पति-प|ी का धर्म रामायण सिखाती है। पति-प|ी एक -दूसरे के पूरक होते हैं । एक के बिना दूसरे का जीवन नीरस होता है। इसका पता तब चलता है जब एक दूसरे से अलग हो जाओ। इसलिए लोगों को रामायण का अनुकरण करना चाहिए।

भक्ति के पथ पर हर व्यक्ति को चलना चाहिए: महामंडलेश्वर

सनातन धर्म मंदिर में चल रही भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती ने बुधवार को कथा सुनाते हुए कहा कि हर व्यक्ति को भक्ति के पथ पर अवश्य चलना चाहिए। भक्ति पथ में जब हम चलते हैं तो शुरूआत में छोटी- मोटी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन जब हम सतत रूप से भक्ति मार्ग में आगे बढ़ते जाते हैं तो सारी समस्याएं हमारा शृंगार बन जाती है। हमारा स्वरूप और निखरने लगता है। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने भागवत पुराण की आरती उतारी।

X
‘यदि दुखों से बचना चाहते हो तो अपनी इच्छाओं को सीमित करो’
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..