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नाटक में पहले उच्चारण, फिर संवाद बोलने पर ध्यान दें

नाट्य विधा समझने के लिए संवाद बोलने से ज्यादा जरूरी सही उच्चारण की समझ होना है। इसलिए जो भी बोलें उसकी रिकॉर्डिंग...

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 01:45 PM IST
नाट्य विधा समझने के लिए संवाद बोलने से ज्यादा जरूरी सही उच्चारण की समझ होना है। इसलिए जो भी बोलें उसकी रिकॉर्डिंग कर लें और टीचर्स को अवश्य सुनाएं। इससे न केवल आपका उच्चारण बेहतर होगा, बल्कि संवाद शैली भी बेहतर बनेगी। नाटक के लिए कलाकारों को समस्त रसों की सहज अभिव्यक्ति होना जरूरी है। इसके अलावा कथानक को प्रतीकात्मक रूप से प्रस्तुत करना संगीत एवं नृत्य के माध्यम से ही संभव होता है।

यह बात संगीत नाटक अकादमी के पूर्व सचिव प्रो. भारत र| भार्गव ने कही। वह राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी में नाट्य विभाग की ओर से भारतीय रंगमंच परंपरा विषय पर बोल रहे थे। अध्यक्षता यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि ग्वालियर-चंबल संभाग में नए कलाकारों के लिए बेहतर अवसर हैं। इसलिए यूनिवर्सिटी की ओर से सेमिनार से लेकर नए कोर्स शुरू किए गए हैं। इसका फायदा यहां के स्टूडेंट्स को मिलेगा।

यह हुए शामिल: सेमिनार में डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. योगेंद्र चौबे, असिस्टेंट प्रोफेसर मनीष करवडे, डॉ. अंजना झा मौजूद रहीं।

राजा मानसिंह तोमर म्यूजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी में बुधवार को भारतीय रंगमंच परंपरा पर हुआ व्याख्यान

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सेमिनार में प्रो. भारत र| भार्गव ने कहा कि बेहतर कलाकार बनने के लिए चीजों को ऑब्जर्व करें, इसका फायदा मिलेगा।