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जॉब छोड़ संभाली विरासत, कोयले की भट्‌टी पर बनाते हैं डिश

जॉब छोड़ संभाली विरासत, कोयले की भट्‌टी पर बनाते हैं डिश सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर पिताजी के साथ हमेशा-हमेशा...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:50 PM IST
जॉब छोड़ संभाली विरासत, कोयले की भट्‌टी पर बनाते हैं डिश
जॉब छोड़ संभाली विरासत, कोयले की भट्‌टी पर बनाते हैं डिश

सिटी रिपोर्टर | ग्वालियर

पिताजी के साथ हमेशा-हमेशा ग्वालियर व्यापार मेला आना-जाना लगा रहता था। जब भी वह फ्री होते तो हमें इस मेले और अपनी शॉप की गौरवशाली परंपरा को सुनाते, लेकिन चिंतित इस बात को लेकर होते कि उनके बाद इसे कौन कायम रखेगा। पिता की बात को मैं उस समय गंभीरता से नहीं लेता था। कारण, उस समय मेरा सपना बिजनेस का टेंशन न लेकर जॉब करने की प्लानिंग थी। दो बार मेरा सेलेक्शन मल्टीनेशन कंपनी में भी हो गया। एक बार जब मैंने फैमिली मेंबर को जॉब के संबंध में बताया तो उनके आंखों में आंसू आ गए। मुझे लगा शायद उनकी आंखों में खुशी के आंसू हैं, लेकिन उन्होंने अपनी पीढ़ा जब मुझे बताई तो जॉब का ऑफर छोड़ दिया। इसके बाद अपना पुस्तैनी काम को बढ़ाया। यह कहना है मिंटू अग्रवाल का। उनका फूड जोन 95 वर्ष से मेले में लग रहा है। वह कहते हैं कि आज भी उन्होंने अपने रेस्त्रां पर दादा दीनानाथ के समय की तकनीक से ही हलुआ से लेकर अन्य फूड प्रोडक्ट बनाते हैं।

ग्वालियर मेले में पीढ़ियों की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए काम कर रहे युवाओं का कहना

अपना



औषधीय व्यंजन की ब्रांडिंग करना उद्देश्य

शहरवासियों को राजस्थानी व्यंजन से रूबरू कराने के लिए मेले में तिल कुट्टा का स्टॉल भी लंबे समय आ रहा है। राजसमंद के देवगढ़ से आए श्यामलाल बताते कि तिलकुट्‌टा एक प्रकार का औषधीय व्यंजन है। इस पुरानी पद्धति से तैयार किया जाता है। इसमें ड्रायफ्रुट्स, धुली हुई बिना छिलके की साफ की तिल को डालकर पीसा जाता है। इसमें गुड डालकर तिलकुट्‌टा तैयार होता है।

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