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अस्पताल परिसर के पास लगाया बायो मेडिकल कचरे का ढेर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बॉयो मेडिकल कचरे का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। दो माह से अस्पताल परिसर में कचरे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:40 AM IST

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बॉयो मेडिकल कचरे का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। दो माह से अस्पताल परिसर में कचरे का ढेर लगा है। जिससे आसपास वातावरण दूषित होने से अस्पताल क्षेत्र में रह रहे परिवारों का जीना मुहाल हो रहा है। लोगों पर संक्रामक बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मप्र विज्ञान महासभा की कराहल इकाई ने गुरुवार को बीएमओ को स्थिति से अवगत कराते हुए अस्पताल परिसर में कचरे का उचित निपटान कराने की तत्काल जरूरत बताई है।

मप्र विज्ञान महासभा के ब्लॉक कार्डिनेटर वीरेंद्र पाराशर के साथ स्थानीय नागरिकों ने सामुदायिक अस्पताल में मेडिकल कचरे का निस्तारण नहीं होने पर आपत्ति जताई। परेशान लोगों की शिकायत है कि इस संबंध में बीएमओ डॉ. बीएस रावत को कई बार अवगत कराने के बावजूद समस्या हल होने के बजाय दिनोंदिन गंभीर रूप धारण करती जा रही है। सीएचसी पर अभी तक कचरा निपटान की समुचित व्यवस्था के अभाव में सफाईकर्मी प्रतिदिन वार्डों से कचरा समेट कर लैब के पीछे खुले मैदान में फेंकते हैं। दो माह से कचरे का ढेर लगा हुआ है। जिससे वातावरण में दुर्गंध फैल रही है। भर्ती मरीजों के अलावा प्रसूती वार्ड में नवजात शिशुओं की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। आसपास क्षेत्र में रह रहे परिवारों को संक्रामक बीमारी होने की आशंका सताने लगी है। वर्तमान में अस्पताल परिसर में इस्तेमाल कर फेंकी गई सीरिंज, प्लास्टिक बोतल, पाइप , नवजात के टिश्यू और गंदे कपड़ों का अंबार लगा हुआ है। अस्पताल से लेकर हाईवे रोड तक दुर्गंध महसूस की जाती है।

मप्र विज्ञान महासभा के साथ स्थानीय निवासियों ने ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर को बताई समस्या

अस्पताल के सामने बैठकर डेढ़ घंटे तक डाॅक्टराें का इंतजार करते रहे मरीज

कराहल के अस्पताल परिसर के पास फैला कचरा।

सामुदायिक अस्पताल में गुरुवर को कस्बे सहित आसपास गांव से मरीज और प्रसव पूर्व जांच के लिए गर्भवती महिलाएं अाैर मरीजों काे डाक्टराें का दाे घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि अस्पताल के गेट निर्धारित समय पर खुले। लेकिन प्रसूति वार्ड में पदस्थ एक नर्स को छोड़कर कोई भी डॉक्टर और चिकित्साकर्मी नहीं आए। मरीज अस्पताल के अहाते में बैठकर इंतजार करते दिखे। सुबह ा10 बजे के लगभग ओपीडी काउंटर पर कर्मचारी ने उपस्थित होकर रोगी पर्चे बनाने का काम शुरू किया। पर्ची कटवाने के बाद भी करीब डेढ़ घंटे तक मरीजों को डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। लाेगाें का कहना है कि डाक्टरों की लेटलतीफी के चलते अक्सर अाेपीडी में मरीज इंतजार करते हैं। जबकि शाम की पारी में डाक्टर बैठते ही नहीं है।

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