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नप व कॉलेज खोलने का था वादा, 10 साल में पीने के लिए पानी भी नहीं दे पाई सरकार

Gwalior News - आदिवासी विकासखंड मुख्यालय कराहल के विकास एवं जनसुविधाओं के विस्तार के लिए लिए जनप्रतिनिधियों ने बड़े बड़े वादे...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:40 AM IST
नप व कॉलेज खोलने का था वादा, 10 साल में पीने के लिए पानी भी नहीं दे पाई सरकार
आदिवासी विकासखंड मुख्यालय कराहल के विकास एवं जनसुविधाओं के विस्तार के लिए लिए जनप्रतिनिधियों ने बड़े बड़े वादे किए हैं। कराहल को नगर परिषद का दर्जा देने और बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज खोलने सहित कई सपने कस्बे की 13 हजार लोगों को दिखाए गए थे। लेकिन पिछले 10 साल से मुख्यमंत्री की 10 घोषणाएं भूलभुलैया में उलझ गई है। धरातल पर मौजूदा स्थिति यह है कि सरकार कस्बेवासियों को पीने के लिए पानी भी नहीं दे पाई है। वर्तमान में कस्बे में पंचायत प्रशासन लोगों को दूषित पानी सप्लाई कर रही है। वह भी सिर्फ सुबह-शाम 20-20 मिनट के लिए। 75 लाख रुपए खर्च कर स्थापित की गई नल जल योजना 8 साल बाद भी 15 वार्डों में से 11 वार्डों में नहीं पहुंची है। नलों में आ रहा गंदा पानी भरने के लिए आधे से ज्यादा कस्बा दूसरों मोहल्ले में जाकर अपने खाली बर्तन कतार में रखते हैं। यहां बर्तन खाली रह गए तो फिर डेढ़ से दो किमी दूर निजी बोरों से पानी लाना पड़ता है। समस्याओं से जूझ रहे कस्बेवासियों में शासन प्रशासन के प्रति असंतोष पनपता जा रहा है।

वहीं आदिवासी विकासखण्ड कराहल में प्रशासन ने 75 लाख रुपए नल-जल योजना पर खर्च कर दिए हैं,लेकिन स्थापना के 8 साल बाद भी कस्बे की आधी से ज्यादा आबादी तक नल सुविधा नहीं पहुंची है। 15 वार्डों में विभाजित पूरे कस्बे में सिर्फ 4 मोहल्लो में करीब 300 घरों में ही नल कनेक्शन लगे हैं। जबकि लगभग 1500 घरों की बसाहट वाले कराहल कस्बे में 13 हजार आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। मौजूदा स्थित यह है कि कस्बे में भूजल स्तर 450 फीट नीचे पहुंच गया है। नल जल योजना के जिस ट्यूबवेल से सप्लाई की जाती है उसमें पिछले डेढ़ महीने से लालरंग का मटमैला पानी घरों में सप्लाई किया जा रहा है। कस्बे में फिल्टर प्लांट के अभाव में दूषित पानी सप्लाई करना पंचायत प्रशासन अपनी मजबूरी बताता है। नलों में गंदा पानी भी सिर्फ 20 मिनट सप्लाई किया जा रहा है। टंकी से सप्लाई शुरू होते ही पानी के लिए आपाधापी मच जाती है। वंचित मोहल्लों से भी पानी भरने के लिए पुरुष, महिलाएं और बच्चों की दूसरों के नलों पर भीड़ लग जाती है। ग्राम पंचायत द्वारा वर्तमान में सुबह शाम 20-20 मिनट के लिए नलों में पानी सप्लाई किया जा रहा है। हाईवे पर कुछ स्थानों पर ग्राम पंचायत ने सार्वजनिक नल भी लगा रखे हैं। जहां पानी भरने के लिए अपने खाली बर्तन लंबी कतार रखकर लोग अपनी बारी आने का इंतजार करते हैं। यहां जिनके बर्तन खाली रह जाते हैं उन्हें डेढ़ से दो किलोमीटर लंबी दूरी तय करके खेतों पर निजी बोरों से पानी भरकर लाना पड़ता है। लोगों ने बताया कि नल का पानी छानकर नहाने, कपड़े धोने , बर्तन साफ करने में ही ज्यादातर उपयोग करते हैं। जबकि कस्बे में कई घरों में यही पानी लोग कपड़े से छानकर पी रहे हैं।

वहीं प्रशासन ने आठ लाख रुपए खर्च कर नगर में स्थाई सब्जी मंडी व हाट बाजार बनाया था। हीला-हवाली का आलम यह है कि करीब 11 साल बाद भी सब्जीमंडी में कारोबार शुरू नहीं हुआ है। मुख्य सड़क पर जगह जगह मनमानी सब्जी मंडी लगाई जा रही है। सब्जी विक्रेताओं ने सड़क के दोनों साइड अतिक्रमण कर रखा है। अतिक्रमण का दायरा हर साल बढ़ता जा रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत और प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। बैठकों में कई बार निर्णय और दिशा निर्देश से आगे सब्जीमंडी शुरू कराने की कार्यवाही 11 साल में भी आगे नहीं बढ़ी है। सब्जीमंडी एवं हाट बाजार परिसर का उपयोग होने से पहले ही जर्जर होने लगा है।

नल के आगे अपने खाली बर्तन लाइन में रखकर बैठे दूसरे मोहल्लों से पहुंचे लोग।

कराहल तहसील में शामिल नहीं हो सके तीन सैकड़ा परिवार

विकासखण्ड कराहल के अन्तर्गत आने वाले भैंसरावन गांव के करीब तीन सैंकड़ा परिवार आज भी कराहल तहसील में शामिल होने के लिए भटक रहे है। भैंसरावन गांव शिवपुरी जिले के पोहरी तहसील में शामिल है। भैंसरावन से पोहरी 60 किमी दूर है, जबकि कराहल तहसील महज 15 किमी दूर है। भैंसरावन गांव के करीब तीन सैकड़ा परिवारों को कराहल तहसील में शामिल करने की घोषणा भी सीएम के द्वारा की गई थी, लेकिन उक्त गांव के ग्रामीण आज भी दर-दर भटक रहे हैं। लोग मुख्यमंत्री दौरे पर हर बार अपनी समस्या से अवगत कराते है, लेकिन उनकी समस्या पर सरकार ने कोई गौर नहीं किया ।

कराहलवासियों को इन सुविधाओं की दरकार


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