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28 गांव की 35 हजार आबादी पर सिर्फ एक ही डॉक्टर, मरीजों को हो रही परेशानी

बरगंवा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ ड्रेसर से उपचार परामर्श लेते मरीज। 12 किमी लंबा खतरे भरा सफर करके...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:45 AM IST

28 गांव की 35 हजार आबादी पर सिर्फ एक ही डॉक्टर, मरीजों को हो रही परेशानी
बरगंवा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ ड्रेसर से उपचार परामर्श लेते मरीज।

12 किमी लंबा खतरे भरा सफर करके अस्पताल पहुंचती हंै प्रसूताएं

बर गंवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन महिला चिकित्सक के अभाव में प्रसूताएं की डिलीवरी पदस्थ एनएन एम अकार नर्स द्वारा कराई जाती है। अस्पताल में हर माह औसतन 20 डिलीवरी होती है। लेकिन प्रसव कराने के लिए अस्पताल जाना और प्रसव के बाद घर वापसी की राह असाना नहीं है। बर गंवा अस्पताल में जननी वाहन की सुविधा नहीं है। एरेस में प्रसूताओं को ऊंची नीची घाटी अकार पथरीले रास्तों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली, बैलगाड़ी या मोटरसाइकिल पर बैठकर 10 से 12 किमी लंबा सफर तय करना पड़ता है। प्रसूताएं के लिए घर से अस्पताल का सफर बेहद कष्टमय होता है। इस सफर के दौरान हर पल प्रसूताओं की जान जोखिम में रहती है। बर गंवा अस्पताल में जननी एक्सप्रेस वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह समस्या बनी हुई है। इलाके में अच्छी सड़क एवं परिवहन के कोई साधन नहीं है। इस अस्पताल को जननी एक्सप्रेस वाहन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव पिछले 6 साल से विभागीय दफ्तर में अटककर रह गया है।

सीएमएचओ को बताई बरगंवा स्वास्थ्य केंद्र की समस्याएं

बरगंवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं सीएमएचओ के अधीन है। हम अपने स्तर पर मरीजों काे बेहतर सेवा देने के लिए प्रयासरत हैं। कराहल सामुदायिक अस्पताल मेंें भी डाक्टरेट की कमी है। इसलिए यहां मरीजों की संख्या ज्यादा होने पर ही बर गंवा के डॉक्टर की सेवा ली जाती है। मैं खुद हर सप्ताह अस्पताल का मुआयना करने जाता हूूं। वहां मरीजाें काे इलाज के संबंध में मुझे ग्रामीणाें की तरफ से शिकायत नहीं मिली है। हां जननी वाहन के अभाव से प्रसूताअाें काे लाने ले जाने के लिए परिजन काे समय पर साधन की व्यवस्था करने में खासी मुश्किलें पेश अाती है। इस समस्या से सीएमएचअाे काे अवगत कराया है। डॉ.बीएस रावत, बीएमओ, कराहल।

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