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भूमिहीन किसानों को जमीन जोतने से रोक रहा वन विभाग

1976 में मिले थे भू-दान के पट्टे किसान बोले- वन विभाग के अफसर अनावश्यक देते हैं दखल भास्कर संवाददाता | पहाड़गढ़...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 04:50 AM IST
1976 में मिले थे भू-दान के पट्टे

किसान बोले- वन विभाग के अफसर अनावश्यक देते हैं दखल

भास्कर संवाददाता | पहाड़गढ़

रकैरा क्षेत्र में भू-दान के पट्टों की जमीन पर भूमिहीन किसान आज भी खेती नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि वन विभाग के अधिकारी उन्हें खेती करने में व्यवधान पैदा करते हैं। जबकि शासन ने ही उन्हें जमीन को पट्टे पर दिया था।

पहाडग़ढ़ क्षेत्र के रकैरा गांव में रहने वाले 22 भूमिहीन लोगों को शासन ने 1976 में भू-दान के पट्टे दिए थे। पट्टे की जमीन राजस्व रिकार्ड में दर्ज है लेकिन वनमंडल भी उसे अपने हक की जमीन बता रहा है। किसानों का कहना है कि जमीन को कृषि योग्य बनाने के लिए सड़क किनारे खड़ी झाडिय़ों सहित पेड़ आदि काटने की जरूरत पड़ती है तो वन विभाग उस पर आपत्ति करता है। पट्टे की जमीन पर पेड़ होंगे तो वे खेती कैसे कर पाएंगे। खेती नहीं करेंगे तो खाएंगे क्या।

इन्हें दिए शासन ने भू-दान के पट्टे

राज्य शासन ने वर्ष 1976 में रकैरा गांव के सुल्तान सिंह, रामसिंह, लूटरी, भूरा, सुगर सिंह, बादाम सिंह, पूरन सिंह, केशव सिंह, अवतार सिंह, गिरराजसिंह, रामचरन, गोपाल, उत्तम सिंह, प्रभू, रामअवतार, भरत, रामवीर सिंह, राजेन्द्र सिंह, सुमेरा, पातीराम, गुपला व केशव को भूदान के पट्टे दिए थे। इनमें से कुछ हितग्राहियों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों ने पट्टों का फोती नामांतरण करा लिया है। इन किसानों का कहना है कि शासन ने हमें किसान मानकर सूखा राहत का पैसा दिया है लेकिन वन विभाग हमारे पट्टों को वैध मानने के लिए तैयार नहीं है।