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जेयू विवाद: विधायक ने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को लेटर लिख लगाए गंभीर आरोप

Dainik Bhaskar

Jan 02, 2018, 06:43 AM IST

भाजपा विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार ने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

The JU dispute: the legislator is the Vice Chancellor Prof. Sajita Shukla
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ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद द्वारा लिए गए कुछ निर्णयों को लेकर सुमावली के भाजपा विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार ने कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक ने कहा है कि कुलपति की अध्यक्षता में कार्यपरिषद षड्यंत्रपूर्वक व नियम विरुद्ध फैसले ले रही है। इससे वित्त नियंत्रक महक सिंह व परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश कुशवाह जैसे अफसरों की ईसी में निंदा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे कर्मचारी, प्रोफेसर से लेकर अफसर तक खुद को प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। वहीं कुलपति का कहना है कि जेयू में सब नियमों के तहत काम हो रहे हैं। हम ईसी की सुनेंगे न कि विधायक की।

विधायक के आरोप

- गुमनाम पत्र के आधार पर वित्त विभाग में तैनात कर्मचारी सोबरन सिंह सिकरवार, वीरेंद्र जैन व पॉलिटिकल साइंस विभाग के कर्मचारी दीपक वर्मा का ट्रांसफर करने का प्रस्ताव ईसी में मंजूर किया गया। इस तरह के पत्रों के आधार पर कार्रवाई करना नियम विरुद्ध है।

- फिजिकल एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र सिंह की वित्तीय मामलो की 4 साल की जांच कराने का फैसला, ईसी मेंबर सुनीता बराहदिया के दबाव में आकर लिया गया है। इस तरह रिटायर्ड जज से जांच कराना अफसरों को प्रताड़ित करना है।
- प्री एंड पोस्ट परीक्षा कार्य का टेंडर निरस्त करने का विरोध करने वाले वित्त नियंत्रक महक सिंह व परीक्षा नियंत्रक डॉ. राकेश कुशवाह के खिलाफ ईसी में निंदा प्रस्ताव पारित कराया जाना दुर्भाग्यपूर्ण व गंभीर षड्यंत्र है। कर्मचारी, शिक्षकों व अफसरों के खिलाफ समितियां बनाकर जांच कराने के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।

कुलपति के जवाब

- कर्मचारियों का ट्रांसफर करने का प्रशासनिक अधिकार हमारे पास है। तीन कर्मचारियों के ट्रांसफर की ईसी में चर्चा गुमनाम पत्र पर नहीं बल्कि हुकुम सिंह यादव की शिकायत पर की गई थी। लंबे समय से जमे कर्मचारियों का ट्रांसफर करेंगे। यह कोई षडयंत्र नहीं है।
- डॉ. राजेंद्र सिंह के वित्त मामलों की शिकायतों को लेकर ईसी में चर्चा हाे रही है। उनके विभाग का एकाउंट अलग था। जिसे जेयू के साथ मर्ज करने की बात ईसी में उठी थी। ईसी ने जांच का प्रस्ताव पारित किया। इसलिए कमेटी गठित की है।
- प्री एंड पोस्ट परीक्षा कार्य का टेंडर इसलिए निरस्त किया क्योंकि एल-1 स्तर की एजेंसी बीच प्रक्रिया में हट गई थी। एल-2 के रेट एल-1 की तुलना में 5 करोड़ रुपए ज्यादा थे। ऐसे में टेंडर निरस्त करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। परचेज कमेटी की बैठक में परीक्षा व वित्त नियंत्रक ने आपत्ति का सही कारण नहीं बताया इसलिए ईसी ने उनकी निंदा की है।

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