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ठग के 4 नाम, 7 मोबाइल, सहयोगी का भाजपा से कनेक्शन, 30 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं

उम्मीदवारों को कमिश्नर के फर्जी सील-साइन किए नियुक्ति पत्र सौंपकर गायब हो गया है।

Dainik Bhaskar

Nov 26, 2017, 08:11 AM IST
associate connections with BJP, no FIR even after 30 hours

ग्वालियर. नगर निगम में नौकरी के नाम पर लगभग 70 युवकों से लाखों रुपए ठगने वाला रवि त्रिपाठी सभी उम्मीदवारों को कमिश्नर के फर्जी सील-साइन किए नियुक्ति पत्र सौंपकर गायब हो गया है। उसने पीड़ितों को जॉब कन्फर्मेशन के लेटर भी थमा दिए हैं। ये पत्र कई दिन पहले ही निगम की लेखा और स्थापना शाखा में पहुंच चुके थे फिर भी अफसरों ने मामले में गंभीरता नहीं दिखाई। पीड़ितों के अनुसार रवि त्रिपाठी की सहयोगी संजना ढुलानी उन्हें शिकायत करने पर सबक सिखाने की धमकी दे रही है। खुद को एक रिटायर्ड अफसर की साली बताने वाली संजना का भाजपा नेताओं से कनेक्शन है और पार्टी के कार्यक्रमों में नेताओं के साथ की फोटो उसने सोशल साइट्स पर अपलोड कर रखी हैं। ठगी के शिकार 15 युवाओं ने शनिवार को थाने में शिकायती आवेदन के साथ वे सभी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जो उन्हें नियुक्ति के नाम पर पैसे लेकर दिए गए थे। लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया।

आपबीती: पत्नी के जेवर बेचे भाई ने लोन, रिश्तेदारों से कर्ज ले ठग को दिए 6 लाख रुपए
- ये कहानी है देवेंद्र सेंगर की। ठग ने उन्हें निगम की लेखा शाखा में बाबू या फील्ड ऑफिसर के पद पर नियुक्ति का झांसा दिया था। भरोसे में आने के बाद उन्हें यह भी ऑफर दिया कि उनकी पत्नी पिंकी को भी चपरासी बनवाकर घर के किसी पास के वार्ड में पोस्टिंग करा देना। महीने में दो-चार दिन ऑफिस जाना पड़ेगा और बंधी हुई रकम घर आती रहेगी। बेरोजगारी में देवेंद्र ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अपने भाई से पैसों की बात कही। भाई ने दो लाख का लोन लेकर राशि दी। देवेंद्र ने पत्नी के जेवर भी बेचे। इसके बाद भी पूर्ति नहीं हुई तो रिश्तेदारों से कर्ज लिया।

ठग ने हर बार बदला सरनेम और मोबाइल नंबर
- नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले रवि की मुलाकात जितने लोगों से हुई, उनको उसने नाम तो एक ही बताया लेकिन सरनेम अलग-अलग बताए। कभी रवि कुमार, रवि त्रिपाठी, रवि वाल्मीकि तो कभी रवि सबरवाल। ऐसे ही उसने मोबाइल नंबर भी अलग-अलग दिए। शुक्रवार को उसका एक नंबर चालू था, लेकिन शनिवार को सभी नंबर बंद हो गए।

ये हुए ठगी के शिकार

- करतार, निवासी श्रीनगर कॉलोनी नदी पार टाल मुरार ने 5 माह पहले चपरासी पद के लिए 3 लाख रुपए दिए थे।
- सतीश मालवीय, निवासी दीनदयाल नगर ने भी 5 माह पहले चपरासी पद के लिए 2 लाख रुपए दिए थे।
- कमलेश पुत्र मुन्नालाल ने चपरासी पद के लिए खेत बेचकर 2 लाख रुपए दिए।
- सूरज पुत्र हाकिम सिंह निवासी गोहद ने चपरासी पद के लिए 3 माह पहले 3 लाख रुपए दिए।
- इंद्रजीत वर्मा निवासी डीडी नगर ने 6 माह पहले चपरासी पद के लिए 2 लाख रुपए दिए।
- सुरेंद्रसिंह पुत्र रामसिया ने भी चपरासी पद के लिए 3 लाख रुपए दिए।
- मंगल छात्रे निवासी रेंहट ने चपरासी पद के लिए बतौर पेशगी 1 लाख रुपए दिए।
- संजय कुमार निवासी डीडी नगर ने चपरासी पद के लिए 1.30 लाख रुपए दिए।
- दीपक केशले निवासी डीडी नगर ने सफाई कर्मी के लिए 5 माह पहले 80 हजार दिए।
- रबीना निवासी विनय नगर सेक्टर नंबर 2 ने सफाई कर्मी के लिए 80 हजार दिए।
- बबलू निवासी मेहगांव ने चपरासी पद के लिए 2 लाख रुपए दिए।

- थाना और धारा भी तय नहीं कर पाई पुलिस: थाना यूनिवर्सिटी में पीड़ितों ने शुक्रवार शाम को 6 बजे पहुंचकर पूरी कहानी सुना दी थी। इसके बाद भी शनिवार रात 10 बजे तक पुलिस यह तय नहीं कर पाई थी कि मामला किन धाराओं में और किस थाने में दर्ज किया जाना चाहिए। इतना समय ठगी करने वाले को दूर निकलने के लिए पर्याप्त है।

जिम्मेदारों के जवाब

- ये तीसरा मौका है जब ऐसे फर्जी कागजात नगर निगम में आए हैं। पीड़ितों को लेकर हम थाने गए थे। वहां पुलिस अफसरों ने लिखित शिकायत और रिकॉर्डिंग की सीडी उपलब्ध कराने को कहा था। पीड़ित देर रात तक उक्त तैयारी नहीं कर पाए।

- विनोद शर्मा, सहायक लेखाधिकारी, नगर निगम

- ठगी का शिकार हुए लोगों ने शिकायती आवेदन दिया है। जांच भी शुरू कर दी है। लोगों के बयान भी लिए गए हैं। चूंकि पैसों की पूरी लेनदेन कोटेश्वर मंदिर क्षेत्र में हुई, इस कारण मामला दर्ज नहीं किया है। राजकुमार शर्मा, टीआई, थाना यूनिवर्सिटी

- निगम में आए दस्तावेज फिर भी नहीं चेते अधिकारी: दिवाली पर हड़ताल के दौरान निगम ने सफाई कर्मियों को स्थायी करने की बात कही थी। निगम ने एक सूची जारी कर आवेदकों की दावे-आपत्तियां मांगी थीं। इसी बीच रवि के शिकार 5-6 लोगों के आवेदन और नियुक्ति पत्र निगम की सामान्य प्रशासन शाखा में पहुंच गए थे। लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

मेरे रवि से संबंध, उसके लेन-देन से नहीं: संजना
- पीड़ितों के अनुसार ठग रवि की एकमात्र सहयोगी संजना डुलानी का कहना है कि रवि से उसके पारिवारिक संबंध हैं, लेकिन उसके कामकाज और लेनदेन से उसका कोई मतलब नहीं है। संजना ने कहा कि वे शनिवार दोपहर को अपना पक्ष रखने एसपी ऑफिस गई थीं। लेकिन एसपी से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने धमकी दी कि अब यदि मामले में मेरा नाम घसीटा गया तो मैं एसपी ऑफिस में आत्मदाह कर लूंगी।

पहले हमला,अब झूठा फंसा रहे रिश्तेदार: रवि
- आरोपी रवि का कहना है कि आरोप लगाने वाले उसके रिश्तेदार ही हैं। देवेंद्र सेंगर साला है और जितेंद्र जोरिया खास दोस्त। पहले साथ ही रहते थे। जितेंद्र ने मुझसे अब तक लगभग 60-65 हजार रुपए लिए हैं। मैंने वो रुपए वापस मांगे तो मुझ पर बुधवार को मेला मैदान में गुंडों के साथ जानलेवा हमला कराया। मैं रविवार को एसपी ऑफिस में जाकर अपना पक्ष रखूंगा।

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