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15 साल से इस रेलवे स्टेशन पर रुक रही है एक ट्रेन, पत्थर की बैंच बनती है टिकट काउंटर

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2017, 04:01 AM IST

रेलवे स्टेशन 24 घंटे में सिर्फ एक बार तब जिंदा होता है जब यहां बीना-नागदा पैसेंजर के आने का समय होता है।

For 15 years this station is halted at the railway station
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गुना (ग्वालियर). राघौगढ़ रेलवे स्टेशन 24 घंटे में सिर्फ एक बार तब जिंदा होता है जब यहां बीना-नागदा पैसेंजर के आने का समय होता है। ट्रेन आने से आधे घंटे पहले यहां की एकमात्र टपरेनुमा दुकान पर चाय-पकौड़ी बनना शुरू होती हैं। ट्रेन आने से करीब 20 मिनट पहले झोला उठाए एक शख्स पहुंचता है और पत्थर की एक बैंच पर टिकट काउंटर खुल जाता है। 25 साल पहले आम चलन से बाहर हो चुके पुट्ठे के टिकट यहां से यात्रियों को दिए जाते हैं। इस स्टेशन पर ट्रेन को रुकने व चलने का इशारा देने वाला सिग्नल भी नहीं है।

- चलती हुई ट्रेन के ड्राइवर को अगर कुछ और यात्री आते दिख जाएं तो वह फिर ब्रेक लगा देता है। या खुद यात्री हाथ दिखाकर रुकने का इशारा कर देते हैं। 15 साल से यही सब चल रहा है।

- बस शुरूआती सालों में यहां मुश्किल से 10-12 टिकट बिकते थे, अब बिक्री कभी-कभी 200 तक पहुंच जाती है। 2002 से यहां बीना-नागदा ट्रेन का हॉल्ट शुरू हुआ है, तभी से एमके शर्मा यहां टिकट बेच रहे हैं।

10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह के राघौगढ़ में रेलवे स्टेशन पर 15 साल से सिर्फ एक ट्रेन रुक रही है

ऐन वक्त पर ऑटो से पहुंचे यात्रियों ने हाथ दिखाकर ट्रेन को रुकवाया
- सुबह करीब 8 बजे जब ट्रेन के आने में करीब 20 मिनट बचे थे, तब स्टेशन पर सिर्फ एक यात्री ही था। वहां की हालत देखकर इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल था कि अगले 10 मिनट में यह संख्या 200 तक पहुंच जाएगी।

- यात्रियों के आने का सिलसिला ट्रेन के चल देने के बाद तक जारी रहा। ऐन वक्त पर ऑटो से पहुंचे यात्रियों ने हाथ दिखाकर चलती ट्रेन को रोकने का इशारा किया। आश्चर्य ट्रेन रुक भी गई। स्थानीय यात्री बताते हैं कि ऐसा अक्सर होता है। यहां के लिए यह आम बात है।

एक टिकट पर लेते हैं पांच रुपए ज्यादा

- मूलत: गुना के रहने वाले श्री शर्मा गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया में अस्थाई जॉब करते हैं और सुबह ड्यूटी पर जाने से पहले स्टेशन पर टिकट बेचते हैं। एक टिकट पर वे 5 रुपए तक ज्यादा लेते हैं। संयोग ही था कि शनिवार को एक खास यात्री भी यहां से ट्रेन में बैठे, वे थे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के निजी सचिव के पिता और उनके परिवार के अन्य सदस्य।

कुंभराज से मिलते हैं टिकट, तारीख की सील यहां लगती है
- इस स्टेशन के लिए टिकट कुंभराज से मंगाए जाते हैं। माह में दो-तीन बार टिकट का कोटा आता है। उन पर तारीख नहीं हाेती।

- पुराने समय में रेलवे के टिकट काउंटर पर रखी पंचिंग मशीन से तारीख डाली जाती थी पर अब यह मशीन बंद हो चुकी इसलिए श्री शर्मा जैसे प्राइवेट वेंडर तारीख की सील लगाते हैं।

- गुना स्टेशन के कमर्शियल विभाग के सीसीआई डीडी रजक कहते हैं कि हॉल्ट स्टेशनों पर इस तरह की ही व्यवस्था चलती है।

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