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8.5 किमी की सड़क बनाना तो दूर, 4 साल में मरम्मत का पैसा भी नहीं दिला पाए 3 मंत्री

तिघरा रोड: गुप्तेश्वर पहाड़ी उतरते ही 8.5 किमी लंबी सड़क एक से तीन फीट के गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।

Bhaskar News | Last Modified - Nov 11, 2017, 07:24 AM IST

  • 8.5 किमी की सड़क बनाना तो दूर, 4 साल में मरम्मत का पैसा भी नहीं दिला पाए 3 मंत्री
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    ग्वालियर.तिघरा रोड: गुप्तेश्वर पहाड़ी उतरते ही 8.5 किमी लंबी सड़क एक से तीन फीट के गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। शुरूआत के करीब एक किलोमीटर 4 लेन में तो हालात यह है कि वाहन चालक काफी देर रुककर गाड़ियां निकाल पाते हैं। इसके बाद मोतीझील के टर्न लेते ही 6 लेन सड़क शुरू होती है जो रेशमपुरा तिराहे तक जाती है और इस पूरी सड़क पर एक से दो फीट तक के गड्ढे वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। रेशमपुरा तिराहे से मोतीझील तिराहे तक की सड़क का भी ऐसा ही हाल है। करीब 4 साल से जर्जर इस पूरी सड़क पर 39 बड़े और 118 छोटे गड्ढे हैं, जिनका मेंटेनेंस भी कभी नहीं किया गया।
    - यह सड़क 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैली काउंटर मैग्नेट सिटी (साडा) परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण सड़क है। इसके बाद भी शहर में केंद्र और राज्य सरकार के तीन मंत्री (नरेंद्र सिंह तोमर, मायासिंह व जयभान सिंह पवैया) न तो सड़क के निर्माण के लिए करीब 35 करोड़ रुपए दिला पाए हैंै आैर न ही साडा मेंटेनेंस के लिए 25 से 30 लाख रुपए कर पाया।
    - जबकि इस परियाेजना में पिछले 25 साल में 500 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। साडा ने मप्र शासन को टोल का प्रस्ताव भेजते हुए कहा है कि हमारे पास इस सड़क को बनाने के लिए राशि नहीं है यदि टोल की मंजूरी मिल जाती है तो उससे मिलने वाली राशि से सड़क बन सकती है।
    नगर निगम करता है वसूली
    - नगर निगम ने इस सड़क पर नाका वसूली ठेका दे रखा है और ठेकेदार के लोग गुप्तेश्वर मंदिर के आगे तिराहे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली, मेटाडोर एवं बड़े वाहनों से 30 से 50 रुपए की वसूली भी कर रहे हैं। लेकिन निगम द्वारा इस सड़क का मेंटेनेंस नहीं कराया जाता और यह मुद्दा जिला योजना समिति की बैठक में उठाया गया था लेकिन निगम के अफसरों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया था कि यह सड़क ननि के अधीन नहीं है।
    मंत्री जानकर भी अनजान, साडा अध्यक्ष ने फिर रोया फंड का रोना
    - मेंटेनेंस पर जियोस पर अफसरों ने बोला झूठ: महापौर विवेक शेजवलकर व जिपं सदस्य पप्पन यादव ने जिला योजना समिति की बैठक में प्रभारी मंत्री से कहा था कि रायरू-मोतीझील से ट्रांसपोर्ट नगर होते हुए गिरवाई तक की सड़क जर्जर है। इस पर सफर करना जानलेवा है। लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने लिखित जानकारी में बताया कि सड़क का मेंटेनेंस लगातार हो रहा है। जबकि, हकीकत ये है कि सड़क पर गड्ढे और धूल के सिवा कुछ नहीं है।
    मंत्री: मेरी जानकारी मैं मामला नहीं है
    - मेरी जानकारी में अभी यह मामला नहीं है। मैं इसकी जानकारी लेकर ही कुछ कह सकती हूं और सड़क बने, इसके लिए हम सरकार में बात कर पूरे प्रयास करेंगे।
    माया सिंह, मंत्री/ नगरीय विकास एवं आवास
    साडा: हमारे पास सड़क बनाने फंड नहीं
    - साडा पर सड़क निर्माण के लिए फंड नहीं है। राज्य सरकार के पास सड़क पर टोल का प्रस्ताव भेजा है, मंजूरी मिलने के बाद जो पैसा आएगा, उससे इस सड़क का निर्माण कराएंगे। -राकेश जादौन, अध्यक्ष/साडा
    एक्सपर्ट: दो धाराओं में बनता है अपराध
    - साडा ने न खराब सड़क पर ट्रैफिक रोका न सड़क बनवाई। इसलिए हादसा हुआ। साडा के खिलाफ धारा 287, 288 के तहत अपराध बनता है। जिला व पुलिस प्रशासन को संज्ञान लेना चाहिए।
    -अवधेश सिंह तोमर, अभिभाषक
    कई बार मैंने पत्र लिखे, पेंच वर्क करा देते हैं जो नहीं टिकता
    - गोल पहाड़िया से गिरवाई और तिघरा जाने वाली सड़कें खराब हैं। मैंने कई बार पत्र लिखे, मौखिक रूप से कहा और बैठकों में भी मसला रखा। पेंच वर्क तो करा दिया जाता था लेकिन सड़क दोबारा नहीं बनवाई गई।
    - कहते हैं, सड़क बनेगी तब तक पेंच वर्क से काम चल जाएगा। लेकिन इस रोड पर भारी वाहनों के सामने पेंच वर्क टिकता नहीं है। प्रमुख सचिव की बैठक में भी इस सड़क का मुद्दा रखा था।
    - राकेश माहौर, स्थानीय पार्षद व सभापति, नगर निगम
    हादसे से बिखरा प्रीतम का हंसता-खेलता परिवार
    प्रीतम के बाद 17 साल का आशीष लेता परिवार की जिम्मेदारी, अब परिवार को पालने वाला भी कोई नहीं
    - गोल पहाड़िया निवासी प्रीतम की मौत और उसके बाद बड़े बेटे द्वारा आत्महत्या करने के बाद घर में ऐसा कोई नहीं है जो परिवार का भरण-पोषण करे। प्रशासन ने मदद के रूप में 15 हजार रुपए दिए, जिसे परिवार के लोगों ने अपर्याप्त बताया।
    - प्रीतम के परिवार में अब पत्नी अनीता, छोटा बेटा गौरव (कक्षा 5) व नैतिक (कक्षा 3) हैं। प्रीतम की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े बेटे 12वीं के छात्र आशीष पर आती। लेकिन उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। प्रीतम के कुटुम्ब में बड़े भाई उत्तम सिंह, छोटे भाई फूलसिंह, राजेश हैं, जो मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं।
    - बेटे को अफसर बनाना चाहता था प्रीतम: मजदूरी करने वाला प्रीतम बेटे आशीष को अफसर बनाना चाहता था। आशीष पढ़ाई के प्रति गंभीर था और अभी तक किसी क्लास में फेल नहीं हुआ था। आशीष और प्रीतम के बीच खूब पटती थी। प्रीतम के घायल होने के बाद उसकी तीमारदारी में लगे रिश्तेदारों से आशीष ने रात तक बार-बार पूछा कि पापा कब तक ठीक होंगे और कब घर पहुंचेंगे?
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