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  • Amrit Yojana: 24 months plan, even after 28 months neither water lines were constructed, tanks and plants could not be built.

सुस्त रफ्तार / अमृत योजना: 24 माह की योजना, 28 माह बाद भी न तो पानी की लाइनें बिछीं, न बन पाईं टंकियां और प्लांट

वाटर प्रोजेक्ट 31 मार्च 2020 तक पूरा होना मुश्किल है। वाटर प्रोजेक्ट 31 मार्च 2020 तक पूरा होना मुश्किल है।
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वाटर प्रोजेक्ट 31 मार्च 2020 तक पूरा होना मुश्किल है।वाटर प्रोजेक्ट 31 मार्च 2020 तक पूरा होना मुश्किल है।

  • गर्मियों में नहीं मिल पाएगा अमृत योजना की टंकियों का लाभ, डेढ़ माह में काम पूरा नहीं हुआ तो 25 करोड़ पेनाल्टी लगेगी
  • शहर में पानी और सीवर की समस्या के समाधान के लिए शुरू की गई 730 करोड़ रुपए की अमृत योजना

दैनिक भास्कर

Feb 13, 2020, 06:40 AM IST

ग्वालियर (अनिल पटैरिया). शहर में पानी और सीवर की समस्या के समाधान के लिए शुरू की गई 730 करोड़ रुपए की अमृत योजना ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारियों की मनमानी की शिकार हो गई है। इस योजना को 24 माह में पूरा किया जाना था, लेकिन 28 महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी न तो लाइनें ही बिछाने का काम पूरा हो पाया है और न ही टंकियों और प्लांट के निर्माण का।

प्रदेश सरकार ने इस योजना की अवधि छह माह और बढ़ा दी थी, जो 31 मार्च को पूरी हाे जाएगी। अवधि पूरी होने में महज 47 दिन शेष हैं, लेकिन काम की रफ्तार बेहद धीमी है। आलम यह है कि 12 दिन पहले सामने आई रिपोर्ट में 434 किलोमीटर लंबी पानी की लाइनें बिछना शेष रह गई हैं। कुल मिलाकर 28 महीनों में विष्णु प्रकाश पुंगलिया कंपनी 52.60 प्रतिशत ही काम पूरा कर पाई है।

यह हाल पानी की लाइनों के साथ जलालपुर में बनने वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का भी है। यह भी मार्च तक बनकर पूरी तरह तैयार नहीं हो पाएगा। यहां पर 62 प्रतिशत काम पूरा हो पाया है। इस सब को देखकर लगता है कि वाटर प्रोजेक्ट 31 मार्च 2020 तक पूरा होना मुश्किल है। काम पूरा न होने पर निर्माण एजेंसियों पर 25 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगेगी। 

शासन ने अमृत योजना प्रोजेक्ट के तहत शहर के अंदर वाटर और सीवर प्रोजेक्ट का टेंडर चार कंपनियों को दिया था। इनमें पानी का काम विष्णु प्रकाश पुंगलिया और झांसी की कांक्रीट उद्योग को दिया गया है जबकि सीवर प्रोजेक्ट इनविराड और जयंती सुपर कंस्ट्रक्शन को सौंपा है। सीवर प्रोजेक्ट की रफ्तार कुछ ज्यादा है। अधिकारी काम मार्च अंत तक पूरा होने की उम्मीद जता रहे हैं। 

अभी 389 किमी लाइन और डालना है 
अनुबंध के अनुसार, कंपनी पुंगलिया को 823.5 किलोमीटर पानी की लाइन को डालना है। इसमें 777 किमी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और 46.5 किमी टंकियां भरने वाली लाइन डलना है। 25 सितंबर 2019 से काम शुरू हुआ है। 31 जनवरी 2020 तक 434 किमी पानी की लाइन डल पाई हैं। अभी 47 दिनों में 389 किमी पानी की लाइन और डलना है। यदि प्रतिशत में देखा जाए तो अभी तक 52.60 प्रतिशत काम हो पाया है। 
 

देखिए.. 730 करोड़ रुपए की योजना का ठेकेदार व निगम अफसरों की मनमानी से ये है हाल 

कहां क्या हालात हैं टंकी निर्माण के
इनकी शुरूआत हुई: शिव कॉलोनी (एक बीम पूरा हुआ), गोरखी टंकी (2 बीम पूरे हुए), जेएए अस्पताल और , पिंटो पार्क टंकी (4 बीम पूरे), रिसाला बाजार (5 बीम पूरे)।

इन पर काम चल रहा है
बॉटम स्लेब पूरा: एमिटी पहाड़ी, लक्ष्मीबाई कॉलोनी, लक्ष्मीपुरम, अमलताश कॉलोनी, हीरा भूमिया और रेशम मिल। 
टॉप स्लेब: एवीएम कान्वेंट स्कूल, राजा मानसिंह तोमर, आईटीआई कॉलेज, झलकारी बाई कालेज, कुंज विहार, विनय नगर-3
दीवार खड़ी हुईं : रामकृष्ण आश्रम, चना कोठार। 
यहां काम शुरू नहीं: राजीव आवास योजना, एसपी आफिस, आदर्श नगर, इस्मापुरा, सिंधिया नगर।
यहां टंकी का काम पूरा करने का दावा:  हुरावली, डाइट कॉलेज, तुलसी विहार, गड्ढे वाला मोहल्ला, हनुमान पहाड़ी, दर्पण कालोनी, पीएचई कालोनी, समाधिया कालोनी, शताब्दीपुरम, द्वारकापुरी, महाराजपुरा पहाड़ी, चंदन नगर, तानसेन नगर में टंकियां बन चुकी हैं। अभी कनेक्शन नहीं किया गया है।  
 

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट 
ललियापुरा:
4 एमएलडी का प्लांट बनना है। अभी तक 25% काम पूरा हो पाया है। 
जलालपुर: 145 एमएलडी में 96 प्रतिशत सिविल कार्य और 75% इलेक्ट्रिक मैकेनिकल का काम पूरा हो चुका है। 
शताब्दीपुरम: 8 एमएलडी में 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
लालटिपारा: 65 एमएलडी में 80 प्रतिशत काम हो चुका है। 
 

सीवर नेटवर्क 
मुरार क्षेत्र :
यहां पर 140 किलोमीटर लाइन डालना है। अभी तक 132.58 किमी लाइन डल चुकी है। कई जगह कनेक्शन रह गए हैं। सीवर लाइनों के पुनर्वास (रिहेबिलिटेशन) में 40 किलोमीटर लाइन में 38.96 डाली जा चुकी है। 
लश्कर क्षेत्र: 30:22 किमी एरिया में लाइन डालना है। अभी तक 11 किमी क्षेत्र में काम हो सका है। पुनर्वास लाइन में 57.63 किमी में से 49 किलोमीटर लाइन डल चुकी है।
 

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का 38 प्रतिशत काम बकाया 
जलालपुर में 160 एमएलडी की क्षमता वाला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। इसको बनाने का काम काफी देर बाद शुरू हो पाया। अभी के हालात में 62 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जबकि 38 प्रतिशत काम को 47 दिन में पूरा करना है। इसके साथ ही तिघरा से जलालपुर तक पानी की लाइन लाने का काम झांसी की कांक्रीट उद्योग कर रहा है। प्लान के अनुसार 31 जनवरी तक 20.50 किलोमीटर लाइन डालना थी लेकिन अभी तक 16.50 किलोमीटर का काम ही पूरा किया गया है। 4 किलोमीटर लाइन डालने का काम शेष रह गया है।

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