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ग्वालियर: पहली बार ऐसा बंद; आयोजक हाथ जोड़ रहे थे, एक पत्थर भी नहीं चला

तमाम आशंकाओं के विपरीत एससी-एसटी एक्ट के विरोध के लिए गुरुवार को ग्वालियर बंद पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा

Danik Bhaskar | Sep 07, 2018, 05:01 AM IST

ग्वालियर. एससी-एसटी एक्ट के विरोध में गुरुवार को ग्वालियर बंद नजीर बन गया। पहली बार बंद के दौरान शहर के 20 थाना क्षेत्रों में हिंसा या जबर्दस्ती दुकानें बंद कराने की एक भी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।

एक पत्थर भी किसी दुकान पर नहीं फेंका गया। बंद का आयोजन करने वाले सपाक्स व अन्य सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के हाथों में लाठी-डंडे नहीं थे बल्कि वे दुकान खुली मिलने पर कारोबारी से हाथ जाेड़कर समर्थन देने की अपील कर रहे थे। इसके बाद भी बंद सफल रहा। न दूध डेयरियों से दूध बिका न मेडिकल स्टोर से दवाएं। शहर के सभी प्रमुख बाजार बंद रहे। स्कूल कॉलेज नहीं खुले, पेट्रोल पंप भी शाम 4 बजे के बाद ही खुले। हालांकि बंद दोपहर 3.30 बजे रक्षक मोर्चा के सदस्य प्रभात सिंह राजावत और छोटू भदौरिया को राज्यसभा सांसद प्रभात झा के बंगले पर धिक्कार पत्र और काले झंडे लगाने की तैयारी से पहले पकड़ लिया गया। सूचना मिलते ही अन्य सदस्य पहुंच गए। इसके बाद मोर्चा के सदस्य जब झा के बंगले के बाहर ही धरने पर बैठ गए ताे पुलिस ने दोनों को छोड़ दिया।

3 स्थानों पर हुआ विवाद
फूलबाग चौराहा:
यहां खुली शराब की दुकान बंद करवाने के लिए कुछ युवक आक्रोशित हो उठे। दुकान के स्टाफ ने विवाद करना शुरू कर दिया, तभी पुलिस टीम पहुंच गई तो दुकान बंद कर दी।
स्टेशन बजरिया: यहां कुछ होटल अौर दुकानें खुली थीं, इन्हें बंद करवाने रक्षक मोर्चा, क्षत्रिय महासभा, सपाक्स कार्यकर्ता पहुंचे। तभी पुलिस पहुंची, जिससे कार्यकर्ताओं की कहासुनी हुई।
थाटीपुर: सपाक्स कार्यकर्ता एकत्रित हुए। धारा 144 में ऐसा करने पर जब पुलिसकर्मियों ने टोका तो हंगामा हो गया।

लगे फल और सब्जी के ठेले : बंद के बावजूद फुटकर मंडियों से लेकर गली-माेहल्लों में सब्जी वालों ने सब्जी और फल वालों ने फलों की बिक्री की। हालांकि खरीदारों की संख्या कम रही।

लोक सेवा केंद्र रहा सूना : कलेक्टोरेट में लोक सेवा केंद्र पर रोज 200 से ज्यादा आवेदन आते थे। लेकिन गुरुवार को यह सूना रहा। मोतीमहल व कलेक्टोरेट में कर्मचारी दोपहर 12 बजे के बाद ही पहुंचे।

पुलिस ने ऋषभ को किया नजरबंद : 2 अप्रैल की हिंसा में नामजद ऋषभ भदौरिया को पुलिस ने नजरबंद रखा। दर्पण कॉलोनी में ऋषभ के घर पुलिस सुबह से तैनात हो गई और घर से बाहर आने-जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। ऋषभ की रिश्तेदारी में किसी का निधन हो गया तो अंत्येष्टि में उसे पुलिसकर्मी अपने साथ गाड़ी में मुरार मुक्तिधाम लेकर गए और वापस लाए।

अपराध, दुर्घटनाएं भी बंद अस्पतालों में मरीज घटे : गुुरुवार को शहर बंद हुआ तो अपराध और दुर्घटनाएं भी थम गईं। अस्पतालों में मरीज भी 50 फीसदी से कम पहुंचे। शहर के 20 थानों के आंकड़े देखें तो रोज औसतन 80 एफआईआर दर्ज होती हैं, लेकिन गुरुवार को दिनभर में सिर्फ 4 एफआईआर हुईं। जबकि बुधवार को शहर में 71 एफआईआर दर्ज हुई थीं। इसी तरह जेएएच, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल हजीरा और आयुर्वेद कॉलेज आमखो में आम दिनों में 4150 मरीज ओपीडी में पहुंचते थे, लेकिन गुरुवार को यहां सिर्फ 2102 मरीज ही पहुंचे।