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जो भी इस स्थान पर हॉस्पिटल से जुड़ा, रेखा के हसबैंड सहित उसकी हुई रहस्मय मौत

जो भी इस स्थान पर हॉस्पिटल से जुड़ा, रेखा के हसबैंड सहित उसकी हुई रहस्मय मौत

Sameer Garg | Last Modified - Dec 02, 2017, 12:17 PM IST

जो भी इस स्थान पर हॉस्पिटल से जुड़ा, रेखा के हसबैंड सहित उसकी हुई रहस्मय मौत

ग्वालियर.गोले का मंदिर इलाके में 9 लाख वर्गफीट एरिया में फैली जमीन, जिसने भी यहां हॉस्पिटल बनाने की कोशिश की, वह सुसाइड कर लेता है या फिर उसकी रहस्यमय तरीके से मौत हो जाती है। हॉस्पिटल के लिए आरक्षित इस जमीन पर पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जुड़े। फिर एक्ट्रेस रेखा के हसबैंड मुकेश अग्रवाल, दोनों की मौत हुई। इसके बाद माधवराव सिंधिया ने यहां हॉस्पिटल बनाने की कोशिश की तो उनकी मौत भी एक हवाई दुर्घटना में हुई। फिर से हॉस्पिटल बनाने की कोशिश.....

-करीब 30 सालों से गोला का मंदिर का यह इलाका वीरान पड़ा है। सरकार ने इसे हॉस्पिटल बिल्डिंग बनाने के लिए आरक्षित किया है। यहां हॉस्पिटल बनाने की शुरुआत 1985 से हुई।
-सऊदी अरब के सहयोग से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम से एक हजार बिस्तर के अस्पताल की नींव रखी गई। इसका शिलान्यास उस समय पीएम रहे राजीव गांधी ने किया। उनकी मौत तमिलनाडु में हो गई। उसके बाद यह प्रोजेक्ट वीरान पड़ा रहा।

रेखा के हसबैंड बनाना चाहते थे हॉस्पिटल

-जब मालनपुर इंड्रस्ट्रियल एरिया में हॉटलाइन कंपनी की शुरुआत हुई तो उसके मालिक मुकेश अग्रवाल ने इस जमीन पर एक हॉस्पिटल बनाना शुरू कर दिया। मुकेश अग्रवाल एक्ट्रेस रेखा के हसबैंड थे।
-इधर हॉस्पिटल की बिल्डिंग का काम चल रहा था, लेकिन इसी बीच 1991 में मुकेश अग्रवाल ने सुसाइड कर लिया। इसके बाद फिर से यहां हॉस्पिटल का काम रुक गया। अब तो हॉटलाइन कंपनी ही बंद हो गई।

माधवराव की भी हुई मौत
-माधवराव सिंधिया शुरु से ही यहां एक सुपर स्पेशएलिटी वाला हॉस्पिटल बनाना चाहते थे। उन्होंने भी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उनकी भी 2001 में हवाई दुर्घटना में मौत हो गई।
-उसके बाद से फिर यह जमीन वीरान हो गई। अब एक बार फिर से इस जमीन पर हॉस्पिटल बनाने की कवायद शुरू हो गई। मुकेश अग्रवाल ट्रस्ट चाहता है कि यहां हॉस्पिटल शुरू किया जाए।

फिर से हॉस्पिटल बनाने की कोशिश शुरू
-उधर लंबे समय से वीरान होने के कारण ग्वालियर कलेक्टर ने इस जमीन का लैंड यूज बदलकर महिला-बाल विकास विभाग को दे दिया। यह विभाग यहां महिला शक्ति परिसर बनाना चाहता है।

-अब फिर से हॉस्पिटल बनाने की कवायद राजधानी भोपाल में शुरु हुई है, लेकिन यह हॉस्पिटल अस्तित्व में आएगा या नहीं, क्योंकि कवायद शुरू होते ही कोई न कोई हादसा जरूर हो जाता है।

स्लाइड्स में है इस हॉस्पिटल से जुड़े फोटोज.......

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