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समाचार-४

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Sameer Garg | Last Modified - Dec 23, 2017, 11:31 AM IST

ग्वालियर.पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने गृहनगर से 1984 में लोकसभा का चुनाव हार गए थे। उनकी हार लंबे समय तक चर्चा का विषय रही। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि दूसरी जगह से चुनाव लड़कर खुद को सुरक्षित करने का विकल्प भी अटलजी के पास उपलब्ध था, लेकिन ग्वालियर के लिए उन्होंने खुद ही फैसला कर लिया था, क्योंकि वह राजमाता विजया राजे सिंधिया और उनके बेटे माधवराव सिंधिया के बीच मतभेद को सड़क पर नहीं आने देना चाहते थे।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर को जन्मदिन है। इस मौके पर dainikbhaskar.com पेश कर रहा है उनसे जुड़े कुछ अनछुए पहलू....

- चर्चित टीवी पत्रकार विजय त्रिवेदी की अटलजी के जीवन के पहलुओं पर लिखी किताब ‘हार नहीं मानूंगा’ हार्पर कॉलिन्स इंडिया ने छापी है। किताब में उन्होंने लिखा है कि 1984 के आम चुनाव में अटलजी जानबूझ कर हारे थे।
- बीजेपी ने वाजपेयी को ग्वालियर से उम्मीदवार बनाया था. पर्चा भरने से एक रात पहले वाजपेयी ग्वालियर पहुंच गए और पूर्व मेयर-सांसद नारायण कृष्ण शेजवलकर के घर पर रुके।
- अगले दिन सुबह वहां लालकृष्ण आडवाणी भी पहुंचे, उन्होंने अटलजी से कहा कि भैरों सिंह शेखावत का संदेश और सलाह है कि अटलजी तुरंत कोटा पहुंचे और वहां से लोकसभा का चुनाव नामांकन दाखिल करें।
- वाजपेयी ने आडवाणी जे के सामने ऐलान किया, ‘मैं कोटा से चुनाव नहीं लडूंगा’, लालजी मैं दो सीटों से चुनाव नहीं लडूंगा और चुनाव लडूंगा तो सिर्फ ग्वालियर से।’

- इसके बाद सब चुप हो गए। आडवाणी जी ने खामोशी को तोड़ते हुए कहा, ‘आपके दिल्ली से ग्वालियर रवाना होने के बाद मुझे जानकारी मिली है कि कांग्रेस जबरदस्ती माधवराव सिंधिया को ग्वालियर से उम्मीदवार बना रही है, रात को मैंने भैरोंसिंह शेखावत और साथियों से सलाह मशविरा किया तो भैरोंसिंह ने कहा कि वाजपेयी जी को कोटा सीट से मैदान में उतारा जा सकता है. इससे आप आराम से देश भर में चुनाव प्रचार कर सकेंगे, और हमारी इच्छा है कि आप कोटा से चुनाव लड़ें’।


सड़क पर न आए मां-बेटे की अनबन
- वाजपेयी ने कहा, ‘मैंने माधवराव जी को बता दिया है कि मैं ग्वालियर से चुनाव लडूंगा. उन्होंने मुझे शुभकामनाएं भी दी हैं और वे गुना से चुनाव लड़ेंगे’। आडवाणी ने कहा, ‘हो सकता है, लेकिन राजीव गांधी की जबरदस्ती पर सिंधिया को ग्वालियर से ही लड़ना पड़ेगा’।
- अटलजी ने तुरंत कहा, ‘तब तो मैं सिर्फ़ ग्वालियर से ही चुनाव लडूंगा, क्योंकि आपकी सलाह के मुताबिक मैंने कोटा से चुनाव लड़ा तो फिर माधवराव के मैदान में आने पर राजमाता ग्वालियर से चुनाव लड़ने के लिए कहेंगी, और दो सीटों पर पर्चा भरने से उन्हें मना नहीं किया जा सकेगा, जबकि मैं किसी भी कीमत पर मां-बेटे के मनमुटाव को सड़क पर नहीं लाना चाहता’।


कांग्रेस की रणनीति में फंसकर विदिशा से पर्चा नहीं भर सके अटल जी
- 1984 में वाजपेयी ग्वालियर से और माधवराव सिंधिया कांग्रेस के टिकट पर गुना से चुनाव लड़ना चाहते थे. उस वक्त अर्जुन सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे. उन्होंने राजीव गांधी को सलाह दी कि सिंधिया को गुना के बजाय ग्वालियर से मैदान में उतारा जाये।
- खास रणनीति के तहत आखिरी दिन सिंधिया को ग्वालियर से पर्चा भरने भेज दिया गया। वाजपेयी तब विदिशा से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पर्चा भरने का आखिरी दिन था और वाजपेयी वहां से विदिशा नहीं पहुंच सकते थे, आखिरकार उन्होंने केवल ग्वालियर से ही चुनाव लड़ा, और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद तो पूरे देश में पैदा हुई लहर के परिणाम स्वरूप हार गए।

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Web Title: aadvaani nahi chaahte the atlji yaha se Lade chunaav, ye thi asli wajah
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