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न्यूज-१

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Pushpendra Singh | Last Modified - Dec 24, 2017, 06:26 PM IST

ग्वालियर. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बचपन के मित्र शैवाल सत्यार्थी के सामने उनका जिक्र छेड़ा तो वह अचानक भावुक हो गए और बोले, वह मेरे लिए कृष्ण और मैं सुदामा हूं। शैवाल करीब 9 माह पूर्व वह उनसे मिलने गए थे उनकी हालत देख बहुत दुख पहुंचा, लेकिन यह देख कर गदगद हो गए कि स्मृति लोप की हालत में भी अटल जी उन्हें पहचान मुस्कुरा दिए और हाथ पकड़ लिया। अटलजी ने सिखाए दोस्ती के मायने....

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 25 दिसंबर को जन्मदिन है। इस मौके पर dainikbhaskar.com पेश कर रहा है उनसे जुड़े कुछ अनछुए पहलू....

- देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के यूं तो दुनिया में अनेक मित्र थे, लेकिन जब बचपन के मित्रों की बात आती है तो सबसे पहले नाम आता है रामबाग कॉलोनी में रहने वाले मनराखन मिश्र और शैवाल सत्यार्थी का। बीते साल मनराखन मिश्र इस दुनिया से विदा हो गए। अब शैवाल सत्यार्थी हैं जो उनके बचपन की स्मृतियों को सहेजे हुए हैं।


- अटलजी शैवाल से थोड़े बड़े थे लेकिन पड़ोसी होने के नाते उनकी शैवाल से दोस्ती हो गई। अटलजी से प्रभावित शैवाल सत्यार्थी ने भी वहीं से पढ़ाई की जहां अटलजी पढ़े थे। अटलजी ने ही शैवाल को बताया कि दोस्ती का मतलब यह नहीं होता कि हर वक्त दोस्त का समर्थन ही किया जाए, बल्कि सच्चा दोस्त वह होता है जो गलत करने पर सही राह दिखा सके।
- शैवाल ने बताया कि तत्कालीन VC स्कूल (अब हरि-दर्शन) में अटलजी उनके सीनियर थे, एक डिबेट में उन्हें जज बनाया गया था। शैवाल ने भी उसमें भाग लिया था, लेकिन एक लड़की से डिबेट करते वो नर्वस हो गए। उन्हें उम्मीद थी जज अटलजी हैं तो नर्वसनेस को नजरअंदाज कर देंगे, जबकि अटलजी ने शैवाल को ‘0’ दिया। पूछने पर बोले-अभी बैसाखी दे दूंगा तो तुम विकलांग ही रह जाओगे।

अटलजी कृष्ण, मैं सुदामा : शैवाल
- शैवाल सत्यार्थी ने बताया कि मैं अटल बिहारी वाजपेयी राजनीति के शिखर पहुंच कर भी अपनों के लिए बेहद सामान्य बने रहे। पहली बार प्रधानमंत्री बन ग्वालियर आए तो मनराखन मिश्र जी और मुझे विशेष तौर पर मिलने बुलाया, घर के बने पकवान मंगाए और साथ बैठकर खाए।
- बीते साल शैवाल सत्यार्थी को दिल का दौरा पड़ा, लेकिन स्वस्थ हो गए। उस वक्त उनकी इच्छा हुई कि अटलजी से मिलना चाहिए।

- वह दिल्ली पहुंचे और अटलजी से मिलने के लिए आवेदन की औपचारिकता पूरी की। उनका आवेदन अटल की देखरेख कर रहे झींगटा जी तक पहुंचा, उन्होंने अटलजी के सामने ग्वालियर से शैवाल सत्यार्थी नाम पढ़ा, तो बोलने में कठिनाई महसूस कर रहे अटलजी ने झींगटाजी को इशारे से मेरे लिए तत्काल सारे इंतजाम करने का निर्देश दिया।
- शैवाल ने बताया कि अटलजी लगभग स्मृति लोप की स्थिति में मिले, इसके बावजूदजब झींगटाजी ने नाम लेकर मेरी ओर इशारा किया तो अटलजी की आंखों में मुस्कान आई और चेहरे पर खुशी के भाव। झींगटाजी ने आश्चर्य से बताया कि लंबे अरसे बाद किसी को देख कर अटलजी के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में खुशी की प्रतिक्रिया आई।’

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