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इस किले के दरवाजे पर लटकता था भेड़ का कटा सिर, टपकते खून से तिलक कर होती थी राजा से मुलाकात

इस किले के दरवाजे पर लटकता था भेड़ का कटा सिर, टपकते खून से तिलक कर होती थी राजा से मुलाकात

Pushpendra Singh | Last Modified - Jan 06, 2018, 08:17 AM IST

  • इस किले के दरवाजे पर लटकता था भेड़ का कटा सिर, टपकते खून से तिलक कर होती थी राजा से मुलाकात
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    चंबल के किनारे बने अटेर किले का वह दरवाजा जहां खून से तिलक करने के बाद ही होती थी एंट्रूी

    ग्वालियर.भिंड के अटेर में राजा महा सिंह भदौरिया के बनाए इस किले का मुख्य दरवाजा आज भी लाल है। महा सिंह के जमाने में इस दरवाजे भेड़ का ताजा कटा सिर लटकाया जाता था। सिर से टपकते खून का तिलक लगा कर अंदर जाने पर ही राजा से मुलाकात हो सकती था। किले के दरवाजे से टपकता था खून.....


    - भदावर राजाओं के शौर्य के प्रतीक अटेर किले के लाल दरवाजे से राजा महा सिंह के दौर में खून टपकता था। सामान्य जनों के लिए इस किले में प्रवेश के दूसरे रास्ते थे, लेकिन राजा महा सिंह के गुप्तचर और विश्वस्त योद्धा इस विशेष दरवाजे से ही अंदर जाते थे।
    - आज भी लाल रंग के इस दरवाजे को खूनी दरवाजा कहा जाता है, क्योंकि प्रवेश से पहले इस दरवाजे से टपकते खून से तिलक करने के बाद ही राजा से मुलाकात की परंपरा थी।


    हर दिन लटकाया जाता था ताजा कटा भेड़ का सिर
    - दरवाजे के ऊपर रोज भेड़ का सिर काटकर लटकाया जाता था, साथ ही दरवाजे के नीचे एक कटोरा रख दिया जाता था।
    - भेड़ के सिर से टपकता खून इस कटोरे में इकट्ठा होता था। दरवाजे से प्रवेश से पहले कटोरे में रखे खून से तिलक किया जाता था।
    - आम आदमी के लिए किले के इस दरवाजे से प्रवेश करने की इजाजत नहीं थी।


    महाभारतकालीन पहाड़ी पर बना है ये किला
    - भदावर के राजा महा सिंह ने अटेर में इस किले का निर्माण चंबल के किनारे एक पहाड़ी टापू पर कराया 1664 में कराया था। हालांकि इस पहाड़ी का उल्लेख महाभारत में भी हुआ है। इस काल में चंबल के किनारे इस पहाड़ी को देव गिरि कहा जाता था।
    - महाभारत के मुताबिक देव गिरि नाम इस क्षेत्र की दैवीय चेतना की वजह से रख गया था। यहां उस वक्त ऋषि-मुनि तपस्या किया करते थे। महाभारत के ही मुताबिक पांडवों ने भी कई सामरिक सिद्धियों के लिए देवगिरि पर्वत पर साधना की थी।


    स्लाइड्स में है महाभारतकालीन देव गिरि पर्वत पर बना अटेर का किला....
  • इस किले के दरवाजे पर लटकता था भेड़ का कटा सिर, टपकते खून से तिलक कर होती थी राजा से मुलाकात
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    चंबल की देव गिरि पहड़ी पर बना अटेर का किला, महाभारत काल में इस पहाड़ी पर ऋषि-मुनि करते थे तपस्या
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    राजा महा सिंह भदौरिया ने 1664 में बनवाया था अटेर का किला
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    इस दरवाजे को कहा जाता था खूनी दरवाजा, अंदर जाने के लिए करना पड़ता था खून से तिलक, आम लोगों के लिए बैन था यह दरवाजा, विश्वस्त योद्धा और गुप्तचरों को मिलती थी एंट्री
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    अटेर किले के खूनी दरवाजे पर ऊपर ऱका जाता था ताजा कटा भेड़ का सिर, जिससे टपकता था खून
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    अटेर किले में पुरातत्व विभाग का लगवाया शिला लेख
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Web Title: Ater Fort Constructed On Dev Giri Hills Of Mahabharat Era Along Chambal
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