Hindi News »Madhya Pradesh »Gwalior» Parents Abandon These Girls, Now Adopted Foreigners

झाड़ियों में मिली थीं 4 साल पहले तीन लड़कियां, अब लिया विदेशियों ने गोद

जिन लड़कियों को पैदा होते ही उनके पेरेंट्स ने छोड़ दिया, उन्हें अब विदेशी माता-पिता मिल गए हैं।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jan 22, 2018, 08:26 AM IST

  • झाड़ियों में मिली थीं 4 साल पहले तीन लड़कियां, अब लिया विदेशियों ने गोद
    +2और स्लाइड देखें
    तीन साल की साक्षी, जिसे कनाडा के रंजीत सिंह परमार ने गोद लिया है।

    ग्वालियर. आठ साल की खुश्बू, जिसे पांच साल पहले उसके पेरेंट्स ने मंदिर में छोड़ दिया था। पांच साल तक दतिया के रोशनी गृह में पली। अब उसे जार्जिया के जोनाथन ने गोद लिया है। यही कहानी 3 साल की आस्था की है, जिसे गोद लेने के लिए स्पेन की सिलविया दतिया आ रही हैं। इसी शिशु गृह की लड़की साक्षी को कनाडा के रंजीत सिंह ने अपने परिवार का हिस्सा बनाया है। यह है मामला......


    -2012 में रोशनी शिशु गृह को ग्वालियर के काली माता मंदिर पर तीन वर्षीय खुशबू नामक बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। पिछले पांच साल से खुशबू रोशनी शिशु गृह में रह रही है और अब आठ साल की हो गई है।
    -इसी प्रकार 2014 में एक नवजात बच्ची भांडेर में झाड़ियों में मिली थी। बच्ची को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर रोशनी शिशु गृह पहुंचाया। रोशनी शिशु गृह ने उसका नाम आस्था रखा। अब आस्था तीन साल की हो गई है।
    -तीसरी लड़की भी 2014 में ही बुंदेला कॉलोनी में संचालित रोशनी शिशु गृह के पास झाड़ियों में ही मिली थी। इस बच्ची का नाम साक्षी रखा गया। साक्षी भी अब तीन साल की हो गई।


    तीनों बच्चियों को मिलेंगे विदेशी पेरेंट्स
    -रोशनी शिशु गृह से बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन के साथ शुरू होती है। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर बच्चा गोद दिया जाता है। आठ वर्षीय खुशबू को जार्जिया में रहने वाले मिस्टर जोनाथन कोक्स गोद लेंगे।
    -इसी प्रकार तीन वर्षीय आस्था को स्पेन निवासी एवं सिंगल मदर सिलविया और साक्षी को कनाडा के रंजीत परमार गोद लेंगे। ये तीनों लोग 28 जनवरी को दतिया आएंगे।
    -इस बारे में रोशनी शिशु गृह के संरक्षक बलदेव राज का कहना है कि उनके यहां बच्चों की देखभाल बिल्कूल घर जैसी होती है और ऑनलाइन प्रक्रिया से इन विदेशी पेरेंट्स का चयन हुआ है। 28 जनवरी को रोशनी गृह में रहने वालीं तीन बच्चियों को विदेशी दंपत्ति गोद लेंगे। यह हमारे लिए सुखद बात है।


    -18 बच्चे अभी भी रह रहे हैं रोशनी गृह में
    -बुंदेला कॉलोनी में संचालित रोशनी शिशु गृह की स्थापना 1995 में स्वतंत्रता संग्राम सैनानी रामलाल सोनी (बाबूजी) ने की थी। बाबूजी के सामने एक लावारिस कन्या के संबंध में घटी घटना ने उन्हें बहुत दुखी कर दिया था। उन्होंने तुरंत उस कन्या को अपने संरक्षण में लिया और उसको नाम दिया रोशनी।
    -बाबूजी ने न केवल रोशनी को अपने संरक्षण में लिया बल्कि रोशनी के नाम से इस आशय की एक डीड रजिस्टर्ड कराई कि रोशनी के बालिग होने पर उनके बड़े बेटे का छोटा पुत्र (नाती) रोशनी से शादी करेगा तो वह उनकी संपत्ति का स्वामी होगा।
    -यदि नाती रोशनी से शादी नहीं करता तो जो भी पात्र युवक रोशनी से शादी करेगा तो वह संपत्ति का स्वामी होगा। इसके साथ ही नींव पड़ी रोशनी शिशु गृह की, जहां जाति, नस्ल, भाषा तथा धर्म के भेदभाव से मुक्त समस्त लावारिश बेसहारा शिशुओं की परवरिश की जाती है और नि:संतान दंपत्तियों को गोद दिया जाता है।

    स्लाइड्स में है गोद दी जाने वाली लड़कियों के फोटोज.......

  • झाड़ियों में मिली थीं 4 साल पहले तीन लड़कियां, अब लिया विदेशियों ने गोद
    +2और स्लाइड देखें
    आस्था, जिसे स्पेन की सिलविया ने गोद लिया है
  • झाड़ियों में मिली थीं 4 साल पहले तीन लड़कियां, अब लिया विदेशियों ने गोद
    +2और स्लाइड देखें
    आठ साल की खुश्बू, जिसे जार्जिया के जोनाथन ने गोद लिया है
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Gwalior News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Parents Abandon These Girls, Now Adopted Foreigners
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Gwalior

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×