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शेर की हूबहू दहाड़ निकालने की महारथ ने तानसेन को बनाया च्संगीत-सम्राटज्

शेर की हूबहू दहाड़ निकालने की महारथ ने तानसेन को बनाया च्संगीत-सम्राटज्

Pushpendra Singh | Last Modified - Dec 19, 2017, 02:08 PM IST

ग्वालियर.शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर बेहट गांव में 8 साल का नटखट तन्ना जब छुप कर दहाड़ता था तो शेर के अहसास से जानवर सहम उठते थे। चरवाहे सतर्क होकर हांक कर इकट्ठा करने लगते थे, और खेतों में काम कर रहे किसान सतर्क हो जाते थे। तन्ना की इसी प्रतिभा से प्रभावित होकर स्वामी हरिदास ने अपना शिष्य बना लिया। यही बच्चा बाद में संगीत सम्राट तानसेन बना। स्वामी हरिदास ने तन्ना की दहाड़ सुन पहचानी प्रतिभा....


तानसेन समारोह की शुरुआत 22 दिसंबर से हो रही है। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है संगीत सम्राट तानसेन के जीवन से जुड़ी रोचक जानकारियां....


- वृन्दावन के संन्यासी और भक्तिकाल के महान संगीतकार स्वामी हरिदास अपनी शिष्य मंडली के साथ वहां से गुजर रहे थे।
- अचानक उन्हें शेर की दहाड़ सुनाई दी। सभी शिष्य डर गए, लेकिन आवाज के पारखी स्वामी हरिदास पहचान गए थे कि ये किसी बालक की शरारत है।थोड़ी सी खोजबीन के बाद दहाड़ता हुआ तन्ना नजर आ गया।
- बच्चे की इस शरारत से स्वामीजी नाराज नहीं बल्कि खुश हुए। उन्होंने बालक से दूसरे पशु-पक्षियों की आवाज भी सुनी तो समझ गए कि वो असाधारण प्रतिभावान है।
- उन्होंने पिता मकरंद पांडे से तन्ना को मांग लिया, और अपने साथ ही वृंदावन ले आए। गुरु की शिक्षा, जन्मजात प्रतिभा और कड़ी साधना से 10 साल में ही तन्ना धुरंधर गायक बन गया।


राजा मानसिंह तोमर संगीत की संगीत शाला में निखरी प्रतिभा
- भारत को संगीत का स्वर्णयुग देने वाले ग्वालियर के राजा मान सिंह की उसी संगीत नर्सरी में तानसेन की प्रतिभा निखरी, जहां बैजू बावरा, कर्ण, महमूद, बख्शू और खुद राजा मान सिंह जैसे महान संगीताचार्य और गायन महारथी शिक्षा देते थे।
- ग्वालियर से तोमर राजवंश का प्रशासन खत्म हो जाने पर वहां के संगीतकारों की मंडली बिखर गई। रोजी रोटी की तलाश में युवा तनसुख पाण्डेय रीवा (बांधवगढ़) के राजा रामचन्द्र (राजा राम) का दरबारी गायक बन गया। राजा रामचंद्र ने ही उन्हें तानसेन की उपाधि से विभूषित किया, जो कालांतर में उनका नाम बन गया।

अकबर को 'तानसेन' भेंट कर बचाया रीवा का राज्य
- तानसेन की तान मुगल सम्राट अकबर के कानों तक पहुंची तो रीवा नरेश रामचंद्र से अकबर ने तानसेन मांग लिए।
- राज्य बचाने के लिए तानसेन ने दुखी मन से अकबर के दरबार में जाना स्वीकार कर लिया।
- अकबर के दरबार में पहुंच तानसेन का भाग्य जगमगा उठा। शहंशाह अकबर ने 1156 में तानसेन को अपने नवरत्नों में शामिल कर लिया।

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Web Title: sher ki hubahu dhaaड़ nikalne ki mhaarth ne taansen ko banayaa sngait-smraat
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