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हरिकथा, मीलाद व शहनाई वादन के साथ शुरु हुआ तानसेन समारोह, शाम को सम्मानित होंगे पंडित कशालकर

हरिकथा, मीलाद व शहनाई वादन के साथ शुरु हुआ तानसेन समारोह, शाम को सम्मानित होंगे पंडित कशालकर

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 12:12 PM IST
शास्त्रीय संगीत के गायक पंडित शास्त्रीय संगीत के गायक पंडित

ग्वालियर. तानसेन संगीत समारोह की शुरुआत शुक्रवार की सुबह उनकी समाधि पर हरिकथा, मीलाद व शहनाई वादन के साथ हुई। ढोली बुआ महाराज की हरिकथा के बाद तानसेन और मोहम्मद गौस की समाधि पर चादरपेशी की। शाम को संगीत समारोह में पुणे के गायक  पं. उल्हास कशालकर को तानसेन अलंकरण से सम्मानित किया गया। 


-परंपरा के मुताबिक शुक्रवार की सुबह तानसेन की समाधि स्थल पर तानसेन समारोह की शुरुआत शहनाई वादन, हरिकथा व मिलाद गायन से हुई। सबसे पहले जनाब मजीद खां ने शहनाई वादन किया। इसके बाद सच्चिदानंद ढोली बुआ महाराज ने संगीतमय हरिकथा सुनाई।
-इसके बाद मौलाना इकबाल मीलाद शरीफ पढ़ा और फिर तानसेन के आध्यात्मिक गुरु मोहम्मद गौस और तानसेन की समाधि पर चादरपोशी की रस्म हुई। शाम के समय तानसेन सम्मान के साथ समारोह की शुरुआत होगी।

 

पांच दिन तक चलेगा संगीत समारोह

-हजीरा स्थित तानसेन समाधि परिसर में इस बार संगीत समारोह आयोजित होगा। इसके लिए बटेश्वर थीम पर मंच बनाया गया है। पांच दिन तक चलने वाले इस संगीत समारोह में कई संगीतकार सुर सम्राट तानसेन को स्वरांजलि अर्पित करेंगे।
-समारोह का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार शाम को तानसेन अलंकरण के साथ  किया गया।  शास्त्रीय संगीत के सुप्रतिष्ठित गायक पंडित उल्हास कशालकर को इस साल के  राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से विभूषित किया गया। 

पंडित कशालकर को यह सम्मान प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया और नगरीय विकास मंत्री माया सिंह ने दिया। 

-इस सम्मान में दो लाख रुपए की धनराशि और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।मध्यप्रदेश शासन द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में संगीत सम्राट तानसेन के नाम से स्थापित यह सर्वोच्च राष्ट्रीय संगीत सम्मान है।

 

मानसिंह तोमर सम्मान भी दिया गया
- इसी आयोजन में संगीत सम्राट को भी शिक्षा देने वाले संगीतकार योद्धा राजा मान सिंह तोमर के नाम से शुरू हुए राष्ट्रीय सम्मान भी दिया गया। 
- पहला सम्मान 2011-12 के लिए ओडिसी के गुरू केलुचरण महापात्र को, 2012-13 के लिए त्रिवेणी कला संगम, 2013-14 के लिए रंग श्री लिटिल बैले ट्रुप, 2014-15 के लिए बॉम्बे आर्ट सोसाइटी, 2015-16 के लिए श्री इदगुंजी महागणपति यक्षगान मंडली कर्नाटक और 2016-17 के लिए नांदीकर कोलकाता को दिया गया। 
 

 

 

9 संगीत सभाएं समारोह में होगी

-पांच दिनी समारोह में कुल 9 संगीत सभाएं होंगी। इनमें से पहली 7 सभाएं तानसेन समाधि पर मुख्य मंच पर ,8वीं सभा तानसेन की जन्मस्थली बेहट में तथा अंतिम सभा गुजरी महल परिसर में सजेगी।

- शाम को सभा की शुरुआत ध्रुपद गायन से होगी। इसके बाद पंडित उल्हास कशालकर का गायन होगा। इसी शाम को दिल्ली के शुभेन्द्र राव का सितार वादन होगा। अंत में भोपाल के संजीव झा और मनीष कुमार ध्रुपद गायन प्रस्तुत करेंगे। 
 

स्लाइड्स में है इस समारोह से जुड़े फोटोज......