--Advertisement--

बाबरी मस्जिद ढहने के बाद इस फोटो ने मचाया था बवाल, फोटो जर्नलिस्ट को सुप्रीम कोर्ट में बनाया है गवाह

बाबरी मस्जिद ढहने के बाद इस फोटो ने मचाया था बवाल, फोटो जर्नलिस्ट को सुप्रीम कोर्ट में बनाया है गवाह

Danik Bhaskar | Dec 05, 2017, 03:10 PM IST
विवाद के दौर में अयोध्या की तस विवाद के दौर में अयोध्या की तस

ग्वालियर.अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा कार सेवकों ने ढहाया, उसके बाद भाजपा नेता इकट्ठे हुए। उसी दौरान उमा भारती आईं और खुशी जताने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी से लिपट गईं। ग्वालियर के एक फोटो-जर्नलिस्ट ने यह फोटो क्लिक कर लिया, जो बाद में मामले का प्रमुख सुबूत और दुनिया भर के अखबारों- मैग्जीन्स की सुर्खियां बना। इस मामले में 5 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई है, और ग्वालियर का फोटो जर्नलिस्ट की गवाही CBI सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश कर दर्ज करा चुकी है।


ग्वालियर के फोटो जर्नलिस्ट का ये फोटोग्राफ अयोध्या में 6 दिसंबर 1992को हुए बाबरी विवाद में CBIऔर लिब्रहान आयोग की जांच में अहम सुबूत बना था। मामले की सुनवाई फिर शुरू हुई तो बीते अगस्त में शहर के फोटो जर्नलिस्ट को भी CBI ने कोर्ट के सामने बतौर गवाह पेश किया। dainikbhaskar.comरीकॉल कर रहा है, फोटो से मचे बवाल की कहानी....


खुद उमा भारती ने कहा था,खींचो फोटो
- फोटो जर्नलिस्ट केदार जैन उस समय को रीकॉल करते हुए बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्हें ग्वालियर के एक अखबार की ओर से आंदोलन के कवरेज के लिए अयोध्या भेजा गया था।
- 6 दिसंबर को जब बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया जा रहा था तो उन्होंने कुछ अलग फोटो करने की ठानी, और जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता बैठे हुए थे, उस ओर रुख किया। उसी समय उमा भारती वहां पहुंचीं, वे काफी खुश थीं। इसी खुशी और उत्साह में वह भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी से लिपट गईं। केदार जैन ने फोटो खींचने के लिए जोशी जी से परमिशन ली तो खुद उमा भारती ने खुश होकर कहा फोटो खींचो और पोज भी दे दिया। उमा भारती ने केदार जैन से आग्रह किया कि फोटो उन्हें भी देना, लेकिन उस वक्त उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह फोटो बवाल बन जाएगा।

CBIऔर लिब्रहान आयोग दोनों ने बनाया सुबूत
- जब बाबरी-मस्जिद ध्वंस मामले की CBI जांच घोषित की गई तो केदार जैन को नोटिस मिला। आखिरकार खुद CBI की टीम ग्वालियर पहुंची और केदार का बयान दर्ज किया। CBI ने केदार जैन के बयान और इस फोटो का उल्लेख बतौर सुबूत अपनी FIR में भी किया।
- इसके बाद 16 दिसंबर 1992 को गठित लिब्रहान आयोग ने मामले की जांच की। आयोग ने भी केदार को नोटिस देकर लखनऊ बुलवाया और बयान दर्ज कर उस फोटो-क्लिप की प्रति जमा कराई गई। इसी फोटो के आधार पर CBI ने उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ मामला दर्ज किया।

- इसके बाद हाल ही में 1-2 अगस्त 2017 को केदार जैन को CBI ने फिर बुलाया और बतौर गवाह सुप्रीम कोर्ट में पेश किया। वहां केदार जैन की गवाही दर्ज की गई।

फोटो जारी होते ही मच गया था बवाल,संसद में लहराया गया फोटो
- केदार बताते हैं कि घटना के बाद जैसे-तैसे वह अयोध्या से निकल कर वापसी के लिए रवाना हुए, तो रास्ते में ही मौका मिलने पर ये फोटो-क्लिप जारी कर दी। फोटो दूसरे दिन जब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय अखबारों और मैग्जीन में छपा, तो बवाल मच गया, और इसके बाद तो केदार को राजनेताओं समेत अखबारों व मैग्जीन से उस फोटो के लिए दनादन संदेश आने लगे।
- 9 दिसंबर 1992 को अटलजी ने इस घटना पर संसद में दुख जताया, तो विपक्ष ने हंगामा मचा दिया था। तत्कालीन सांसद राजेश पायलट इस फोटो और संबंधित खबरों को प्रकाशित करने वाले अखबारों की प्रतियों को लहराते हुए सभापति की आसंदी तक पहुंच गए थे।
- उनका साथ तमाम विपक्षी सांसदों ने भी दिया था, और लोकसभा की कार्यवाही ठप कर दी गई थी। केदार के मुताबिक बीते 24 सालों में अब तक दर्जन भर बार संसद में अखबारों –मैग्जीन्स में प्रकाशित इस फोटो को लेकर हंगामा हो चुका है।

स्लाइड्स में हैं अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद के समय के फोटोज.....