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५०० साल पहले एक ओर झुक गया था ये शिव मंदिर, अब भी है टेढ़ा

५०० साल पहले एक ओर झुक गया था ये शिव मंदिर, अब भी है टेढ़ा

Pushpendra Singh | Last Modified - Dec 20, 2017, 04:50 PM IST

ग्वालियर. स्वामी हरिदास के आश्रम से संगीत शिक्षा लेकर किशोर तानसेन राजा मान सिंह तोमर की संगीत शाला में आ गए थे। वहां बैजू बावरा, कर्ण, महमूद, बख्शू और खुद राजा मान सिंह से शिक्षा ले रहे तानसेन एक बार अपने गांव आए तो इसी मंदिर में रियाज करने बैठ गए। किंवदंती है कि इस दौरान कुछ ऐसे सुर लगे कि मढ़ी तिरछी हो कर तानसेन की ओर झुक गई, और आज भी झुकी हुई है।

तानसेन समारोह की शुरुआत 22 दिसंबर से हो रही है। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है संगीत सम्राट तानसेन के जीवन से जुड़ी रोचक जानकारियां....


- अपने गांव आए तानसेन 500 साल पहले शिव के चरणों में रियाज करने बैठ गए थे। शिव की भक्ति में लीन रियाज करते तानसेन की तान से शिव मंदिर डोला और तानसेन की ओर झुक गया।
- रियाज बंद किया तो आसपास के कंपन तो बंद हो गए, लेकिन मंदिर का झुकाव बना रहा। तब से वह आज भी उसी अवस्था में है।
- महाराजा माधोराव सिंधिया प्रथम के जमाने में उसे सीधा करने कुछ इंजीनियर्स भेजे गए, उन्होंने जांच की, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सके, और न ही उसे सीधा करने का उपाय ढूंढ़ सके।
- आज भी कंस्ट्रक्शन टेक्नॉलॉजिस्ट इस टेढ़े शिव मंदिर को देख अचंभे में पड़ जाते हैं, क्योंकि इतने सालों से मंदिर की मढ़ी झुकी हुई है, स्वाभाविक रूप से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की वजह से मंदिर का झुकाव बढ़ना चाहिए और मढ़ी में दरार आनी चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है।

झुकी हुई शिव मढ़ी के पास, ध्रुपद सीखते हैं गांव के गरीब बच्चे
- घोर जंगल में बसे संगीत सम्राट तानसेन के गांव में आज भी ध्रुपद के तराने गूंजते हैं। तानसेन की साधना का प्रताप ही है कि गरीबी के बावजूद संगीत साधना का जज्बा इस गांव के बच्चों में जिंदा है।
- जहां तानसेन रियाज किया करते थे, उसी झुके हुए शिवालय को छाया देते बूढ़े बरगद तले के संगीत सम्राट के गांव के बच्चे शिव से संगीत का वरदान हासिल करने की साधना में जुटे हैं।

- बच्चों के साधना स्थल पर बिजली की रोशनी भी नहीं है, गांव से भी खास सहयोग नहीं मिलता, लेकिन संगीत सीखने के धुनी बच्चे जुटे हुए हैं।
- साधना का सुफल उन्हें तानसेन के आशीर्वाद के रूप में मिला भी है। इन नन्हें ध्रुपद गायकों को 2 साल पहले मौसिकी के महाकुंभ ‘तानसेन-समारोह’ में सबसे पहले प्रस्तुति का मौका दिया गया था।
- तानसेन के गांव के इन बच्चों ने 15 दिसंबर 2015 को देश भर के संगीत उस्तादों के सामने ध्रुपद जैसी कठिन गायन शैली में प्रस्तुति दी थी।
- तानसेन के गांव के अनगढ़ हीरों को तराशने में जुटे शिवनारायण नाथ ने बताया कि संगीत सीख रहे कमलेश के पिता दूसरों के खेतों में मजदूरी करते हैं, तो विशाल के पिता जूते गांठ कर अपने परिवार का पेट पालते हैं।

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Web Title: 500 saal pehle ek or jhuk gaya thaa ye shiv mandir, ab bhi hai teढ़aa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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