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सिधिया महाराज का आरामगाह था यह तैरता महल, अब तैयार होते हैं क्चस्स्न कमांडोज

सिधिया महाराज का आरामगाह था यह तैरता महल, अब तैयार होते हैं क्चस्स्न कमांडोज

Sameer Garg | Last Modified - Dec 01, 2017, 10:55 AM IST

ग्वालियर. शिकार खेलने और आराम करने के लिए जीवाजी राव सिंधिया ने एक फ्रांसीसी स्टाइल का पैलेस एक झील के किनारे बनाया। यह पैलेस ठीक उसी तरह का था, जैसे एक क्रूज शिप समुद्र में चल रहा हो। अब इस पैलेस में BSF अकादमी का मुख्यालय है, जहां वे देश की सुरक्षा के लिए कमांडोज तैयार करते हैं।


1 दिसंबर को दुनिया से सबसे बड़े पैरा मिलेटरी फोर्सBSF का स्थापना दिवस है। इस मौके पर dainikbhaskar.com टेकनपुर की उस अकादमी के बारे में बता रहा है, जहां देश की रक्षा के लिए कमांडोज तैयार किए जाते हैं।


- BSF की स्थापना को 52 साल पूरे हो चुके हैं। पांच दशक पहले टेकनपुर में BSF अकादमी स्थापित की गई। एक झील के किनारे तैरते हुए इस क्रूज भवन को राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने BSF को सौंप दिया।
- सिंधिया राजपरिवार ने 1965 में BSF को मात्र 6.41 लाख रुपए में पैलेस के साथ यह पूरी जमीन दे दी थी। इसमें झील के साथ करीब 3000 जमीन है और इसमें 643 एकड़ जमीन में एक झील बनी हुई है। झील में हरसी डैम से पानी आता है।


स्पेनिश आर्कीटेक्ट ने बनाया था यह पैलेस
- टेकनपुर के इस पैलेस को स्पेनिश आर्कीटेक्ट टीए रीटिच ने बनाया था। स्वतंत्रता के पहले जीवाजीराव सिंधिया ने फ्रांस में तैरता हुआ पैलेस देखा था। उसी समय यह विचार आया कि ऐसा पैलेस उन्हें बनाना चाहिए।
-यह तैरता हुआ क्रूज शिप जैसा पैलेस 12500 वर्ग फीट में बना है और चार मंजिला भवन में 45 कमरे हैं। इसका निर्माण पूना के विलास पैलेस जैसा है ।

BSF ने बनाया ट्रेनिंग मुख्यालय
- अब इसमें BSF अकादमी का मुख्यालय है। इसे सुरक्षा भवन का नाम दिया गया है। BSF की इस अकादमी में अफसरों के अलावा कमांडोज तैयार किए जाते हैं। BSF के हर कमांडो को टेकनपुर आकर अपना कोर्स पूरा करना होता है।

स्लाइड्स में है झील में तैरता सा सिंधिया राजवंश का आरामगाह ....

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