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न्यूज गोडसे

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Dainik Bhaskar

Nov 16, 2017, 07:01 PM IST
तेज रप्तर ट्रैपिक के युग में द तेज रप्तर ट्रैपिक के युग में द

ग्वालियर. शिवपुरी के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों गांव आज भी शहर से इस तरह कटे हुए हैं कि पेट भरने के लिए राशन भी जान जोखिम में डाल कर घर पहुंचाना पड़ता है। इन गांवों में बच्चे और महिलाएं शहर से राशन खरीद कर इन बोरियों को ट्यूब के सहारे कूनो नदी के पार अपने गांवों तक पहुंचाते हैं। गांव वालों को अपने बच्चों की जान इसलिए जोखिम में डालनी पड़ती है क्योंकि इसके अलावा गांव पहुंचने का कोई और रास्ता है ही नहीं। ट्यूब के सहरे नदी पार कर बच्चे लाते हैं राशन....

 

 

- शिवपुरी से 72 किलोमीटर दूर पोहरी पंचायत डिगडौली और चार दूसरे गांव के किसान इसीतरह की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सर्दी, गर्मी हो बारिश इन पांच गावों में हमेशा इसी तरह के हालात रहते हैं।

- लोग बीमार हों, बच्चों को रोजाना स्कूल जाना हो, या राशन लाना हो, डिगडौली, श्यामपुर, टुकी, श्रीपुरा और भरतपुर गांवों की 4 से 5 हजार आबादी को आने जाने के लिए ट्यूब के सहारे नदी पार करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। हालांकि इन गावों के लिए एक पुल मंजूर हो गया है, लेकिन ये पुल कब बनेगा इसका किसी को पता नहीं है।

- इन गावों में राशन देने के लिए कोई सरकारी शॉप नहीं है। लिहाजा इन लोगों को कूनो नदी ट्यूब के सहारे तैर खरवाया ग्राम पंचायत में जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि बीते शनिवार 11 नवंबर को गांव के कल्ला आदिवासी का बेटा ट्यूब के सहारे नदी पार कर समय पर हॉस्पिटल नहीं भेजा जा सका, लिहाजा उसकी मौत हो गई।

- नायब तहसीलदार राकेश सुमन ने भी मजबूरी जताते हुए बताया कि पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है, लिहाजा वह खुद भी कभी इन गांवों में नहीं जा सके हैं।

 

स्लाइड्स में है ट्यूब के सहारे नदी पार कर राशन ले जाते बच्चे....

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