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गोडसे ने पिस्टल खरीद कर यहां की थी १० दिन रह कर महात्मा गांधी को मारने की रिहर्सल

गोडसे ने पिस्टल खरीद कर यहां की थी १० दिन रह कर महात्मा गांधी को मारने की रिहर्सल

Pushpendra Singh | Last Modified - Nov 15, 2017, 02:45 PM IST

ग्वालियर। जिस शहर में नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या के लिए पिस्टल खरीदने के बाद प्रैक्टिस की थी वहीं उसका मंदिर बन गया है। आज ही के दिन (15 नवंबर 1949) गोडसे को अंबाला जेल में फांसी दी गई थी। जिस पिस्टल से महात्मा गांधी की हत्या की थी, वो सिंधिया रियासत की सेना के एक अफसर की थी।

-नाथूराम गोडसे का जन्म महाराष्ट्र के बारामती में हुआ था। जन्म के समय नाथूराम का नाम रामचंद्र था। गोडसे ने अपने साथियों के साथ दिल्ली में महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रची और फिर हथियार का बंदोबस्त करने के लिए ग्वालियर आए।

-ग्वालियर में हिंदू महासभा से जुड़े डॉ.दत्तात्रेय परचुरे से गोडसे की मुलाकात हुई और उन्होंने एक पिस्टल का बंदोबस्त कराया। ग्वालियर से पिस्टल खरीदने की वजह यह थी कि सिंधिया रियासत में हथियार के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती थी।

- परचुरे के परिचित गंगाधर दंडवते ने जगदीश गोयल की पिस्टल का सौदा नाथूराम से 500 रुपए में कराया था। पिस्टल खरीदने के बाद 10 दिन ग्वालियर में रह कर गोडसे और सहयोगियों ने हत्या की तैयारी की थी।

एक कोशिश नाकाम हुई तब गोडसे आया ग्वालियर

- महात्मा गांधी की हत्या की साजिश के तहत 20 जनवरी 1948 में की गई कोशिश में नाकाम रहने के बाद नाथूराम गोडसे भाग कर ग्वालियर आ गया था। इस बार उसने अपने साथियों की जगह खुद ही बापू को मारने का इरादा कर लिया था। इसके लिए उसने शहर में हिंदू संगठन चला रहे डॉ.दत्तात्रेय शास्त्री परचुरे के सहयोग से अच्छी पिस्टल की तलाश शुरू की।

- ग्वालियर से पिस्टल खरीदने की वजह यह थी कि सिंधिया रियासत में हथियार के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होती थी। परचुरे के परिचित गंगाधर दंडवते ने जगदीश गोयल की पिस्टल का सौदा नाथूराम से 500 रुपए में कराया था।

- इसी पिस्टल से नाथूराम ने 30 जनवरी 1948 को गांधी जी को तीन गोलियां मारी थीं, इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई थी।

सिंधिया सेना के अफसर लाए थे इटालियन पिस्टल

- 1942 में सैकेंड वर्ल्ड वार के दौरान ग्वालियर की एक सैनिक टुकड़ी के कमांडर ले.ज.वीबी जोशी की कमान में अबीसीनिया में मोर्चे पर तैनात की गई थी। मुसोलिनी की सेना के एक दस्ते ने इस टुकड़ी के सामने हथियारों समेत समर्पण कर दिया था।

- इन्हीं हथियारों में इटालियन दस्ते के अफसर की 1934 में बनी 9mm बरेटा पिस्टल भी थी। इसे खुद ले.ज.जोशी ने अपने पास रख लिया था। बाद में इसे जगदीश गोयल ने ले.ज.जोशी के वारिसों से खरीद लिया था।

ऐसे हुई महात्मा गांधी की हत्या

- बरेटा पिस्टल और गोलियां खरीदकर नाथूराम गोडसे ने 10 दिन तक ग्वालियर में ही स्वर्ण रेखा नदी की तलहटी में इस पिस्टल को चलाने और निशानेबाजी की प्रैक्टिस की और साथी नारायण आप्टे के साथ दादर-अमृतसर पठानकोट एक्प्रेस में बैठ कर दिल्ली रवाना हो गया था। उसके साथ साजिश में ग्वालियर के डॉ. दत्तात्रेय परचुरे, गंगाधर दंडवते, गंगाधर जाधव और सूर्यदेव शर्मा भी शामिल थे।

- 30 जनवरी 1948 की शाम 5 बजे बापू प्रार्थना सभा के लिए निकले थे। तनु और आभा उनके साथ थीं। उस दिन प्रार्थना में ज्यादा भीड़ थी। फौजी कपड़ों में नाथूराम गोडसे अपने साथियों करकरे और आप्टे के साथ भीड़ में घुलमिल गया। बापू आभा और तनु के कंधों पर हाथ रखे हुए थे। गोडसे ने तनु और आभा को बापू के पैर छूने के बहाने एक तरफ किया, बापू के पैर छूते-छूते गोडसे ने पिस्टल निकाल ली और दनादन बापू पर तीन गोलियां दाग दीं।

- हे राम....कहते हुए बापू नीचे गिर गए। तानाशाह मुसोलिनी की सेना की पिस्टल ने महात्मा गांधी की जान ले ली। प्रार्थना सभा में भगदड़ मच गई। गोडसे ने नारे लगाए और खुद ही चिल्ला कर पुलिस को बुलाया। वहां मौजूद लोग तो क्या खुद पुलिस ने भी नाथूराम गोडसे को तब गिरफ्तार किया, जब उसने खुद ही पिस्टल नीचे गिरा दी।

स्लाइड्स में है नाथू राम गोडसे और पिस्टल जिससे महात्मा गांधी की हत्या हुई.....

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Web Title: gaodese ne gandhiji ko maarune jahaan se kharidi thi pistl, vhin bana uska mandir
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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