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मिनिस्टर लाल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारजि, कोर्ट ने कहा कि जमानत के लिए मंत्री होना कोई आधार नहीं

मिनिस्टर लाल सिंह की अग्रिम जमानत अर्जी खारजि, कोर्ट ने कहा कि जमानत के लिए मंत्री होना कोई आधार नहीं

Pushpendra Singh | Last Modified - Nov 15, 2017, 08:14 PM IST

ग्वालियर. आरोपी प्रदेश सरकार का मंत्री है,और वह भाग कर नहीं जाएगा। सिर्फ इस आधार पर आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता, और वह भी तब जबकि आरोपी के खिलाफ हत्या जैसे मामले में पर्याप्त साक्ष्य हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंत्री लाल सिंह आर्य की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।ये है मामला....
  
 -  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जस्टिस शील नागू की बेंच ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टव्या पर्याप्त साक्ष्य हैं,इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को दुर्भावना से फंसाया गया है। 
 - हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका  की सुनवाई के दौरान मंत्री लाल सिंह आर्य की ओर से तर्क रखा गया था कि वे शासन के मंत्री है, इसलिए इनके भागकर जाने की कोई संभावना नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत दे दी जाए। कोर्ट में फरियादी राजेन्द्र जाटव की ओर से अधिवक्ता फैजल अली शाह ने पैरवी करते हुए जमानत का विरोध किया था। जबकि सीबीआई की ओर से असिस्टेंट सॉलीसीटर जनरल विवेक खेड़कर ने पैरवी की।
 
 गवाह ने कोर्ट में कहा था कि लाल सिंह के कहने पर हुई थी हत्या 
 - भिंड सेशन कोर्ट में गवाह बनवारी लाल ने बयान देते हुए कहा था कि वह घटना स्थल पर मौजूद था, लाल सिंह आर्य वहां मौके पर आए और उनके कहने पर ही कांग्रेस के पूर्व विधायक माखन जाटव की हत्या की गई। कोर्ट ने इसी बयान के आधार पर मंत्री लाल सिंह आर्य को आरोपी बनाया गया था।
 - इसके खिलाफ मंत्री लाल सिंह की ओर से हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर की गई थी। कि उन्हें  सुनवाई का मौका दिए बिना ही आरोपी बना  दिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने मई 2017 में सेशन कोर्ट को सुनवाई का अवसर देने के आदेश दिए थे। सेशन कोर्ट ने सुनवाई के बाद अगस्त माह में मंत्री आर्य को फिर से आरोपी बनाने के आदेश दिए। साथ ही उन्हें कोर्ट में उपस्थित होने के लिए जमानती वारंट से तलब किया।
 - आरोपी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका दायर करते हुए कहा कि उक्त मामले में सीबीआई ने जांच की है। इसलिए यह सेशन कोर्ट को सुनवाई का अधिकार ही नहीं है। साथ ही उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए।
 
  सीबीआई और पुलिस ने अपने चालान में मंत्री को नहीं बनाया था आरोपी
 - पूर्व कांग्रेस विधायक माखन जाटव की अप्रैल 2009 में हत्या हुई थी। इसमें 9 आरोपियों के खिलाफ सेशन कोर्ट में मामला चल रहा है। इस मामले की जांच पुलिस और सीबीआई दो जांच एजेंसियों ने की, लेकिन मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ किसी ने भी चालान पेश नहीं किया। यहां तक की सीबीआई ने तो गवाह बनवारी लाल के बयान भी दर्ज नहीं किए। कोर्ट ने साक्षी के बयान दर्ज करने के बाद मंत्री लाल  सिंह आर्य को आरोपी बनाए जाने के आदेश दिए।
 - हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी को सेशन कोर्ट में सरेंडर करना होगा। हालांकि आरोपी के पास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का अवसर भी है।
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