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साल में एक बार केवल २४ घंटे के लिए खुलते हैं भगवान कार्तिकेय मंदिर के पट

साल में एक बार केवल २४ घंटे के लिए खुलते हैं भगवान कार्तिकेय मंदिर के पट

Sameer Garg | Last Modified - Nov 01, 2017, 05:08 PM IST

ग्वालियर.400 साल पुराने भगवान कार्तिकेय स्वामी मंदिर के पट एक साल बाद 3 नवंबर की रात को खुलेंगे। इसके बाद केवल 24 घंटे भगवान कार्तिकेय के दर्शन किए जा सकेंगे। साल में एक बार खुलने वाले इस मंदिर में भगवान की एक झलक पाने के लिए हजारों भक्त रात से ही जुटना शुरू हो जाएंगे।

4 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा है और इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा होती है। कार्तिकेय के इस मंदिर से जुड़ी जानकारी dainikbhaskar.com सामने ला रहा है।


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- ग्वालियर के जीवाजीगंज में स्थित यह देश का इकलौता मंदिर है, जहां कार्तिकेय स्वामी की प्रतिमा स्थापित है।
- मंदिर के पुजारी पं.जमनाप्रसाद शर्मा की 5 पीढियां इस मंदिर में सेवा करती आ रही हैं। भगवान कार्तिकेय का मंदिर वर्ष में एक बार, केवल कार्तिक पूर्णिमा को ही खुलता है और यह मंदिर 400 साल पुराना है।

- पुजारी जमुना प्रसाद बताते हैं कि यह देश का इकलौता मंदिर है, जिसमें भगवान कार्तिकेय के साथ गंगा-जमुना और सरस्वती की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं।

- मंदिर के पुजारी जमुना प्रसाद शर्मा ने बताया कि 3 नवंबर की रात को 12 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे।

श्रृंगार के बाद होंगे भगवान के दर्शन
-इसके बाद भगवान कार्तिकेय का श्रृंगार किया जाएगा और सुबह 4 बजे से मंदिर को आम भक्तों के लिए खेल दिया जाएगा। यह मंदिर केवल 24 घंटे के लिए खुलेगा और श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे।
-ग्वालियर-चंबल संभाग ही नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश और राजस्थान से भी श्रद्धालु आते हैं। मंदिर के बाहर मेला लगता है। 5 नवंबर को सुबह 4 बजे मंदिर के पट बंद कर दिए जाएंगे, जो एक साल बाद फिर खुलेंगे।


यह है कार्तिकेय की कथा

- कहा जाता है कि प्रथम पूज्य देव होने की प्रतियोगिता में छोटे भाई गणेश के जीत जाने पर गुस्से में भगवान शिव व देवी पार्वती के बड़े पुत्र कार्तिकेय तपस्या करने अज्ञात स्थान पर चले गए थे।
- उन्हें मनाने के लिए ढूंढ़ते हुए जब शिव-पार्वती पहुंचे तो कार्तिकेय ने श्राप दिया कि स्त्री दर्श करेगी तो वह 7 जन्म तक विधवा रहेगी और पुरुष दर्शन करेंगे तो वे 7 जन्म तक नर्क में जाएंगे।

पार्वती ने आग्रह किया कि कोई ऐसा दिन हो जब आपके दर्शन हो सकें। इसके बाद कार्तिकेय का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने वर्ष में केवल एक दिन अपने भक्तों को दर्शन के लिए निर्धारित किया गया।
- कार्तिकेय ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन जो भी उनके दर्शन करेगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी। तब से यह मंदिर केवल कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही खुलता है।

स्लाइड्स में है इस मामले के फोटोज..........

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