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फ्लोरिंग मशीन में अचानक आया करंट, मजदूर की हुई मौत, बचाने आया दोस्त भी झुलसा

फ्लोरिंग मशीन में अचानक आया करंट, मजदूर की हुई मौत, बचाने आया दोस्त भी झुलसा

Pushpendra Singh | Last Modified - Nov 13, 2017, 10:46 AM IST

फ्लोरिंग मशीन में अचानक आया करंट, मजदूर की हुई मौत, बचाने आया दोस्त भी झुलसा
ग्वालियर. एक निर्माणाधीन मकान में मशीन से मार्वल घिसाई कर रहे मजदूर की करंट लगने से मौत हो गई, उसे बचाने आए साथी के हाथ भी झुलस गए। मकान मालिक व ठेकेदार ने 108 एंबुलेंस बुलाकर दोनों को हॉस्पिटल तो भेज दिया, लेकिन खुद हॉस्पिटल गए न परिजन को सूचना दी। हादसे के 5 घंटे बाद परिजन को किसी मजदूर ने सूचना दी तब हॉस्पिटल पहुंचे। गौरतलब है कि मुनेंद्र के पिता पैरालिसिस की वजह से चलने-फिरने में असमर्थ हैं। ये है मामला.....

- कांचमिल बड़ा गेट निवासी 27 साल का मुनेंद्र सिंह राजावत मार्वल की घिसाई का काम करता था। रविवार को मुनेंद्र अपने साथी जितेंद्र परमार के साथ सिटी सेंटर में पटेल नगर स्थित बृजेश तिवारी के निर्माणाधीन मकान में मार्वल की घिसाई करने के लिए गया था। दोनों मजदूरों को ठेकेदार ने घिसाई के लिए भेजा था।
- मुनेंद्र व जितेंद्र मशीन से मार्वल की घिसाई कर रहे थे, दोपहर बाद अचानक मशीन में करंट आया और मुनेंद्र फर्श पर गिर गया। उसे तड़पता देख साथ काम कर रहे जितेंद्र परमार ने उसे बचाने की कोशिश की, जिससे उसके भी हाथ झुलस गए। तभी किसी तरह मशीन डिस्कनेक्ट हो गई और जितेंद्र करंट से छूट कर फर्श पर गिरा।
- जितेंद्र की चीख सुन मकान की छत पर टहल रहा मालिक बृजेंद्र तिवारी नीचे आया, उसे कमरे में जितेंद्र कराहता मिला, जबकि मुनेंद्र के शरीर में कोई हरकत नहीं थी। बृजेंद्र तिवारी ने ठेकेदार को फोन कर बुलाया, तब तक जितेंद्र तड़पता रहा और मुनेंद्र की बॉडी भी फर्श पर ही पड़ी रही।
- ठेकेदार के आने के बाद उसने 108 एंबुलेंस बुलाई और दोनों को हॉस्पिटल रवाना किया, लेकिन हॉस्पिटल नहीं गए। जयारोग्य हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में बताया गया करंट से झुलसने के कारण मुनेंद्र की मौत हो गई। जबकि उसे बचाने की कोशिश में झुलसे जितेंद्र का कहना है कि तारों में कट लगे होने के कारण मुनेंद्र को करंट लगा था।

अपाहिज पिता को हादसे के 5 घंटे बाद पता चला, नहीं रहा मुनेंद्र
- परिजनों ने बताया कि करंट लगने के बाद मुनेंद्र व जितेंद्र काफी देर तक बृजेश तिवारी के घर में ही पड़े रहे। घटना के समय मौजूद लोगों ने 108 एंबुलेंस से हॉस्पिटल भेजा। भेजा। अगर मकान मालिक तत्काल दोनों को नजदीक के किसी अस्पताल में ले जाते तो दोनों को तत्काल इलाज मिल सकता था, और मुनेंद्र की भी जान भी बचाई जा सकती थी।
- परिजनों ने बताया कि मकान मालिक व ठेकेदार ने उन्हें हादसे की सूचना तक नहीं दी। घटना के 5 घंटे बाद रविवार रात किसी मजदूर ने उन्हें सूचना दी। हादसे की सूचना मिलते ही मुनेंद्र के अपाहिज पिता व माता-पिता छोटे बेटे व रिश्तेदारों के साथ अस्पताल पहुंचे। उन्हें ट्रॉमा सेंटर में स्ट्रेचर पर मुनेंद्र की बॉडी मिली और जितेंद्र ICU में भर्ती मिला।
परिवार का इकलौता सहारा था मुनेंद्र
- मृतक मुनेंद्र के पिता महेश राजावत भी मार्वल की घिसाई का काम करते थे, लेकिन पैरालिसिस की वजह से जलने फिरने में असमर्थ हो गए। मुनेन्द्र का एक छोटा भाई और बुजुर्ग मां है। छोटे भाई ऋषभ की पढ़ाई का खर्जा और परिवार की आजीविका मुनेंद्र की कमाई से ही चलती थी।
- इकलौते सहारे व जवान बेटे की मौत की खबर सुनते ही वृद्ध माता-पिता की हालत बिगड़ गई। हादसे की सूचना मिलते ही यूनिवर्सिटी थाने की पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, छानबीन की जा रही है कि मुनेंद्र को करंट किसकी लापरवाही से लगा।
स्लाइड्स में है मुनेंद्र राजावत और गुस्साए रिश्तेदारों के ता जितेंद्र परमार.....
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